Jodhpur News: जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एनेस्थीसिया विभाग के प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से हड़कंप मच गया. डॉक्टर का शव संस्थान के डॉक्टर्स रेस्ट रूम के बाथरूम में मिला. पुलिस के मुताबिक, प्रथम दृष्टया मामला इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या का लग रहा है. हालांकि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त कर लिया है. मामले की जांच की जा रही है.
रेस्ट रूम के बाथरूम में मिला शव
पुलिस के अनुसार, घटना एम्स के एनेस्थीसिया विभाग की पहली मंजिल पर स्थित डॉक्टर्स रेस्ट रूम की है. मृतक डॉक्टर की पहचान डॉ. राज निलेश यादव के रूप में हुई है. वह एनेस्थीसिया विभाग में प्रथम वर्ष के छात्र थे. बताया जा रहा कि डॉ. राज ने खुद को रेस्ट रूम के बाथरूम में बंद कर लिया था. कुछ समय बाद जब वह बाहर नहीं आए तो मामले की जानकारी पुलिस को दी गई. पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बाथरूम का दरवाजा खोलकर घटनास्थल का निरीक्षण किया.
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मौके से इस्तेमाल किया गया इंजेक्शन बरामद
एसीपी भजनलाल जांगिड़ के मुताबिक, घटनास्थल की जांच के दौरान इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन बरामद हुए हैं. शुरुआती जांच में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाकर अपनी जान दी. घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. इसलिए पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि डॉक्टर की मौत के पीछे क्या वजह रही होगी?
परिवार और सहकर्मियों से पूछताछ
पुलिस ने डॉ. राज के परिवारवालों, सहकर्मियों और रूममेट्स से भी पूछताछ की है. उनके परिचितों के मुताबिक, डॉ. राज सामान्य और खुशमिजाज स्वभाव के थे. घटना से पहले भी उनके व्यवहार में किसी तरह के असामान्य बदलाव की जानकारी सामने नहीं आई है. बताया गया कि डॉ. राज ड्यूटी पर आने के दौरान भी सामान्य नजर आ रहे थे. ऐसे में अचानक हुई इस घटना ने उनके साथियों और संस्थान के अन्य डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया है.
मोबाइल और फॉरेंसिक जांच से खुलेगा राज
पुलिस ने डॉ. राज का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया है. अब मोबाइल में मौजूद डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है. इसके अलावा फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से भी जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मौत की वजह स्पष्ट नहीं है. जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों, मोबाइल डेटा और लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
(इनपुट- प्रदीप कुमार जोशी/जोधपुर)

ध्वज आर्य
राजस्थान में 2008 से पत्रकारिता के सफर की शुरुआत. 18 वर्षों के पत्रकारिता करियर में राजनीति, सामाजिक मुद्दे, विकास, अपराध और ग्राउंड रिपोर्टिंग पर काम. खबर की तह तक जाने, तथ्यों की पुष्टि करने और जटिल विषयों को सरल भाषा में जनता तक पहुंचाने में विशेषज्ञता. प्रिंट से डिजिटल मीडिया तक के बदलाव को करीब से देखा. प्रिंट ,डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्लेटफार्म पर काम का अनुभव. पत्रकारिता की शुरुआत के 10 साल क्राइम रिपोर्टिंग की. पूर्व में समाचार प्लस, इंडिया न्यूज, दैनिक भास्कर और अब नेशनल चैनल TV9 भारतवर्ष में राजस्थान ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी. इस सफर के दौरान ब्रेकिंग न्यूज से लेकर इन्वेस्टिगेशन स्टोरी के साथ कई बड़े खुलासे, कई बड़े चुनाव, आपदा, बड़े आंदोलनों की ग्राउंड ज़ीरो से कवरेज समेत भारत पाकिस्तान युद्ध (ऑपरेशन सिंदूर) को कवर किया. क्राइम की खबरों, बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और युद्ध कवरेज में सबसे ज्यादा रूचि. मेरा मानना है कि खबर सिर्फ एक घटना नहीं है, उसके पीछे का सच भी है. पत्रकारिता का काम सत्ता पक्ष से सवाल पूछना और जनता की आवाज़ बनना है. निष्पक्षता, गति और सटीकता मेरी रिपोर्टिंग के तीन स्तंभ हैं.
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