September 24, 2026

मानव तस्करी पर गृह मंत्रालय सख्त, राज्यों को किंगपिन पर एक्शन और फाइनेंसर्स की संपत्ति जब्त करने के निर्देश

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में मानव तस्करी के लगातार बदलते स्वरूप और संगठित नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों (DGPs) को 5 पेज का विस्तृत परामर्श भेजकर नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी इस्तेमाल करने को कहा है.

जारी निर्देश में मानव तस्करी के नेटवर्क के मुख्य साजिशकर्ताओं, किंगपिन और फाइनेंसर्स पर कार्रवाई के साथ-साथ उनकी अवैध गतिविधियों से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने पर जोर दिया गया है. मंत्रालय का उद्देश्य तस्करी के पूरे सिंडिकेट को केवल पीड़ितों के बचाव तक सीमित रखने के बजाय उसके वित्तीय और आपराधिक ढांचे को भी निशाना बनाना है.

नए आपराधिक कानूनों के इस्तेमाल का निर्देश

गृह मंत्रालय ने नए आपराधिक कानूनों – भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—के प्रावधानों का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने को कहा है. संगठित अपराध से जुड़े मामलों में BNS की धारा 111 के तहत कार्रवाई करते हुए तस्करी के नेटवर्क, उसके संचालकों और वित्तीय मददगारों तक पहुंचने तथा कानून के तहत उनकी संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर दिया गया है.

इसी तरह नाबालिगों और एक से अधिक पीड़ितों से जुड़े गंभीर मामलों में BNS की संबंधित कई धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई और अधिकतम संभव सजा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. मानव तस्करी के मामलों में एन्क्रिप्टेड चैट, डिजिटल संचार, वित्तीय लेन-देन, मोबाइल डेटा और जियो-लोकेशन जैसी सूचनाओं को साक्ष्य के रूप में प्रभावी ढंग से सुरक्षित और इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया है.

डिजिटल-फोरेंसिक साक्ष्यों की जांच का हिस्सा बने

साथ ही तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग तथा गंभीर अपराधों में फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं. जांच एजेंसियों से कहा गया है कि डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों को शुरुआत से ही जांच का हिस्सा बनाया जाए, ताकि अदालत में मामलों को मजबूती से पेश किया जा सके.

मंत्रालय ने पीड़ितों के साथ संवेदनशील और कानूनी रूप से निर्धारित प्रक्रिया अपनाने पर भी जोर दिया है. यौन अपराधों से जुड़े मामलों में बयान दर्ज करने के दौरान संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन करने और जहां संभव हो, ऑडियो-वीडियो माध्यम का इस्तेमाल करने को कहा गया है. इसका उद्देश्य पीड़ितों को बार-बार जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उपस्थित होने की परेशानी से बचाना और उनके बयान को सुरक्षित तरीके से रिकॉर्ड करना है.

मानव तस्करी के खिलाफ मजबूत हो AHTUs

मानव तस्करी के खिलाफ काम कर रही Anti-Human Trafficking Units (AHTUs) को और मजबूत करने की योजना पर भी जोर दिया गया है. गृह मंत्रालय ने राज्यों से इन इकाइयों को पर्याप्त संसाधन, प्रशिक्षित अधिकारी और विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराने को कहा है.

मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए विशेष प्रशिक्षित सरकारी वकीलों की नियुक्ति और विशेष अदालतों में मामलों की सुनवाई को गति देने पर भी जोर दिया गया है. न्यायिक और पुलिस तंत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण और विशेषज्ञ संगोष्ठियों की व्यवस्था करने को कहा गया है.

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मानव तस्करी को केवल महिलाओं और यौन शोषण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. ईंट-भट्ठों, खदानों, कपड़ा उद्योग और अन्य असंगठित क्षेत्रों में पुरुषों और बच्चों के श्रम शोषण की पहचान के लिए नियमित और बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण करने पर जोर दिया गया है. तस्करी के संभावित मार्गों और हॉटस्पॉट की पहचान के लिए CCTNS और Cri-MAC जैसे पुलिस डेटाबेस के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है.

दूसरी ओर, विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने और तस्करी के नेटवर्क में फंसाने वाले गिरोहों पर भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. अवैध भर्ती एजेंसियों, फर्जी नौकरी के विज्ञापनों और बिना वैध अनुमति के संचालित किए जा रहे भर्ती नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई करने पर जोर दिया गया है.

सोशल मीडिया, जॉब पोर्टल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चल रहे संदिग्ध विज्ञापनों तथा ऑनलाइन संपर्क के जरिए संभावित पीड़ितों को फंसाने वाले नेटवर्क की निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है. मानव तस्करी से जुड़े मामलों में शिकायत दर्ज करने या निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने में लापरवाही बरतने वाले लोक सेवकों की जवाबदेही तय करने पर भी गृह मंत्रालय ने जोर दिया है.

प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की लापरवाही नहीं

गृह मंत्रालय ने अपने निर्देश में राज्यों से कहा है कि ऐसे मामलों में लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई के साथ विभागीय जांच भी सुनिश्चित की जाए, ताकि तस्करी के मामलों में प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की लापरवाही न हो.

गृह मंत्रालय ने मानव तस्करी की रोकथाम के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर निर्भर रहने के बजाय इसके सामाजिक और आर्थिक कारणों पर भी काम करने की जरूरत बताई है. स्कूल छोड़ने वाले बच्चों, नशे की समस्या, असुरक्षित और बेसहारा बच्चों तथा गरीबी जैसे जोखिम कारकों की पहचान कर संबंधित विभागों के साथ मिलकर रोकथाम और पुनर्वास की योजनाएं लागू करने पर जोर दिया गया है.

इसके अलावा थाना स्तर तक पुलिसकर्मियों को नए आपराधिक कानूनों, डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक तकनीकों और पीड़ित-केंद्रित जांच प्रक्रिया का प्रशिक्षण देने की योजना पर भी जोर दिया गया है. मंत्रालय के इस परामर्श का व्यापक उद्देश्य मानव तस्करी के मामलों में बचाव, जांच, अभियोजन, वित्तीय कार्रवाई और पुनर्वास — इन सभी स्तरों को एक साथ मजबूत करना है, ताकि तस्करी के संगठित नेटवर्क के खिलाफ अधिक प्रभावी और समन्वित कार्रवाई की जा सके.

Amod Rai

Amod Rai

21 सालों से राजनीतिक, सामाजिक और पॉलिसी संबंधित विषयों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव। लगातार 2 दशक से बीजेपी, संघ परिवार, संसद और केंद्र सरकार की खबरों पर विशेष निगाह

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