नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के कामकाज और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को लेकर देश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। मंगलवार को विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन (INDIA Bloc) ने तय कार्यक्रम के तहत निर्वाचन आयोग के खिलाफ एक बड़ा विरोध मार्च शुरू किया। गठबंधन के सांसद और तमाम नेता संसद परिसर से निकलकर निर्वाचन आयोग के मुख्यालय की तरफ बढ़ने लगे। हालांकि, सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने निर्वाचन आयोग के दफ्तर, आकाशवाणी भवन और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए थे और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी।
राष्ट्रपति से मुलाकात की तैयारी और चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
विपक्षी दलों के इस प्रदर्शन की रूपरेखा गत 30 सितंबर को 19 विपक्षी दलों की एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद तैयार की गई थी। इस सिलसिले में ‘इंडिया’ गठबंधन के कई प्रमुख नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात कर एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अपनी गंभीर चिंताओं और आपत्तियों से उन्हें अवगत कराएंगे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने तीन सदस्यीय निकाय में किसी भी तरह के मतभेद या असहमति के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रणाली और प्रक्रिया से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय पूरी तरह से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
अखिलेश यादव का तीखा हमला और संतकबीरनगर में विरोध
इस प्रस्तावित विरोध मार्च से ठीक पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव विशेष रूप से दिल्ली पहुंचे। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि आयोग निष्पक्ष होकर काम नहीं कर रहा है।
अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “चुनाव आयोग और उसके कामकाज के तरीके को लेकर शिकायतें और आपत्तियां पहली बार नहीं उठाई जा रही हैं। हालात देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चुनाव आयोग यह मान बैठा हो कि सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के सदस्य ही देश के असली नागरिक हैं। कई मौकों पर तो ऐसा भी लगता है कि आयोग का मानना है कि केवल बीजेपी से जुड़े लोग ही वोट डालने के हकदार हैं।”
इस प्रदर्शन के दौरान जब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य नेताओं को हिरासत में लिया, तो उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला।
कलेक्ट्रेट परिसर में बड़ी संख्या में पहुंचे सपाइयों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारी नेताओं ने अखिलेश यादव की तत्काल रिहाई की मांग की, जिसके चलते स्थानीय स्तर पर पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बनी रही।
आकाशवाणी भवन के पास राहुल-प्रियंका का धरना
दिल्ली में सुरक्षा बलों द्वारा मार्च को रोके जाने के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई प्रमुख कांग्रेस सांसद आकाशवाणी भवन के समीप धरने पर बैठ गए। इस दौरान नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी से बातचीत की, जिसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें प्रियंका गांधी डीसीपी की बात पर असहमति जताते हुए सिर हिलाती नजर आ रही हैं। इसके बावजूद कांग्रेस नेता निर्वाचन आयोग के दफ्तर तक जाने की अपनी जिद पर अड़े रहे।
धरना स्थल से एक वीडियो संदेश जारी करते हुए राहुल गांधी ने दो टूक शब्दों में कहा, “हम सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलना चाहते हैं। उन्हें हमसे मिलना ही पड़ेगा। हमें यहां सड़क पर बैठने में कोई गुरेज या दिक्कत नहीं है। जब तक हमें बैठना होगा, हम यहीं बैठेंगे। अगर आप चाहते हैं कि हम यहां न रहें, तो हमें उठाकर हटा दीजिए और कोई भी अन्य जगह दे दीजिए, हम वहीं बैठकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।” इस बीच, आकाशवाणी भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे भारतीय युवा कांग्रेस के कई सदस्यों को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
कांग्रेस का सांसदों को निर्देश
चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन और गहमागहमी के बीच कांग्रेस पार्टी की तरफ से कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से सभी कांग्रेसी सांसदों से कहा गया है कि वे फिलहाल दिल्ली में ही बने रहें। पार्टी का मानना है कि वोट चोरी के गंभीर मुद्दों और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हालिया खुलासों के बाद संसद और सड़क दोनों जगहों पर विपक्ष को एकजुट होकर सरकार को घेरना चाहिए।