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हिंदी न्यूज़ऐस्ट्रोआज के बाद रात लंबी और दिन छोटे होंगे, क्या इसका मतलब सर्दी शुरू हो गई?
आज के बाद रात लंबी और दिन छोटे होंगे, क्या इसका मतलब सर्दी शुरू हो गई?
September Equinox 2026: 23 सितंबर के बाद दिन छोटे और रातें लंबी क्यों होंगी? जानें शरद विषुव का विज्ञान, भारत में सर्दी पर असर और ज्योतिष व धार्मिक मान्यता.
Written By : Hirdesh Kumar Singh | Updated at : 23 Sep 2026 07:05 PM (IST)

23 सितंबर के बाद बढ़ने लगेगी रात, क्या अब शुरू हो जाएगी सर्दी?
Source : abplive
Equinox: 23 सितंबर के बाद आपको एक बदलाव साफ महसूस होगा. शाम पहले होने लगेगी और रात धीरे-धीरे लंबी होती जाएगी. इसकी वजह मौसम की कोई अचानक करवट नहीं, बल्कि सूर्य और पृथ्वी से जुड़ी एक खगोलीय घटना है. इसे शरद विषुव या September Equinox कहते हैं.
कई लोग मानते हैं कि 23 सितंबर को दिन और रात ठीक 12-12 घंटे के होते हैं. कुछ लोग इसे सर्दी की शुरुआत भी मान लेते हैं. लेकिन दोनों बातें पूरी तरह सही नहीं हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आज आसमान में क्या बदला है और आने वाले दिनों में इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा.
23 सितंबर को ऐसा क्या हुआ?
पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है. वह इसी झुकाव के साथ सूर्य का चक्कर लगाती है. इसी वजह से सालभर दिन और रात की लंबाई बदलती रहती है.
साल में दो बार सूर्य पृथ्वी की भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर दिखाई देता है. ऐसा एक बार मार्च और दूसरी बार सितंबर में होता है. इस स्थिति को विषुव कहते हैं.
सितंबर के विषुव के बाद सूर्य की सीधी किरणें दक्षिणी गोलार्ध की ओर खिसकने लगती हैं. इसलिए भारत सहित उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं.
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क्या आज दिन और रात ठीक बराबर हैं?
नहीं, अधिकतर शहरों में दिन और रात ठीक 12-12 घंटे के नहीं होंगे. दोनों की अवधि लगभग बराबर जरूर रहती है, लेकिन कुछ मिनट का अंतर बना रह सकता है.
इसकी वजह पृथ्वी का वायुमंडल है. सूर्य क्षितिज से नीचे पहुंचने के बाद भी उसकी रोशनी हमें कुछ देर तक दिखाई देती है. इसी तरह सूर्योदय के समय सूर्य वास्तव में ऊपर आने से थोड़ा पहले दिखाई देने लगता है.
इसलिए 23 सितंबर को दिन और रात बिल्कुल बराबर होते हैं, कहना पूरी तरह सही नहीं है. वास्तविक बराबरी की स्थिति अलग-अलग शहरों में विषुव से कुछ दिन पहले या बाद में आ सकती है.
क्या अब सर्दी शुरू हो जाएगी?
शरद विषुव के बाद रातें लंबी जरूर होंगी, लेकिन भारत में सर्दी तुरंत शुरू नहीं होगी. मौसम केवल दिन और रात की लंबाई से तय नहीं होता.
मानसून की वापसी, हवा की दिशा, समुद्र से दूरी, पहाड़ी इलाका और पश्चिमी विक्षोभ जैसी कई चीजें तापमान पर असर डालती हैं. उत्तर भारत में अक्टूबर के दूसरे हिस्से से सुबह और रात में हल्की ठंड महसूस होने लगती है. पहाड़ों पर यह बदलाव पहले आ सकता है.
दक्षिण भारत और समुद्र के पास बसे शहरों में तापमान का अंतर कम दिखाई देगा. इसलिए 23 सितंबर को सर्दी की शुरुआत नहीं, बल्कि मौसम बदलने का पहला खगोलीय संकेत समझना चाहिए.
ज्योतिष में इस घटना का क्या अर्थ है?
