October 2, 2026

मुजफ्फरपुर-नरकटियागंज रेल दोहरीकरण: सिग्नल केबल खत्म, सॉफ्टवेयर और रिमोट से कंट्रोल होगा ट्रेनों का परिचालन - Muzaffarpur News

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मुजफ्फरपुर-नरकटियागंज रेल दोहरीकरण:सिग्नल केबल खत्म, सॉफ्टवेयर और रिमोट से कंट्रोल होगा ट्रेनों का परिचालन

मुजफ्फरपुर23 मिनट पहले

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उत्तर बिहार के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। उत्तर बिहार की 247 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पर अब ट्रेनों का संचालन सिग्नल केबल के बजाय सॉफ्टवेयर से होगा। मुजफ्फरपुर-नरकटियागंज वाया सीतामढ़ी-दरभंगा दोहरीकरण परियोजना में अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ई-आई) सिस्टम को शामिल कर लिया गया है।

पूर्व मध्य रेलवे ने प्रस्तावित रेलखंड को ई-आई सिस्टम से लैस करने की तैयारी शुरू कर दी है। निर्माण विभाग के उप मुख्य सिग्नल व टेलीकॉम इंजीनियर की देखरेख में इस रेलखंड के 23 स्टेशनों पर इंजीनियरिंग, आपूर्ति व निर्माण का कार्य होगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो 22 जनवरी को फाइनल होगी।

दोहरीकरण प्रोजेक्ट के तहत जुब्बा सहनी समेत 34 स्टेशनों पर यार्ड निर्माण के लिए 50 माह का समय तय किया गया है, जबकि पूरे प्रोजेक्ट में 60 माह यानी पांच साल का समय लगेगा।

सेना को मिल सकेगी त्वरित मदद, ट्रेनों की लेटलतीफी होगी खत्म

यह परियोजना मुजफ्फरपुर से शुरू होकर सीतामढ़ी, दरभंगा व रक्सौल होते हुए नरकटियागंज तक जाएगी। डबल लाइन होने से इस रूट पर अधिक ट्रेनें चल सकेंगी और लेटलतीफी कम होगी। यह रूट भारत-नेपाल सीमा के करीब होने के कारण सामरिक दृष्टिकोण से बेहद अहम है। परियोजना के पूरा होने से ट्रेनों में आपात स्थिति में सेना को भी त्वरित मदद मिल सकेगी।

ई-आई सिस्टम के प्रमुख फायदे

  • जगह और बिजली की बचत : पुरानी प्रणाली में 3000 तक रिले होते थे, जबकि ई-आई में सिर्फ कार्ड और कंप्यूटर होते हैं। बड़े रिले रूम की जगह छोटी एसी वाली ईआई रूम ही काफी है, जिससे बिजली की खपत आधी हो जाती है।
  • तत्काल फॉल्ट की पहचान : कोई भी गड़बड़ी होने पर तुरंत फॉल्ट लोकेशन कंप्यूटर स्क्रीन पर दिख जाता है।
  • समय की बचत : ट्रेन के आते ही पॉइंट और सिग्नल ऑटोमैटिक सेट हो जाते हैं। लूप लाइन से मेन लाइन में ट्रेन जल्दी निकलती है, जिससे ब्लॉक सेक्शन का टाइम घटता है।
  • रिमोट कंट्रोलिंग : पूरे स्टेशन को समस्तीपुर या हाजीपुर कंट्रोल ऑफिस से भी ऑपरेट किया जा सकता है। स्टेशन मास्टर को बार-बार यार्ड में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
  • हाई-स्पीड और कवच से जुड़ाव : कवच, ऑटोमैटिक सिग्नल और डबल डिस्टेंस सब इसी से जुड़ते हैं। 130 किमी/घंटा से ऊपर की स्पीड सिर्फ ई-आई सिस्टम से ही संभव है।

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