September 23, 2026

संयुक्त राष्ट्र महासभा: कश्मीर पर भाषण दे रहे थे एर्दोगन, उधर फोन पर रील्स देखते नजर आए सीरियाई राष्ट्रपति

एक तरफ न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) का मंच सजा है, जहां दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष और नेता वैश्विक चुनौतियों, युद्ध, शांति और कूटनीति जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी बात रख रहे है। इस बीच महासभा में हर नजर नेताओं के भाषण और अहम बैठकों पर थी। लेकिन इसी दौरान सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा का एक अलग ही अंदाज कैमरे में कैद हुआ। दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा में गंभीर चर्चा चल रही थी, उस वक्त उनका ध्यान अपने फोन पर नजर आया। वह उस समय फोन पर इंस्टाग्राम रील्स देखते हुए दिखाई दिए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।



क्या है पूरा मामला? 


कुर्दिस्तान 24 की रिपोर्ट के अनुसार, यूएनजीए के एक अनौपचारिक फुटेज में अल-शारा को तब आराम से अपना फोन इस्तेमाल करते, इंस्टाग्राम स्क्रॉल करते और रील्स भेजते हुए देखा गया, जब तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन पोडियम से भाषण दे रहे थे।

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वहीं, बता दें कि यह दूसरी बार है जब अल-शारा यूएनजीए में शामिल हुए हैं। इससे पहले 2025 में, लगभग 60 वर्षों में यूएनजीए में विश्व नेताओं को संबोधित करने वाले सीरिया के पहले प्रतिनिधि के तौर पर उन्होंने हिस्सा लिया था।

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एर्दोगन अपने भाषण में क्या कहा? 


इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान एर्दोगन ने मंगलवार को कहा, 'दक्षिण एशिया में यह महत्वपूर्ण है कि कश्मीर मुद्दे सहित सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के तहत बातचीत के जरिए सुलझाया जाए।' एर्दोगन पिछले कुछ वर्षों से संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से कश्मीर का मुद्दा उठाते रहे हैं। भारत ने उनके ऐसे बयानों पर लगातार आपत्ति जताई है।



2019 में की थी क्या टिप्पणी?


एर्दोगन ने 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा हटाए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर पर टिप्पणी की थी। सितंबर 2019 में 74वें यूएन महासभा के सत्र में उन्होंने कहा था कि 80 लाख लोग लगभग नाकाबंदी में हैं और दुर्भाग्य से कश्मीर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।



उन्होंने यह भी कहा था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पिछले 72 वर्षों में इस विवाद पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे सका। एर्दोगन की टिप्पणी पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। भारत ने तुर्किये से दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करने और भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी से बचने को कहा था।



2021 में भी उठाया था मुद्दा


एर्दोगन ने इसके बाद भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने संबोधनों में कश्मीर का जिक्र किया। 2021 में उन्होंने कश्मीर को 74 साल से जारी समस्या बताया था और ऐसा समाधान निकालने की बात कही थी जो हमारे कश्मीरियों की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करे।



भारत ने तब भी उनके बयान पर आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि एर्दोगन की लगातार टिप्पणियां इतिहास और कूटनीति की समझ को नहीं दर्शाती हैं। नई दिल्ली ने यह भी कहा था कि इस तरह के हस्तक्षेप का द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ सकता है।



2025 में फिर उठाया था कश्मीर


कुछ समय तक संयुक्त राष्ट्र में एर्दोगन के भाषणों में कश्मीर का मुद्दा कम प्रमुख रहने के बाद उन्होंने 2025 में 80वें यूएन महासभा के सत्र में फिर इसका जिक्र किया। यह बयान भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के एक दौर के बाद आया था।



उन्होंने कहा था, 'हम तनाव के बाद हुए युद्धविराम से खुश हैं। कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के आधार पर सुलझाया जाना चाहिए।' भारत ने इस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी थी और दोहराया था कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा है। नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसे मुद्दे को उठाने पर भी आपत्ति जताई थी, जिसे वह द्विपक्षीय और आंतरिक मामला मानता है।