October 8, 2026

आधी रात को दोस्त को भेजना पड़ा मैसेज, आखिरी वक्त में गोवा के फ्लैट में अकेले क्यों थे नाना पाटेकर?

Nana Patekar Goa Flat: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के आकस्मिक निधन की खबर के बाद उनके अंतिम पलों से जुड़ी जो बातें सामने आ रही हैं, वो दिल को झकझोर देने वाली हैं. गोवा के डोना पाउला स्थित अपने घर में नाना पाटेकर ने रात करीब 2:30 बजे अपने एक करीबी दोस्त को मैसेज भेजा था, जिसमें लिखा था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं लग रही है. रात का वक्त होने के कारण दोस्त ने मैसेज नहीं देखा, लेकिन बाद में जब संपर्क हुआ और सुबह करीब 4 बजे लोग उनके घर पहुंचे, तो नाना पसीने से तर-बतर और बेसुध हालत में थे. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

इस दुखद घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर नाना पाटेकर गोवा के उस आशियाने में अकेले क्यों थे? उनके साथ उनका परिवार या बेटा क्यों नहीं था?

अकेले रहने की आदत

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नाना पाटेकर को किसी पर निर्भर रहना कभी पसंद नहीं था. उनके पास केयरटेकर मौजूद था, लेकिन वो उसे भी भेज देते थे. नाना पाटेकर की यह फितरत कोई नई नहीं थी. वो भीड़-भाड़, ग्लैमर और लोगों के जमावड़े से कोसों दूर अपनी ही दुनिया में रहना पसंद करते थे. जब वो गोवा या खड़कवासला के फार्महाउस पर होते, तो खुद अपनी चाय बनाना, खुद सादा खाना पकाना और घंटों शांत बैठकर प्रकृति को निहारना ही उनका रोजमर्रा का नियम था.

ये भी पढ़ें: मैसेज से लेकर मौत तकनाना पाटेकर के आखिरी 2 घंटे 50 मिनट में क्या-क्या हुआ? जानिए

पत्नी से अलग, बेटे का अपना काम

निजी जिंदगी की बात करें तो नाना पाटेकर अपनी पत्नी नीलकंती पाटेकर से कई सालों से अलग रह रहे थे. हालांकि, उन्होंने कई इंटरव्यूज में बहुत स्पष्टता से कहा था कि उनके बीच कोई कड़वाहट या तलाक नहीं था, बल्कि दोनों ने अपनी मर्जी से अलग रहने का फैसला किया था. नाना ने मराठी में कहा था, “मी एकटाच वेगळा…” (मैं अकेला अलग रहता हूं). उनका बेटे मल्हार पाटेकर भी पुणे और मुंबई में अपने काम और प्रोडक्शन में व्यस्त रहते थे. जब नाना का निधन हुआ, तब मल्हार पुणे में थे और खबर मिलते ही गोवा के लिए रवाना हुए. पिता और बेटे के बीच गहरा प्यार था, लेकिन नाना का मिजाज ऐसा था कि वो कभी किसी के काम में दखल नहीं देते थे और न ही अपने लिए किसी को बांधकर रखना चाहते थे.

अपनों को खोने का दर्द

नाना पाटेकर जब सिर्फ 28 साल के थे, तब उनके पिता का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. इसके बाद उनके दो भाई भी दुनिया छोड़ गए, बहनों का भी निधन हो गया था. सबसे बड़ा आघात तब लगा जब उनका पहला बेटा दुर्वासा महज दो-ढाई साल की उम्र में बीमारी के चलते गुजर गया. सालों तक नाना का एकमात्र सहारा उनकी मां निर्मला पाटेकर थीं, जिनके साथ वो मुंबई के 750 वर्ग फीट के 1BHK फ्लैट में रहते थे. साल 2019 में 99 वर्ष की उम्र में जब मां का साया भी उठ गया, तो नाना अंदर से बिल्कुल अकेले पड़ गए थे. कई इंटरव्यू में उन्होंने बेबाकी से कहा था कि वो मौत से नहीं डरते, क्योंकि उनके अपने पहले ही जा चुके हैं.

यही वजह थी कि उन्होंने अपना पूरा ध्यान किसानों, ‘नाम फाउंडेशन’ और समाजसेवा में लगा दिया. वो कहते थे कि जब खुद का कोई नहीं बचता, तो पूरी दुनिया ही आपका परिवार बन जाती है. लेकिन नियति का क्रूर खेल देखिए, करोड़ों दिलों पर राज करने वाला यह फकीर कलाकार अपनी आखिरी सांस के वक्त उसी सन्नाटे और अकेलेपन के बीच दुनिया से रुखसत हो गया, जिसे उन्होंने जिंदगी भर अपना हमसफर बनाए रखा था.

सोनाली नाईक

सोनाली नाईक

सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.

Read More

google button