October 20, 2026

अपने पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के साथ वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने भरी आखिरी उड़ान

भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को HJT-16 किरण मार्क-1 ट्रेनर विमान में अपनी अंतिम उड़ान सॉर्टी पूरी की. यह 55 मिनट की उड़ान उनके उड़ान करियर का भावुक समापन साबित हुई. विशेष बात यह रही कि वे अपने पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर विंग कमांडर वीएस कोचर (रिटायर्ड) के साथ विमान संख्या यू 707 में उड़े. 

यह मौका प्रशिक्षक और शिष्य के बीच एक इमोशनल मुलाकात बन गई, जिसने वायु सेना प्रमुख को उनके उड़ान सफर की शुरुआत से जोड़ दिया. एयर चीफ मार्शल सिंह ने अपनी पहली उड़ान 28 जनवरी 1984 को भरी थी. चार दशक से अधिक समय बाद किरण विमान में यह अंतिम सॉर्टी उनके भारतीय वायु सेना में उड़ान यात्रा को पूरे सर्किल में ला खड़ा करती है.

यह भी पढ़ें: मिसाइल इंटरसेप्टर, अर्ली वॉर्निंग सिस्टम और स्टारशील्ड की डिमांड, मार्को रूबियो से मिले जेलेंस्की

सम्बंधित ख़बरें

प्रशिक्षक और शिष्य का अनूठा बंधन

इस अवसर की सबसे खास बात विंग कमांडर वीएस कोचर की उपस्थिति रही. कोचर ने युवा एपी सिंह को उनके शुरुआती उड़ान दिनों में मार्गदर्शन दिया था. आज दोनों एक ही विमान में बैठकर उस पुरानी यादों को ताजा कर रहे थे. यह घटना भारतीय वायु सेना की समृद्ध ट्रेनिंग परंपरा को दर्शाती है, जहां प्रशिक्षक सिर्फ शुरुआती दिनों में ही नहीं बल्कि पूरे करियर में मेंटर की भूमिका निभाते हैं.

Air Chief Marshal AP Singh

एयर चीफ मार्शल ने इस सॉर्टी के जरिए उन सभी प्रशिक्षकों को सम्मान दिया जो पीढ़ियों तक एयर वॉरियर्स को गढ़ते आए हैं. किरण विमान, जो दशकों से आईएएफ पायलटों के प्रशिक्षण से जुड़ा रहा है. इस मौके को और भी यादगार बना गया.

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की यह अंतिम उड़ान सिर्फ एक औपचारिक घटना नहीं बल्कि प्रतीकात्मक महत्व रखती है. 1984 में शुरू हुई उनकी उड़ान यात्रा आज उसी किस्म के ट्रेनर विमान में समाप्त हुई, जिससे वे अपने पेशेवर जीवन की जड़ों से फिर जुड़े. यह घटना वायु सेना में अनुशासन, अनुभव और प्रतिबद्धता के मूल्यों को रेखांकित करती है, जिन्हें उन्होंने अपने लंबे करियर में अपनाया. 

यह भी पढ़ें: मुंबई पुलिस कैसे देती है सेलिब्रिटीज, फिल्म स्टार्स और बिजनेसमैन को सुरक्षा?

किरण मार्क-1 जैसी क्लासिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट में वापसी उन हजारों पायलटों की याद दिलाती है जिन्होंने इसी विमान से उड़ान सीखी. इस सॉर्टी के साथ उन्होंने आईएएफ एयरक्राफ्ट में उड़ान का एक अध्याय खत्म कर दिया, लेकिन उनके अनुभव और नेतृत्व की विरासत आगे भी वायु सेना को दिशा देती रहेगी.

Air Chief Marshal AP Singh

वायु सेना की ट्रेनिंग परंपरा का सम्मान

यह अवसर भारतीय वायु सेना की उड़ान प्रशिक्षण परंपरा को श्रद्धांजलि देने वाला रहा. प्रशिक्षक न केवल तकनीकी कौशल सिखाते हैं बल्कि चरित्र और नेतृत्व गुण भी विकसित करते हैं. एयर चीफ मार्शल सिंह का अपने पहले इंस्ट्रक्टर के साथ अंतिम उड़ान भरना इस बात का प्रमाण है कि वायु सेना में रिश्ते और परंपराएं समय के साथ और मजबूत होती हैं. 

यह घटना युवा अधिकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और यह संदेश देगी कि उड़ान का सफर सिर्फ मशीनों से नहीं बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा से भी जुड़ा होता है. कुल मिलाकर यह एक भावुक, गरिमामय और ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ जिसने भारतीय वायु सेना की समृद्ध विरासत को एक बार फिर उजागर किया.

---- समाप्त ----