October 14, 2026

आज मां कूष्मांडा की पूजा से दूर होंगे संकट? ये शक्तिशाली मंत्र और भोग बदल सकते हैं आपकी किस्मत! | IBC24

Shardiya Navratri 2026 Day 4: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा (Maa Kushmanda) को समर्पित होता है। साल 2026 में यह दिन आज बुधवार 14 अक्टूबर को है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचनाकार माना जाता है। कहा जाता है कि जब चारों ओर अंधकार था, तब देवी की मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। इसलिए उन्हें आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। भक्त इस दिन मां की आराधना करके सुख, शांति, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं।

कैसा है मां कूष्मांडा का स्वरूप?

मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है क्योंकि उनकी आठ भुजाएं हैं। धार्मिक चित्रों में उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, जप माला, गदा और चक्र सुशोभित हैं। मां सिंह पर सवार रहती हैं और उनका तेज सूर्य के समान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का संबंध सूर्य की ऊर्जा से है। उन्हें सूर्य ग्रह की अधिष्ठात्री देवी भी माना जाता है। भक्त मां की पूजा करके जीवन में ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता की कामना करते हैं।

मां कूष्मांडा की पूजा कैसे करें?

नवरात्रि के चौथे दिन (Maa Kushmanda Puja Vidhi) सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा और मां कूष्मांडा का ध्यान करें। देवी के सामने दीपक जलाकर पूजा का संकल्प लें। फिर मां को लाल फूल, फल, मिठाई और सात्विक पकवान अर्पित करें। इसके बाद मंत्र जाप करें। भक्त चाहें तो दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं। पूजा के अंत में मां की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

मां कूष्मांडा को कौन-सा भोग लगाएं?

धार्मिक परंपराओं में मां कूष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाने की मान्यता है। इसके अलावा भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार फल, मिठाई और अन्य सात्विक पकवान भी अर्पित कर सकते हैं। पूजा के बाद प्रसाद को परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में बांटना शुभ माना जाता है। भोग लगाते समय मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

मां कूष्मांडा का मंत्र और जाप

मां कूष्मांडा की पूजा (Maa Kushmanda Mantra) के दौरान 'ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥' मंत्र जाप करते समय मां का ध्यान करें और मन को शांत रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंत्र जाप से एकाग्रता बढ़ाने और मानसिक शांति मिलती है। साथ ही जीवन के कष्ट, रोग, दरिद्रता और बुद्धि दोषों से भी मुक्ति दिलाती है।

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