September 23, 2026

रहवासी में कारोबार पर सुनवाई: कोर्ट ने कहा- ड्राफ्ट जारी कर दावे-आपत्तियां लें; अंतिम मास्टर प्लान भी हमारी अनुमति के बाद लागू होगा - Bhopal News

रहवासी में कारोबार पर सुनवाई:कोर्ट ने कहा- ड्राफ्ट जारी कर दावे-आपत्तियां लें; अंतिम मास्टर प्लान भी हमारी अनुमति के बाद लागू होगा

भोपाल26 मिनट पहले

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भोपाल का नया ड्राफ्ट मास्टर प्लान तैयार हो गया है। मप्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दी और ड्राफ्ट जारी कर लोगों से दावे-आपत्तियां व सुझाव लेने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने कहा कि ड्राफ्ट जारी करने से पहले फाइल उसके सामने पेश की जाए। अंतिम मास्टर प्लान भी सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद ही अधिसूचित होगा।

सरकार ने बताया कि भोपाल का पिछला मास्टर प्लान 1995 के बाद रिवाइज नहीं हुआ और उसकी अवधि 2005 में खत्म हो चुकी है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने साफ किया कि नया मास्टर प्लान मौजूदा उल्लंघनों के बचाव का आधार नहीं बनेगा। इसके लागू होने तक वर्तमान नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

आगे क्या : तेजी में 4, सामान्य प्रक्रिया में 6 महीने लगेंगे

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी होता है तो दावे-आपत्तियों के लिए 30 दिन मिलेंगे। इन पर सुनवाई होगी। इसके लिए अधिकतम 90 दिन का समय तय है।

सुनवाई के बाद संयुक्त संचालक अपनी टीप के साथ 30 दिन में रिपोर्ट संचालक को भेजेंगे। संचालक को अगले 30 दिन में इसे शासन को भेजना होगा। सुनवाई जल्दी हुई तो 4 महीने और सामान्य प्रक्रिया में करीब 6 महीने लगेंगे।

सरकार के पास मास्टर प्लान पर विचार करने की कोई समय-सीमा तय नहीं है। तकनीकी और कानूनी परीक्षण के बाद अंतिम अधिसूचना जारी होगी। शासन बदलाव करता है तो दावे-आपत्ति व सुनवाई की प्रक्रिया दोबारा नहीं करनी होगी।

सीलिंग पर भी सख्ती- दिन में सील, रात में फिर कारोबार

सीलिंग के बाद भी दुकानें खुलीं, कार्रवाई का अर्थ क्या

एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि कुछ जगह दिन में दुकानें और संस्थान सील किए जाते हैं, पर रात में वहां फिर कारोबार शुरू हो जाता है। कोर्ट ने सवाल किया कि सीलिंग के बाद भी गतिविधियां जारी हैं तो ऐसी कार्रवाई का क्या मतलब है। रहवासियों ने मांग की-सील लगाने के बाद परिसरों की निगरानी हो और दोबारा कारोबार शुरू होने पर कार्रवाई की जाए।

छोटे दुकानदार नहीं, बड़े उल्लंघनों पर हो कार्रवाई

कोर्ट ने कहा कि कार्रवाई का असर जमीन पर दिखना चाहिए। छोटे कारोबारियों को परेशान करने के बजाय आवासीय भूखंडों के बड़े व्यावसायिक इस्तेमाल के मामलों में प्रभावी कार्रवाई हो। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी की ओर से कहा गया कि केवल सील किए गए प्रतिष्ठानों की संख्या न देखी जाए। भूखंड का वास्तविक उपयोग, स्वीकृत नक्शा, मौके पर निर्माण व भू-उपयोग का उल्लंघन देखकर कार्रवाई की जाए।

सरकार बोली- सीलिंग में अब कोई हस्तक्षेप नहीं सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता के.एन. नटराजन ने बताया कि सीलिंग कार्रवाई में हस्तक्षेप की आशंका वाली उच्चस्तरीय समिति वापस ले ली गई है। सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिया कि अब सीलिंग में शासन की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। ऐसे में नगर निगम को कार्रवाई के साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सील किए गए परिसरों में दोबारा गतिविधियां शुरू न हों।

पुराने अवैध निर्माण वैध नहीं होंगे... कोर्ट ने साफ किया कि नया मास्टर प्लान मौजूदा उल्लंघनों के बचाव का आधार नहीं बनेगा। पुराने मामलों में मौजूदा नियमों से ही कार्रवाई होगी। नया प्लान आने के बाद भी पुराने अवैध निर्माण अपने आप वैध नहीं होंगे।

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