October 11, 2026

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मंत्रालय, राजभवन- विस और लोकसेवा आयोग के कर्मचारियों का मामला:सीएम सचिवालय की नोटशीट के बाद भी कर्मचारियों का चौथा वेतनमान अटका

भोपाल41 मिनट पहले

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मंत्रालय, विधानसभा, राजभवन, मप्र लोकसेवा आयोग और विधि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतनमान दिए जाने का मामला सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) में अटक गया है।

मुख्यमंत्री सचिवालय (सीएम सेक्रेटेरिएट) से जीएडी को इस संबंध में संक्षेपिका प्रस्तुत करने के लिए नोटशीट लिखी जा चुकी है, लेकिन जीएडी से विभागीय मंत्री के अनुमोदन के लिए फाइल करीब 3 महीने से आगे नहीं बढ़ पाई है। इससे करीब 2500 अधिकारी-कर्मचारी प्रभावित हैं। हर एक अधिकारी-कर्मचारी के लिए हर महीने 4-5 हजार रुपए का फायदा मिलेगा।

ग्रेड पे अलग होने से चौथे समयमान के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी

प्रदेश के अन्य विभागों और विभागाध्यक्ष कार्यालयों के कर्मचारियों को पहले ही चौथा समयमान वेतनमान का लाभ मिल चुका है, लेकिन मंत्रालय, विधानसभा, राजभवन और विधि विभाग के हजारों कर्मचारी अब भी इस वित्तीय लाभ से वंचित हैं।

चूंकि इन चारों कार्यालयों के कर्मचारियों की ग्रेड पे और वेतनमान की स्थिति अन्य विभागों से भिन्न है, इसलिए वित्त विभाग के निर्देशानुसार इस मामले में कैबिनेट का अनुमोदन अनिवार्य है। चौथे समयमान वेतनमान के तहत ग्रेड पे 4,800 रुपए या 5,400 रुपए तय किए जाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे इन कर्मचारियों को सीधा वित्तीय लाभ मिलेगा।

ब्रह्म स्वरूप कमेटी की सिफारिश और वेतन विसंगति का गणित : ब्रह्म स्वरूप कमेटी ने मंत्रालय और विधानसभा समेत इन कार्यालयों में कार्य की विशेष प्रकृति को देखते हुए अन्य कार्यालयों की तुलना में उच्चतर वेतनमान दिए जाने की अनुशंसा की थी।

शुरू में समान, 20 साल बाद मंत्रालय के कर्मचारियों को ज्यादा लाभ

शुरुआती वेतनमान: मंत्रालय और अन्य विभिन्न कार्यालयों में शुरुआती वेतनमान एक जैसा (3050-4590) होता है।

•10 साल बाद : कर्मचारियों को यूडीसी का 4000-6000 रुपए का वेतनमान मिलता है। •20 साल बाद : मंत्रालय के कर्मचारियों को 5500-9000 रुपए का वेतनमान देय होता है, जबकि अन्य कार्यालयों में यह 4500-7000 रुपए रहता है। यहीं से मंत्रालय का वेतनमान अन्य विभागों से अधिक हो जाता है, जिसके चलते पूर्व में दूसरा-तीसरा समयमान वेतनमान भी कैबिनेट के अनुमोदन के बाद ही दिए गए थे।

अनुमोदन में अटका है प्रस्ताव

नियमों के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री (चूंकि यह विभाग मुख्यमंत्री के पास है) का अनुमोदन लिया जाना है। इसके बाद ही मुख्य सचिव के माध्यम से प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जा सकेगा। मुख्यमंत्री सचिवालय से हरी झंडी मिलने के बावजूद जीएडी स्तर पर फाइल पर मंत्री का अनुमोदन न लिए जाने के कारण यह बहुप्रतीक्षित मामला फिलहाल अटका हुआ है, जिससे कर्मचारियों में निराशा है।

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