October 3, 2026

न मॉल, न कैफे और न ट्रैफिक का झंझट, गुरुग्राम छोड़ पहाड़ पहुंचे कपल ने बताए जिंदगी बदलने वाले फायदे

न मॉल, न कैफे और न ट्रैफिक का झंझट, गुरुग्राम छोड़ पहाड़ पहुंचे कपल ने बताए जिंदगी बदलने वाले फायदे

कपल ने गिनवाए पहाड़ों में रहने के फायदे Image Credit source: Instagram/divyaaabhatt

दिल्ली-NCR में रहने वाले लोगों के लिए रोज का ट्रैफिक, प्रदूषण और काम का तनाव अब जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. यही वजह है कि जब भी छुट्टी मिलती है, लोग कुछ दिनों के लिए पहाड़ों का रुख करते हैं. ठंडी हवा, हरियाली और शांत माहौल कुछ समय के लिए शहर की भागदौड़ से दूर कर देता है. लेकिन जरा सोचिए, अगर यही सुकून कुछ दिनों की छुट्टी के बजाय आपकी रोज की जिंदगी बन जाए तो कैसा लगेगा?

गुरुग्राम में रहने वाले दिव्या भट्ट और सौरभ ने कुछ ऐसा ही करने का फैसला लिया. दोनों ने शहर की तेज रफ्तार जिंदगी को पीछे छोड़ा और हिमालय के एक गांव में जाकर रहने लगे. अब उनका रोजमर्रा का जीवन ट्रैफिक और भीड़ के बीच नहीं, बल्कि पहाड़ों, हरियाली और प्रकृति के करीब बीत रहा है. दोनों सोशल मीडिया पर पहाड़ों की इस नई जिंदगी से जुड़े अनुभव भी शेयर करते रहते हैं.

शहर छोड़ पहाड़ों में क्यों बस गया ये कपल?

हाल ही में दिव्या ने एक वीडियो में बताया कि पहाड़ों में रहने के दौरान उन्हें कौन-कौन सी ऐसी चीजें महसूस हुईं, जो शहर की जिंदगी से बिल्कुल अलग हैं. दिव्या के मुताबिक, पहाड़ों की जिंदगी का सबसे खास हिस्सा यहां का मौसम और बदलता हुआ प्राकृतिक नजारा है. यहां मौसम के साथ आसपास का माहौल भी बदलता रहता है. बसंत आते ही फूलों से पहाड़ रंगीन नजर आने लगते हैं, जबकि बारिश के मौसम में चारों तरफ हरियाली छा जाती है. गर्मियों में भी शहरों की तुलना में मौसम काफी आरामदायक महसूस होता है. यानी यहां मौसम सिर्फ तापमान बदलने का नाम नहीं है, बल्कि रोज होने वाला एक नया अनुभव है.

दिव्या ने पहाड़ों में रहने के दूसरे फायदे के तौर पर मनोरंजन का जिक्र किया. उनका कहना है कि शहर में थोड़ा समय बिताने के लिए अक्सर कैफे, मॉल या किसी दूसरी जगह जाना पड़ता है और इसके लिए पैसे भी खर्च होते हैं. वहीं पहाड़ों में प्रकृति ही आपका मनोरंजन बन जाती है. कभी घास के मैदान में पिकनिक, कभी किसी प्राकृतिक तालाब तक जाना और कभी झरने तक ट्रेक करना, ये सब उनकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा बन गया है. कपल का कहना है कि पहाड़ों में शिफ्ट होने के बाद उनके खर्च करने का तरीका भी बदला है. बाहर आने-जाने और खाना खाने पर पहले के मुकाबले कम खर्च होता है. दोनों घर पर खाना बनाना ज्यादा पसंद करते हैं. साथ ही शहर में हर समय कुछ नया खरीदने या बाहर जाकर समय बिताने की जो आदत होती है, वह भी काफी कम हो गई है.

पहाड़ों की जिंदगी ने उनकी रोज की दिनचर्या पर भी असर डाला है. अब वे घर से बाहर ज्यादा समय बिताते हैं, पैदल चलते हैं और स्थानीय ताजी उपज का इस्तेमाल करते हैं. वे कुछ सब्जियां खुद भी उगाते हैं. हालांकि, दिव्या ने वीडियो में AQI और स्थानीय परिस्थितियों से जुड़े जो आंकड़े बताए हैं, वे उनके व्यक्तिगत अनुभव हैं और हर पहाड़ी इलाके में हालात एक जैसे नहीं होते. दिव्या के मुताबिक, पहाड़ों में रहने का सबसे बड़ा फायदा उनके रिश्ते को हुआ है.

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शहर की भागदौड़ में जहां काम, ट्रैफिक और दूसरी जिम्मेदारियों के बीच समय निकालना मुश्किल हो जाता है, वहीं पहाड़ों में दोनों को साथ बैठने, बातें करने और एक-दूसरे के साथ वक्त बिताने का ज्यादा मौका मिलता है. शहर छोड़ने का उनका फैसला सिर्फ जगह बदलने तक सीमित नहीं रहा. पहाड़ों में आकर दोनों की रोजमर्रा की जिंदगी, खर्च करने का तरीका और एक-दूसरे के साथ बिताया जाने वाला समय भी बदल गया है.

यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं. अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.

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