
5 टाइगर रिजर्व में होगी तैनाती.
Karnataka News: कर्नाटक के चामराजनगर जिले के जंगलों में अवैध शिकार और पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने के लिए वन विभाग ने अपनी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है. हाल ही में हनूर वन क्षेत्र में वन विभाग के कर्मचारियों के साथ मुठभेड़ में तीन शिकारियों के मारे जाने की घटना सामने आई थी. इसके बाद जंगलों में सक्रिय शिकारियों को लेकर वन विभाग और ज्यादा सतर्क हो गया है. बताया जा रहा है कि जिले के जंगलों में 40 से अधिक शिकारी अभी भी सक्रिय हैं.
‘बेल्जियम के खोजी कुत्तों’ की ली जा रही मदद
अवैध शिकारियों और जंगल में होने वाली दूसरी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग अब विशेष रूप से प्रशिक्षित बेल्जियम के खोजी कुत्तों की मदद ले रहा है. इन कुत्तों को जंगलों में संदिग्ध गतिविधियों और अपराधियों का पता लगाने के लिए तैयार किया जा रहा है. वन विभाग की 10 मादा बेल्जियम खोजी कुत्तों को बांदीपुर के मेलुकामनहल्ली शिविर में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यहां उन्हें जंगल के मुश्किल हालात में काम करने और संदिग्ध लोगों या वस्तुओं की पहचान करने की ट्रेनिंग दी जा रही है.
पांच टाइगर रिजर्व में होगी तैनाती
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन खोजी कुत्तों को कर्नाटक के प्रमुख बाघ अभ्यारण्यों में तैनात करने की योजना है. बांदीपुर, बिलिगिरी रंगनाथस्वामी मंदिर (BRT), भद्रा, काली और नागरहोल बाघ अभ्यारण्यों में इन्हें सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया जाएगा. वन विभाग का उद्देश्य इन कुत्तों की मदद से जंगल में होने वाली अवैध गतिविधियों का जल्द पता लगाना है. इसके साथ ही वनकर्मियों की गश्त और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है.
सूंघने की क्षमता से तलाश में मदद
बेल्जियम के खोजी कुत्ते अपनी तेज सूंघने की क्षमता और तेजी से दौड़ने के लिए जाने जाते हैं. इन्हें आपराधिक मामलों में संदिग्ध वस्तुओं और लोगों का पता लगाने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाता है. जंगल जैसे मुश्किल इलाकों में इनकी मदद से वन विभाग को शिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने में आसानी हो सकती है.
आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल
वन विभाग जंगलों में अवैध शिकार की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए नई तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि खोजी कुत्तों की तैनाती, आधुनिक तकनीक और वनकर्मियों की निगरानी के जरिए जंगलों में अवैध गतिविधियों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने की कोशिश की जा रही है. खास तौर पर बाघ अभ्यारण्यों में वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है.

आशीष कुमार मिश्रा
आशीष कुमार मिश्रा की 6 साल से जर्नलिज्म की Journey जारी है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को बनाने में अहम योगदान भारत के राज्यों का है. इन राज्यों से जुड़ी हर खटपट, चाहे राजनीतिक हो या सामाजिक, वो आप तक पहुंचाने में जुटा हुआ हूं. उत्तर प्रदेश समेत देश के तमाम बड़े राज्यों की सियासत को समझता हूं और बेबाकी से उसे लिखता हूं. जर्नलिज्म की Journey 2017 में न्यूज चैनल समाचार टुडे से स्टार्ट हुई, फिर नेशनल वॉइस के साथ भी काम करने का मौका मिला. दो न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल की तरफ में रुख किया. 2018 में पहली बार हैदराबाद में ईटीवी भारत की डिजिटल विंग टीम से जुड़ा. यहां साढ़े 3 साल का समय बिताने के बाद 2021 में दैनिक भास्कर (लखनऊ) की टीम से जुड़ा. अब यह सफर 2022 से टीवी9 भारतवर्ष के साथ चल रहा है. पत्रकारिता का मैंने ककहरा दैनिक जागरण इंस्टीट्यूट से सीखा. यहीं से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.
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