Bishan Singh Bedi Birth Anniversary: भारतीय क्रिकेट में बिशन सिंह बेदी का नाम सिर्फ एक शानदार बाएं हाथ के स्पिनर के तौर पर नहीं लिया जाता. वह मैदान पर अपने सिद्धांतों और बेबाक फैसलों के लिए भी जाने जाते थे. आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आज ही के दिन 25 सितंबर 1946 को उनका जन्म हुआ था. पाकिस्तान के खिलाफ 1978 में खेला गया एक वनडे मुकाबला उनके बेबाक अंदाज का बड़ा उदाहरण है. भारत जीत की ओर बढ़ रहा था, लेकिन सरफराज नवाज की लगातार चार बाउंसर और अंपायर के फैसलों से बेदी इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने अपने दोनों बल्लेबाजों को मैदान से वापस बुला लिया था.
38वें ओवर में बदला मैच का रुख
3 नवंबर 1978 को पाकिस्तान के साहिवाल स्थित जफर अली स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान के बीच सीरीज का तीसरा और निर्णायक मुकाबला खेला गया था. 40 ओवर के इस मैच में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 205/7 रन बनाए.
भारत की पारी की शुरुआत चेतन चौहान और अंशुमन गायकवाड़ ने की. दोनों सलामी बल्लेबाजों ने टीम को अच्छी शुरुआत दी और 44 रन जोड़े. चौहान के 23 रन पर आउट होने के बाद सुरिंदर अमरनाथ ने गायकवाड़ का साथ संभाला. दोनों ने मिलकर भारतीय पारी को 163 रन तक पहुंचा दिया. इसके बाद अमरनाथ 62 रन बनाकर आउट हुए और गुंडप्पा विश्वनाथ बल्लेबाजी के लिए आए. 38वां ओवर शुरू होने के समय टीम को जीत के लिए सिर्फ 14 गेंदों में 23 रन चाहिए थे और उसके आठ विकेट बाकी थे. तभी गेंदबाजी के लिए सरफराज नवाज आए.
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लगातार चार बाउंसर, लेकिन एक भी वाइड नहीं
सरफराज नवाज ने अंशुमन गायकवाड़ को लगातार चार ऐसी बाउंसर फेंकीं, जिन पर भारतीय बल्लेबाजों को गेंद खेलने का मौका ही नहीं मिला. चारों गेंदों पर अंपायर के फैसले ने भारतीय टीम को नाराज कर दिया.
| गेंद | क्या हुआ |
| पहली गेंद | सरफराज ने बाउंसर फेंकी. गेंद काफी ऊपर थी, लेकिन वाइड नहीं दी गई. |
| दूसरी गेंद | फिर बाउंसर आई. गायकवाड़ शॉट नहीं खेल सके, फिर भी वाइड नहीं मिला. |
| तीसरी गेंद | सरफराज ने तीसरी बाउंसर डाली. गेंद बल्लेबाज की पहुंच से बाहर थी, लेकिन अंपायर ने वाइड नहीं दिया. |
| चौथी गेंद | चौथी बाउंसर और भी ऊंची थी. गायकवाड़ कुछ नहीं कर सके, फिर भी वाइड नहीं मिला. |
बेदी ने लिया ऐसा फैसला, जिसकी आज भी होती है चर्चा
लगातार चार बाउंसर और अंपायर के फैसलों के बाद भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी ने विरोध दर्ज कराने का अनोखा तरीका चुना. उन्होंने मैदान पर मौजूद अपने दोनों बल्लेबाजों को वापस आने का इशारा कर दिया.
बेदी ने टीम को आगे बल्लेबाजी करने से रोक दिया. भारतीय टीम ने मैच जारी नहीं रखा और पाकिस्तान को विजेता घोषित कर दिया गया. इस तरह पाकिस्तान ने मुकाबला जीतकर सीरीज पर 2-1 से कब्जा कर लिया. यह घटना इसलिए भी चर्चा में रही, क्योंकि उस दौर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में न्यूट्रल अंपायरों की व्यवस्था नहीं थी. पाकिस्तान के इस मुकाबले में दोनों अंपायर भी पाकिस्तान के ही थे.
कौन थे बिशन सिंह बेदी?
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25 सितंबर 1946 को अमृतसर में जन्मे बिशन सिंह बेदी भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित स्पिनरों में शामिल रहे. वह उस दौर की मशहूर भारतीय स्पिन चौकड़ी का हिस्सा थे. बेदी ने 1966 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया और 1979 तक भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला. उन्होंने 67 टेस्ट मैचों में 266 विकेट लिए. बेदी ने 22 टेस्ट में भारतीय टीम की कप्तानी भी की. प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके नाम 1,560 विकेट दर्ज हैं.
बेदी की गेंदबाजी में नियंत्रण, फ्लाइट और स्पिन का खास मेल देखने को मिलता था. उनकी उंगलियों की भूमिका उनकी गेंदबाजी में बेहद अहम थी. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उंगलियों को मजबूत और कलाई को लचीला रखने के लिए वह अपने कपड़े तक खुद धोया करते थे.
शेन वॉर्न भी मानते थे बेदी को आदर्श

बिशन सिंह बेदी की गेंदबाजी का प्रभाव सिर्फ भारत तक सीमित नहीं था. ऑस्ट्रेलिया के महान लेग स्पिनर शेन वॉर्न भी उन्हें अपना आदर्श मानते थे. बेदी की खासियत यह थी कि वह लगभग एक जैसी गेंदबाजी एक्शन से अलग-अलग तरह की गेंदें करने में सक्षम थे. उनकी गेंदबाजी में विविधता के साथ गेंद पर नियंत्रण भी गजब का था. यही वजह रही कि 1970 के दशक में भारतीय स्पिन आक्रमण में उनका नाम सबसे प्रमुख गेंदबाजों में लिया जाता था.
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टेस्ट डेब्यू से पहले देखा ही नहीं था टेस्ट मैच
| फॉर्मेट | मैच | गेंद | रन | विकेट | सर्वश्रेष्ठ | इकॉनमी | 4 विकेट | 5 विकेट | 10 विकेट |
| टेस्ट | 67 | 21,364 | 7,637 | 266 | 7/98 | 2.14 | 13 | 14 | 1 |
| वनडे | 10 | 590 | 340 | 7 | 2/44 | 3.45 | 0 | 0 | 0 |
| प्रथम श्रेणी | 370 | 90,354 | 33,843 | 1,560 | 7/5 | 2.24 | - | 106 | 20 |
| लिस्ट ए | 72 | 3,686 | 2,087 | 71 | - | - | - | - | - |
बिशन सिंह बेदी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा लेखक रामचंद्र गुहा ने अपने एक लेख में साझा किया था. उनके मुताबिक, बेदी ने अपना पहला टेस्ट मैच तब देखा, जब उन्होंने खुद टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था. यानी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने से पहले उन्होंने टेस्ट मैच को स्टेडियम से नहीं देखा था. क्रिकेट के मैदान पर उनका सफर जितना शानदार रहा, मैदान के बाहर उनके बेबाक अंदाज के किस्से भी उतने ही चर्चित रहे.
75वें जन्मदिन पर लॉन्च की थी अपनी किताब
25 सितंबर 2021 को अपने 75वें जन्मदिन के मौके पर बिशन सिंह बेदी ने अपनी किताब 'The Sardar of Spin' लॉन्च की थी. भारतीय क्रिकेट के इस महान स्पिनर का 23 अक्टूबर 2023 को 77 साल की उम्र में निधन हो गया. लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझने के बाद उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा.
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