संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरा है। संयुक्त राष्ट्र की छठी समिति में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को खत्म करने के उपायों पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधि के बयान का जवाब देते हुए भारत के प्रथम सचिव रघु पुरी ने साफ शब्दों में कहा कि आतंकवाद को सिर्फ बयान देकर खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए आतंकियों, उनके संगठनों, उन्हें पैसा देने वालों और उनका साथ देने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी होगी। भारत ने सवाल उठाया कि जब किसी देश की जमीन का इस्तेमाल आतंकियों को पैसा देने, प्रशिक्षण देने, शरण देने या उन्हें मदद पहुंचाने के लिए किया जाता है, तो उस स्थिति में क्या कदम उठाए जाते हैं?
आतंकवाद का शिकार बनने का दावा, लेकिन आतंकियों को संरक्षण देने के आरोप
भारत ने पाकिस्तान के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें वह खुद को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे रहने वाला देश और आतंकवाद का शिकार बताता है। रघु पुरी ने कहा कि पाकिस्तान ने जिन आतंकी संगठनों को तैयार किया, वे बाद में उसके नियंत्रण से बाहर हो गए। अब ये संगठन पड़ोसी देशों के साथ-साथ पाकिस्तान में भी तबाही मचा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान के अपने नेताओं के बयान भी इस स्थिति को उजागर कर चुके हैं। भारत का संदेश साफ था कि एक तरफ आतंकियों का साथ देना और दूसरी तरफ उनके खिलाफ लड़ाई का दावा करना, दोनों बातें एक साथ नहीं चल सकतीं।
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मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाना महज दिखावा, भारत ने उठाए सवाल
भारत ने संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर का मुद्दा भी उठाया। रघु पुरी ने कहा कि भारत पर हमलों के पीछे अहम भूमिका निभाने वाले मसूद अजहर पर इनाम की राशि बढ़ाने की घोषणा महज दिखावा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आतंकवाद को पाकिस्तान की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद किसी से छिपी नहीं है। भारत ने यह भी याद दिलाया कि कुछ महीने पहले ही पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने जैश-ए-मोहम्मद को निष्क्रिय संगठन बताया था। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर मीडिया मसूद अजहर तक पहुंचकर उससे ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पुष्टि हासिल कर सकता है, तो पाकिस्तानी सरकार को उसके ठिकाने की जानकारी क्यों नहीं होगी?
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आतंकी संगठनों को राजनीतिक संरक्षण मिला तो बेअसर हो जाएंगे अंतरराष्ट्रीय वादे
भारत ने कहा कि जब आतंकी संगठन किसी देश में राजनीतिक संरक्षण के सहारे काम करते हैं, तो आतंकवाद के खिलाफ किए गए अंतरराष्ट्रीय वादे बेमानी हो जाते हैं। इससे आतंकवादी हमलों के पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद भी कमजोर पड़ जाती है। रघु पुरी ने दुनिया को 9/11 हमले और ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में पाए जाने की घटना की याद दिलाई। उन्होंने 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों और पहलगाम हमले का भी जिक्र किया। भारत ने कहा कि इन हमलों में जान गंवाने वाले लोगों के परिवार आज भी न्याय और जवाबदेही का इंतजार कर रहे हैं, जबकि हमलों के जिम्मेदार लोग अब तक खुले घूम रहे हैं।
पहलगाम के पीड़ितों से धर्म पूछा गया, राजनीति नहीं
पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए भारत ने पाकिस्तान के उस रुख पर सवाल उठाया, जिसमें वह धार्मिक नफरत के खिलाफ बोलता है, लेकिन उस पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। रघु पुरी ने कहा कि पहलगाम में आतंकियों ने पीड़ितों से उनका धर्म पूछा था, उनकी राजनीतिक विचारधारा नहीं। भारत ने इसे विडंबना बताते हुए कहा कि एक ओर पाकिस्तान धार्मिक नफरत से लड़ने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर उस पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप हैं। इस बयान के जरिए भारत ने यह संदेश दिया कि आतंकवाद और धार्मिक नफरत के मुद्दे पर पाकिस्तान की बातों और उसके कथित आचरण के बीच बड़ा अंतर है।
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ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान के दावों को भारत ने बताया दुष्प्रचार
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान की सैन्य कहानी और उसके दावों पर भी निशाना साधा। रघु पुरी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान लगातार अपनी बात को सही साबित करने के लिए भ्रामक जानकारी और दुष्प्रचार फैला रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान चाहे तो बमबारी से क्षतिग्रस्त एयरफील्ड और गड्ढों से भरे रनवे को अपनी जीत की निशानी बताकर खुश हो सकता है। भारत की इस टिप्पणी का मकसद ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान की ओर से पेश किए जा रहे दावों पर सवाल उठाना और उसके सूचना अभियान को चुनौती देना था।