आगरा। उत्तर प्रदेश एसटीएफ (Special Task Force) ने बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा करने वाले एक सक्रिय गिरोह के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई की है। एसटीएफ की टीम ने इस ठग गिरोह के एक मुख्य सदस्य राधे मीना को ताजनगरी आगरा से धर दबोचा है। आरोपी को एत्माद्दौला या छत्ता थाना क्षेत्र के अंतर्गत हाथीघाट के पास से एक सटीक सूचना के आधार पर घेराबंदी कर पकड़ा गया है। एसटीएफ द्वारा ली गई तलाशी के दौरान उसके पास से विभिन्न प्रतिष्ठित सरकारी विभागों की सात फर्जी मुहरें (स्टैम्प) और रेलवे विभाग से जुड़े दो कूटरचित (फर्जी) नियुक्ति पत्र बरामद किए गए हैं।
एसटीएफ के अधिकारियों के मुताबिक, यह शातिर गिरोह भोले-भाले और बेरोजगार युवाओं को आसानी से सरकारी महकमों में उच्च पदों पर नौकरी लगवाने का लालच देता था और उन्हें अपने जाल में फंसाता था। इसके बाद पीड़ित युवाओं से मोटी रकम वसूल की जाती थी और बदले में उन्हें पूरी तरह तैयार किए गए फर्जी नियुक्ति पत्र व अन्य कूटरचित दस्तावेज सौंप दिए जाते थे। बरामद की गई इन नकली मुहरों और फर्जी पत्रों से यह साफ जाहिर होता है कि यह गिरोह बहुत बड़े पैमाने पर सरकारी दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ कर रहा था।
आगरा के दो लोगों को बनाया था अपना शिकार
छानबीन के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी राधे मीना ने आगरा के ही दो स्थानीय नागरिकों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर उनसे भारी-भरकम रकम ऐंठी थी। पैसे वसूलने के बाद उन्हें पूरी तरह आश्वस्त किया गया था कि उनकी नौकरी पक्की है। इस ठगी के सौदे में कुछ राशि पहले ही एडवांस के तौर पर ली जा चुकी थी, जबकि बाकी बचे हुए लगभग दो लाख रुपये की शेष रकम वसूलने के लिए ही राधे मीना विशेष रूप से आगरा आया हुआ था। इसी बीच, एसटीएफ को इसकी भनक लग गई और उन्होंने जाल बिछाकर उसे दबोच लिया।
राजस्थान में भी दर्ज हैं कई आपराधिक मामले
एसटीएफ की शुरुआती जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि पकड़ा गया आरोपी राधे मीना कोई आम ठग नहीं है, बल्कि उसके खिलाफ पड़ोसी राज्य राजस्थान में भी ठगी, धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना जैसे गंभीर मामलों में कई मुकदमे दर्ज हैं। जांच एजेंसी अब उसके पूरे आपराधिक इतिहास और इससे पहले किए गए अन्य फर्जीवाड़ों की कुंडली खंगाल रही है।
एसटीएफ अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह के साथ और कौन-कौन लोग पर्दे के पीछे से जुड़े हुए हैं और अब तक इन्होंने कितने बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बनाया है। गौरतलब है कि रेलवे और अन्य सरकारी महकमों द्वारा समय-समय पर यह चेतावनी दी जाती रही है कि नौकरी के नाम पर किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को पैसे न दें और न ही इस प्रकार के फर्जी नियुक्ति पत्रों के बहकावे में आएं, क्योंकि सभी भर्तियां पूरी तरह पारदर्शी और अधिकृत बोर्डों के माध्यम से ही की जाती हैं।