Ranchi News : हजारीबाग कैंटोनमेंट मौजा की बेशकीमती 50 डिसमिल जमीन पर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव कब्जे के फिराक में हैं. खास महल की इस बेशकीमती जमीन के लीज की अवधि समाप्त हो चुकी है. खास महल की इस जमीन को वापस लेने के लिए उपायुक्त द्वारा भेजा गया प्रस्ताव प्रमंडलीय आयुक्त के पास विचाराधीन है. यह जमीन फिलहाल ईडी की जांच के दायरे में भी शामिल है.
इसे भी पढ़ें...


राज्य के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव द्वारा कैंटोनमेंट एरिया की इस खास महल जमीन पर पहले भी कब्जे की कोशिश की जा चुकी है. तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी ने पूर्व मंत्री द्वारा जमीन की जा रही घेराबंदी को तोड़ दिया था. साथ ही पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनकी बेटी तत्कालीन विधायक अंबा प्रसाद के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की थी.
इस पर तत्कालीन उपायुक्त की सहमति के बाद अंचल अधिकारी शशि भूषण सिंह ने नामजद प्राथमिकी दर्ज करने के लिए थाने में लिखित आवेदन दिया था. लेकिन विधायक परिवार के राजनीतिक रसूख की वजह से अंचल अधिकारी को नामजद प्राथमिकी दर्ज करने के लिए दिया गया आवेदन वापस लेना पड़ा था. इसके बाद इस जमीन पर कब्जा करने की कोशिश मे अज्ञात व्यक्तियों के नाम पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी.
कैंटोनमेंट मौजा की यह बेशकीमती जमीन अहसान अहमद को लीज पर दी गयी थी. लीज की अवधि 31 मार्च 2008 को समाप्त हो चुकी है. जमीन का लगान रसीद 1992-93 तक ही कटा है. लीज धारी अहसान अहमद की मौत हो चुकी है. इसके बाद उनकी बेटी नाजिश कौशर ने सरदार दलजीत सिंह को पावर ऑफ अटर्नी दिया. इसके सहारे सरदार दलजीत सिंह ने इस जमीन (थाना-157, होल्डिंग नंबर 302, प्लॉट 872/1235, 873/1336.893/1337) का लीज नवीकरण के लिए आवेदन दिया. हालांकि अभी लीज नवीकरण नहीं हुआ है.
इस बीच नाजिश कौशर ने 2017 में मानस कुमार के साथ एग्रीमेंट कर लिया. जमीन के इस पूरे मामले की जांच के दौरान पाया गया कि इस जमीन पर लीज धारी के वंशज नहीं रहते हैं. इस जमीन पर किसी वैध अधिकारी ने अपना दावा भी पेश नहीं किया है. अंचल निरीक्षक ने मामले की जांच के बाद खास महल की इस जमीन को वापस लेने का प्रस्ताव दिया.
इसके बाद मामले की सुनवाई के दौरान नाजिश कौशर को नोटिस दिया गया है. लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. मामले की सुनवाई के बाद खास महल पदाधिकारी ने जमीन वापस लेने का आदेश दिया. इस पर उपायुक्त की सहमति के बाद इसे प्रमंडलीय आयुक्त के पास भेज दिया गया है. मामला राजस्व विभाग के पास विचाराधीन है. प्रमंडलीय आयुक्त की सहमति के बाद जमीन वापस लेने का प्रस्ताव भू-राजस्व विभाग के पास भेजि दिया गया है. यह फिलहाल विभाग में विचाराधीन है.
इस बीच जमीन पर कब्जे का प्रयास भी जारी है. पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने जमीन की घेरीबंदी कर ली है. शेड का निर्माण कर लिया है. जिले के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इसे तोड़ने की कोशिश की जा रही है. लेकिन पूर्व मंत्री द्वारा गाली देकर अफसरों को भगा दिया जा रहा है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.