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- The Government Is Working To Promote Tourism In Jharkhand, With An Eco tourism Circuit Planned, Allowing Tourists To Explore Underground Coal Mines.
विश्व पर्यटन दिवस आज:झारखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने में जुटी सरकार, इको टूरिज्म सर्किट बनेगा, भूमिगत कोयला खदानों को देखेंगे पर्यटक
रांची30 मिनट पहलेलेखक: संतोष चौधरी
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झारखंड को प्रकृति ने भरपूर संसाधन दिया है। पर्यटन के लिहाज से यहां काफी संभावना है। क्योंकि, प्रसिद्ध धार्मिक स्थल देवघर, गिरिडीह स्थित पारसनाथ, सिमडेगा स्थित रामरेखा धाम, गुमला में टांगीनाथ, रामगढ़ में मां छिन्नमस्तिका मंदिर में सालों भर पर्यटकों को आने के लिए विवश करती है। इसके अलावा झरना-पहाड़, नदी-डैम और जंगल, ऐतिहासिक धरोहर पर्यटकों को लुभाती है। इसी का नतीजा है कि झारखंड में साल दर साल पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है।
झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में झारखंड के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर 3.58 करोड़ घरेलू पर्यटक पहुंचे। जबकि, वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 5.40 करोड़ पर पहुंच गई। वहीं, 2025 में दिसंबर तक पर्यटकों की संख्या करीब 5.42 करोड़ दर्ज की गई। इसे देखते हुए झारखंड सरकार पर्यटन की तस्वीर बदलने के लिए राज्य में इको टूरिज्म सर्किट बनाने की तैयारी कर रही है। पर्यटन विभाग रांची, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम, गिरिडीह, लातेहार,हजारीबाग सहित अन्य जिलों में इको टूरिज्म विकसित करेगा। इतना ही नहीं आने वाले समय में पर्यटक जमीन के गर्भ में जाकर भूमिगत कोयला खदानों को देखेंगे और राजगीर की तर्ज पर ग्लास ब्रिज पर सैर करते हुए प्राकृतिक नजारा देखेंगे।
इन योजनाओं से पर्यटन इंडस्ट्री को मिलेगी रफ्तार
1: व्यू प्वाइंट... पतरातू में स्काईवॉक, सोलर बोट और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट: पतरातू घाटी को राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। पतरातू में स्काईवॉक, व्यू प्वाइंट, जलाशय डैम में सोलर बोट और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट बनाने की तैयारी है। यहां अन्य स्थलों पर रोपवे बनाने की संभावना भी तलाश की जा रही है। पर्यटन विभाग इसके लिए डीपीआर तैयार कराने में जुटा है।
2: एडवेंचर टूरिज्म... दशम-जोन्हा में ग्लास ब्रिज, हुंडरू में रोपवे: एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए दशम फॉल में ग्लास ब्रिज, जोन्हा फॉल में ग्लास ब्रिज और रोपवे और हुंडरू फॉल में रोपवे बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सर्वे कराने और डीपीआर तैयार कराने का काम चल रहा है। अगले साल इसका निर्माण शुरू होगा। दूसरी ओर, खूंटी के पंचघाघ जलप्रपात में 7.5 करोड़ रुपए से सौंदर्यीकरण, फुटब्रिज, फुटपाथ और शौचालय का काम चल रहा है।
3: माइनिंग टूरिज्म... खदानों की सैर, तोपचांची झील बनेगा इंटरनेशनल डेस्टिनेशन: झारखंड पर्यटन विकास निगम और सीसीएल के बीच समझौते के बाद जुलाई 2025 में माइनिंग टूरिज्म की शुरुआत की गई है। पहले चरण में रांची-पतरातू-उरीमारी सर्किट के तहत नॉर्थ उरीमारी ओपन कास्ट कोयला खदान की गतिविधियां दिखाने की योजना है। वहीं तोपचांची झील को इंटरनेशनल डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी है। यहां 184 करोड़ की लागत से पीपीपी मोड पर पर्यटन स्थल विकसित किया जाना है।
4: धार्मिक-हेरिटेज सर्किट... सभी धार्मिक स्थलों को विकसित करने की तैयारी: झारखंड में धार्मिक - हेरिटेज सर्किट बनाने पर भी काम चल रहा है। इसके तहत देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम, बासुकीनाथ धाम, दुमका स्थित मलूटी मंदिर,गिरिडीह स्थित पारसनाथ को जैन सर्किट और इटखोरी को बुद्ध सर्किट, रामगढ़ स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर में सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम को 30 एकड़ में कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां यातायात, दर्शन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा। बासुकीनाथ धाम में शिवगंगा सरोवर के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्से में आधुनिक मॉडल शेड बनाने की तैयारी है। रजरप्पा मंदिर और पारसनाथ में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाई जाएगी। रजरप्पा के लिए 100 करोड़ से अधिक की योजना बनाई गई है।
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