इटली के स्कूलों में बुर्के-नकाब पर लगेगा बैन, विदेशी छात्रों की संख्या भी तय करेगी मेलोनी सरकार
Italy Burqa Ban in Schools: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों के लिए कड़े नियमों का ऐलान किया है, जिसके तहत बुर्का-नकाब पहनने पर पूरी तरह रोक लगेगी. साथ ही हर क्लास में विदेशी छात्रों की अधिकतम सीमा तय करने की भी तैयारी है. नए नियमों के तहत विदेशी अभिभावकों के लिए इटैलियन भाषा सीखना भी जरूरी किया जा सकता है.

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों के लिए कड़े नियमों का ऐलान किया है, Credit: AI
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Italy Burqa Ban in Schools: इटली में अगले साल होने वाले आम चुनावों से पहले जॉर्जिया मेलोनी सरकार ने स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है. इटली में अब स्कूलों के भीतर बुर्का और नकाब पहनने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली गई है. साथ ही प्रत्येक कक्षा में विदेशी छात्रों की एक तय सीमा निर्धारित की जाएगी. प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपनी पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ के युवा मोर्चे के एक राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘फेनिक्स’ के दौरान इस नए प्रस्ताव की घोषणा की. मेलोनी ने साफ शब्दों में कहा कि स्कूल में बच्चों को बिना चेहरा ढके ही आना होगा. किसी भी असली या कथित परंपरा के नाम पर किसी भी बच्ची या युवती को खुद को छिपाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.
Italian PM Giorgia Meloni announced on September 20, 2026, under which the wearing of the burqa in schools would be banned, the enrollment of foreign students in classrooms would be limited, and learning the Italian language would be made mandatory for certain parents. pic.twitter.com/id5QzI04wT
— War Flash (@WarFlash_2630) September 20, 2026
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‘इतालवी बच्चे अपनी ही क्लास में अल्पसंख्यक महसूस न करें’
मेलोनी ने क्लासरूम में विदेशी बच्चों की संख्या सीमित करने के फैसले पर कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि इटली के बच्चे अपने ही देश की कक्षाओं में अल्पसंख्यक महसूस करें या खुद को उपेक्षित पाएं. उन्होंने तर्क दिया कि अगर किसी कक्षा में भाषा न समझने वाला सिर्फ एक विदेशी बच्चा होता है, तो वह साथी छात्रों और शिक्षकों की मदद से जल्दी भाषा सीखकर घुल-मिल जाता है. लेकिन जब ऐसे छात्रों की तादाद बहुत ज्यादा हो जाती है, तो वह इंटीग्रेशन नहीं बल्कि उपेक्षा बन जाती है.
माता-पिता के लिए इतालवी भाषा सीखना जरूरी
सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे इस नए मसौदे के तहत उन विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए भी इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य किया जाएगा, जिन्हें स्कूल प्रणाली में घुलने-मिलने में गंभीर कठिनाई आ रही है. इस पूरे प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की बैठक में औपचारिक मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा. मेलोनी सरकार का यह कदम देश में इमिग्रेशन और सांस्कृतिक एकीकरण को लेकर चल रही बहसों के बीच बेहद अहम माना जा रहा है.
क्लास में विदेशी छात्रों की संख्या 30 फीसदी तक सीमित
नेशनल स्टैटिस्टिक्स इंस्टीट्यूट (ISTAT) के आंकड़ों के मुताबिक, इटली के स्कूलों में एडमिशन लेने वाले कुल बच्चों में विदेशी छात्रों की तादाद करीब 12 फीसदी है. इटली में साल 2010 से ही एक नियम लागू है, जिसके तहत किसी भी क्लास और स्कूल के कुल एनरोलमेंट में विदेशी छात्रों की संख्या अधिकतम 30 प्रतिशत तक ही सीमित रखी जा सकती है. इसका मकसद कक्षाओं में संतुलन बनाए रखना और बच्चों के बीच बेहतर तालमेल बैठाना रहा है.
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