यहां एक जरूरी फर्क समझना होगा. पश्चिमी यानी सायन ज्योतिष में सितंबर विषुव को सूर्य के तुला राशि में प्रवेश से जोड़ा जाता है. तुला का चिह्न तराजू है, इसलिए इस घटना को संतुलन, संबंध और सही फैसले लेने के समय के रूप में देखा जाता है.
भारतीय वैदिक ज्योतिष में निरयण गणना का उपयोग होता है. इसके अनुसार इस समय सूर्य कन्या राशि में है. इसलिए 23 सितंबर को वैदिक ज्योतिष के हिसाब से सूर्य का तुला राशि में प्रवेश नहीं हुआ है.
कन्या राशि व्यवस्था, गणना, सेहत और रोजमर्रा की आदतों से जुड़ी मानी जाती है. इस आधार पर आने वाला समय अधूरे काम निपटाने, खर्च का हिसाब रखने और दिनचर्या सुधारने के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है. इसका अर्थ यह नहीं कि विषुव सभी राशियों को कोई एक जैसा शुभ या अशुभ फल देगा.
धार्मिक परंपरा क्या कहती है?
भारतीय खगोल और पंचांग परंपरा में दिन-रात की लगभग समान अवधि वाली स्थिति को विषुव कहा गया है. प्राचीन गणनाओं में सूर्य की चाल, छाया और दिन की लंबाई का अध्ययन किया जाता था.
सितंबर का विषुव दक्षिणायन के बीच आता है. यह दक्षिणायन की शुरुआत नहीं है. दक्षिणायन पहले ही कर्क संक्रांति से शुरू माना जाता है और मकर संक्रांति तक चलता है.
इसी समय के आसपास अनंत चतुर्दशी, भाद्रपद पूर्णिमा और पितृपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पर्व आते हैं. लेकिन इनकी तारीख शरद विषुव से तय नहीं होती. इनका निर्धारण चंद्र तिथि और पंचांग के आधार पर किया जाता है.
इसलिए 23 सितंबर को किसी खास व्रत या पूजा का अनिवार्य दिन मानना सही नहीं होगा. धार्मिक दृष्टि से इसे प्रकृति के बदलते चक्र और प्रकाश-अंधकार के संतुलन को समझने का अवसर माना जा सकता है.
अब दिन लगातार छोटे होते जाएंगे. यह सिलसिला दिसंबर के शीत अयनांत तक चलेगा. उसी समय उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होगी.
FAQ
September Equinox 2026 कब है?
सितंबर विषुव 23 सितंबर 2026 को हुआ. इस घटना के बाद उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं.
क्या 23 सितंबर को दिन और रात बराबर होते हैं?
दिन और रात की अवधि लगभग बराबर होती है, लेकिन वायुमंडलीय अपवर्तन और सूर्य के दिखाई देने वाले आकार के कारण दोनों ठीक 12-12 घंटे के नहीं होते.
23 सितंबर के बाद रात लंबी क्यों होती है?
सितंबर विषुव के बाद सूर्य की सीधी किरणें दक्षिणी गोलार्ध की ओर बढ़ती हैं. इससे भारत सहित उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे होने लगते हैं.
क्या शरद विषुव के बाद सर्दी शुरू हो जाती है?
नहीं. यह मौसम बदलने का खगोलीय संकेत है. भारत में ठंड मानसून की वापसी, हवा की दिशा, ऊंचाई और पश्चिमी विक्षोभ जैसी स्थितियों पर भी निर्भर करती है.
साल की सबसे लंबी रात कब होगी?
उत्तरी गोलार्ध में दिसंबर के शीत अयनांत के आसपास साल की सबसे लंबी रात और सबसे छोटा दिन होता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader
'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'
हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.
वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.
उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University, Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है. इसके साथ ही उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush’ सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है, जिसमें Keyword Research, Topic Clusters, E-E-A-T आधारित कंटेंट और AI Search Optimization शामिल हैं. वे Astrosage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम कर चुके हैं. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.
हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है.
वर्तमान में Youth Protest, CJP आंदोलन और एक्टर शाहरुख खान को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.
वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.
डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.
उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.
श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.
ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.
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Published at : 23 Sep 2026 06:14 PM (IST)
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