October 10, 2026

जानें अमिताभ के सियासी करियर की कहानी: जन्मदिन विशेष | Discover the story of Amitabh's political career: A birthday special.

मुंबई, सदी के महानायक और बिग बी अमिताभ बच्चन का 11 अक्टूबर को जन्म दिन है। 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में जन्मे अमिताभ बच्चन प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन के बेटे हैं। बॉलीवुड में सफलता के ऊंचे पायदान को छूने वाले बिग बी राजनीति में भी हाथ आजमा चुके हैं, हालांकि यहां उनकी पारी सिनेमा जैसी हिट साबित नहीं हुई थी।

फिल्मों में 'एंग्री यंग मैन' के तौर पर सिस्टम से लड़ने वाले अमिताभ बच्चन ने असल जिंदगी में भी राजनीति का रुख किया था। 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद अमिताभ बच्चन ने अपने बचपन के दोस्त राजीव गांधी को भावुक रूप से समर्थन देने के लिए कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की। 1984 में अपने जिगरी दोस्त राजीव गांधी के कहने पर उन्होंने इलाहाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। उन्होंने 8वें लोकसभा चुनाव में अपने गृहनगर इलाहाबाद (अब प्रयागराज) सीट से चुनाव लड़ा। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज राजनेता हेमवती नंदन बहुगुणा को एकतरफा मुकाबले में ऐतिहासिक मतों के अंतर से हराया, जो चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक थी।

जब अमिताभ बच्चन का राजनीतिक करियर शीर्ष पर था, तभी 1987 में देश के चर्चित बोफोर्स घोटाले में उनका और उनके भाई अजिताभ बच्चन का नाम आया। हालांकि उन पर लगे सभी आरोप झूठे साबित हुए, लेकिन मीडिया ट्रायल और विपक्षी दलों के विरोध से परेशान होकर उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किए बिना जुलाई 1987 में लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। साल 2012 में उन्हें इस मामले में पूरी तरह क्लीन चिट मिल गई थी।

इस्तीफा देने के बाद अमिताभ बच्चन ने सक्रिय राजनीति से हमेशा के लिए तौबा कर ली और दोबारा कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा। उस दौरान अमिताभ बच्चन की कंपनी एबीसीएल मुश्किल दौर से गुजर रही थी और गांधी परिवार से कोई मदद न मिलने पर अमर सिंह ने उनकी आर्थिक मदद की। अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं। जया बच्चन साल 2004 से लगातार समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर से राज्यसभा सांसद के रूप में राजनीति में सक्रिय हैं। इसके अलावा, दिवंगत नेता अमर सिंह के साथ उनकी करीबी के चलते एक समय उनका झुकाव अप्रत्यक्ष रूप से समाजवादी पार्टी की तरफ देखा गया था।

एक इंटरव्यू में राजनीति और चुनाव लड़ने के बारे में बॉलीवुड के शहंशाह ने कहा था, "मेरा वह फैसला भावनात्मक था। मैं एक दोस्त की मदद करना चाहता था इसलिए राजनीति में आया। राजनीति में आने के बाद पता चला यहां भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं है। मुझे लगा कि मैं यह नहीं कर सकता और इसलिए राजनीति छोड़ दी।"