September 21, 2026

हाथ जोड़ता रहा, पुलिस धकेलती रही; मिली बेटे की लाश: नौकरी की दौड़ में उखड़ी सांसें, डॉक्टर होते तो बच जाता बेटा; पॉलीथिन में लिपटा शव मिला - Bareilly News

"भर्ती ग्राउंड के गेट पर हाथ जोड़कर रोता रहा, गिड़गिड़ाता रहा कि मुझे अंदर जाने दो... पर पुलिस मुझे धक्के देकर भगाती रही। जब तक अंदर पहुंचा, मेरा बेटा गिर चुका था और अस्पताल में उसकी लाश काली पॉलिथीन में लपेटकर थमा दी!" यह चीत्कार मुरादाबाद होमगार्ड

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B.Tech, B.Ed, CTET और UP-TET पास उनका बेटा शिवम यादव सिर्फ एक अदद सरकारी नौकरी के सम्मान के लिए 12वें राउंड की दौड़ लगा रहा था। आखिरी राउंड में उसकी सांसें उखड़ीं, लेकिन मैदान में डॉक्टरों का कोई पैनल नहीं था; सिर्फ एम्बुलेंस के ड्राइवर खाकी पहनकर खड़े थे। परिजनों का कहना है कि अगर सही समय पर सीपीआर या मेडिकल मदद मिल जाती, तो शिवम आज जिंदा होता। मुरादाबाद में शुक्रवार को शिवम का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। शुक्रवार देर शाम ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

दौड़ के 12वें राउंड में बिगड़ी तबीयत, गेट पर रोकती रही पुलिस मृतक के पिता विनोद यादव ने बताया कि उनका बेटा 12वां राउंड लगा रहा था। जैसे ही वह ढीला पड़ा, उन्होंने अंदर जाने के लिए गुहार लगाई। उन्होंने गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों से अंदर जाने देने की मिन्नतें कीं, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। जब तक वे पहुंचे, तब तक बेटा गिर चुका था। इसके बाद काफी देर से उसे एम्बुलेंस में ले जाया गया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें गेट से हटा दिया और एम्बुलेंस के पीछे तक नहीं जाने दिया।

मैदान में डॉक्टर न होने का आरोप, प्राथमिक इलाज में लापरवाही पिता का गंभीर आरोप है कि भर्ती स्थल पर प्राथमिक उपचार का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं था। उनका कहना है कि वहां डॉक्टरों का कोई पैनल मौजूद नहीं था, केवल ड्राइवर ही वर्दी पहनकर खड़े थे। अगर वहां समय पर डॉक्टर मौजूद होते और समुचित इलाज मिल जाता, तो उनके बेटे की जान बचाई जा सकती थी। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें केवल बेटे का शव ही देखने को मिला। होनहार था शिवम, कई पात्रता परीक्षाएं पास करने के बाद भी भटक रहा था पिता के मुताबिक उनका बेटा पढ़ाई-लिखाई में बेहद होनहार था। उसने बी.टेक और बी.एड किया था और सीटीईटी व यूपी-टीईटी की परीक्षाएं भी अच्छे अंकों से पास की थीं। नौकरी पाने के लिए वह दिन-रात एक कर रहा था और पिछले कुछ महीनों में बिजनौर, रुड़की, आगरा, मुरादाबाद, रामपुर, गढ़मुक्तेश्वर और नोएडा समेत कई शहरों में परीक्षाओं के सिलसिले में भटकता रहा। शिवम छात्रों को फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स भी पढ़ाता था।

भर्ती प्रक्रिया और सिस्टम पर पिता का दर्द पिता ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिक नंबर होने के बावजूद नॉर्मलाइजेशन के नाम पर युवाओं को बाहर कर दिया जाता है। उन्होंने व्यवस्था पर पक्षपात और उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि इस बदइंतजामी ने एक पिता की पूरी दुनिया उजाड़ दी। विनोद यादव के परिवार में उनकी पत्नी ममता यादव, बहू कोमल यादव और ढाई साल की पोती शैली है। शिवम के तीन अन्य भाई हैं—अंकित, सचिन (दोनों वकील) और सबसे छोटा भाई आदित्य, जो चौथी कक्षा में पढ़ता है।

जन्मदिन पर रखा था उपवास, उसी रात परीक्षा के लिए रवाना हुए हादसे से ठीक पहले 17 सितंबर को शिवम का जन्मदिन था। उस दिन गुरुवार होने के कारण उनका उपवास था। व्रत खोलने और थोड़ा आराम करने के बाद वे रात को कपड़े पहनकर परीक्षा के लिए निकल गए थे। उन्होंने परिजनों से कहा था कि अगली बार जन्मदिन अच्छे से मनाएंगे, लेकिन अगली ही सुबह उनकी मौत की दुखद खबर घर आ पहुंची।