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झुग्गियां भी बहुमंजिला...:नींव कमजोर, गलियां ऐसी कि एंबुलेंस-दमकल-पुलिस भी न जा पाए
भोपाल27 मिनट पहलेलेखक: मनोज जोशी
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भोपाल की झुग्गियां अब सिर्फ जमीन पर नहीं फैल रहीं, ऊपर भी बढ़ रही हैं। शहर में 388 झुग्गी बस्तियां हैं, जिनमें 1,56,560 परिवार रहते हैं। क्लस्टर आधारित आकलन के मुताबिक करीब 52% झुग्गी आवास अब एक मंजिल से ऊपर यानी जी+1 से जी+3 तक पहुंच चुके हैं।
जमीन पर भी इनका दायरा तेजी से बढ़ा है। 2010 से 2026 के बीच बाणगंगा, अरेरा हिल्स-वल्लभ भवन और अन्ना नगर के तीन बड़े क्लस्टरों का कुल क्षेत्र 113.5 एकड़ से बढ़कर 164.4 एकड़ हो गया। यानी 16 साल में 44.8% विस्तार।
पूरे शहर में करीब 2000 एकड़ जमीन झुग्गियों से घिरी है। इसमें 75% सरकारी जमीन है। यह तस्वीर नगर निगम के झुग्गी प्रोफाइल, टीएंडसीपी और पीएम आवास की जियो टैगिंग के साथ शोध छात्रों के ग्राउंड सर्वे और स्टडी से सामने आई है।
खतरा... गलियां 2-4 फीट की
- कई पुरानी बस्तियों में गलियां महज 2-4 फीट चौड़ी हैं। इन्हीं के बीच अब दो और तीन मंजिला मकान खड़े हो गए हैं।
- एक मंजिल के हिसाब से बने मकानों की नींव और दीवारों पर अतिरिक्त मंजिलें जोड़ दी गई हैं। इससे इनके कमजोर होने और ढहने का खतरा बढ़ गया है।
- आग लगने पर फायर ब्रिगेड, अपराध या मेडिकल इमरजेंसी में पुलिस वाहन एम्बुलेंस का अंदर तक पहुंचना मुश्किल है।
- मकानों में अतिरिक्त परिवार बढ़ गए, लेकिन पानी, नाली और सीवरेज नेटवर्क लगभग वही है।
भास्कर एक्सपर्ट - डॉ. शीतल शर्मा, टाउन प्लानर
बाणगंगा की इस तस्वीर से समझिए : हर दूसरी झुग्गी अब वर्टिकल, फैल रहा दायरा
बाणगंगा : श्यामला हिल्स नाले तक फैली बस्ती
2010 में करीब 52 एकड़ में फैला था, अब 68.3 एकड़ हो चुका है। वृद्धि 31.3%। फैलाव श्यामला हिल्स की रिज और नाले तक पहुंचा। स्मार्ट रोड पर आंचलिक विज्ञान केंद्र के आसपास पिछले दो साल में करीब 100 नई झुग्गियां बनीं।
अरेरा हिल्स-वल्लभ भवन:: दायरा डेढ़ गुना करीब 40 एकड़ से बढ़कर 60.3 एकड़, यानी 50.7% वृद्धि। भीम नगर और आसपास जी+1 और जी+2 निर्माण सामान्य होता जा रहा है। इसी बेल्ट में मेट्रो डिपो के पीछे झुग्गी क्षेत्र करीब 7 से 9 एकड़ हुआ और ग्रीन मीडोज की बाउंड्री तक पहुंच गया।
अन्ना नगर: सबसे ज्यादा 66.5% विस्तार 21.5 से 35.8 एकड़, यानी 66.5% वृद्धि। तीनों क्लस्टरों में सबसे तेज विस्तार। पुराने खाली हिस्से भरने के साथ निर्माण जी+2 तक पहुंचा।
रोजगार शहर में, पुनर्वास बाहर... इसलिए वापस लौटे कई परिवार

कोकता व भानपुर जैसे बाहरी इलाकों में पुनर्वास हुआ, जबकि कई झुग्गीवासियों का रोजगार मुख्य शहर में रहा। आने-जाने का खर्च और परेशानी बढ़ी तो कुछ परिवार मकान किराए पर देकर या अनुबंध पर बेचकर वापस लौट आए। वहीं, नए प्रवासी मजदूरों के लिए शहर में सस्ते किराए के मकान नहीं हैं, इसलिए नई झुग्गियां बसती जा रही हैं।
इंदौर और ग्वालियर के भी यही हाल... खर्च के साथ बढ़ी झुग्गी बस्तियां
इंदौर: पिछले 40 वर्षों में झुग्गी व ईडब्ल्यूएस योजनाओं पर ₹2,250 करोड़ खर्च का आकलन है। झुग्गी बस्तियों की संख्या 120 से बढ़कर 600+ हो गई। इनमें आबादी करीब 7 लाख है।
ग्वालियर : इसी अवधि में करीब ₹850 करोड़ की योजनाओं के बीच झुग्गी बस्तियां करीब 70 से बढ़कर 195+ हो गईं। अनुमानित झुग्गी आबादी करीब 2.5 लाख है।
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