अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की ओर से जारी खुफिया दस्तावेजों से इस बात का खुलासा हुआ है कि तालिबान ने 1999 में अलकायदा के आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए आगाह किया था. यह चेतावनी उस वक्त जारी की गई थी, जब उसी साल इंडियन एयरलाइंस के एक विमान का अपहरण कर उसे कंधार ले जाया गया था.
प्रेसिडेंशियल डेली ब्रीफ्स में किया गया था प्रस्तुत
तालिबान की ओर से आगाह किये जाने का उल्लेख जनवरी 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के समक्ष प्रस्तुत किए गए प्रेसिडेंशियल डेली ब्रीफ्स (पीडीबी) में किया गया था. ये दस्तावेज 11 सितंबर 2001 के हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर जारी किए गए ऐसे 71 दस्तावेजों में शामिल हैं. तीन जनवरी, 2000 के इस दस्तावेज में कहा गया कि तालिबान ने पिछले हफ्ते लादेन को अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए आगाह किया था, जो यह साबित करता है कि वो लादेन का समर्थक बना हुआ है.
1999 में हुआ था इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण
काठमांडू से नयी दिल्ली जा रहे इंडियन एयरलाइंस के एक विमान का 24 दिसंबर, 1999 को हरकत-उल-मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया था और उसे जबरन कंधार ले जाया गया था. उड़ान संख्या आईसी 814 से जुड़ा यह संकट 31 दिसंबर, 1999 को उस समय खत्म हुआ, जब भारत ने तीन आतंकवादियों को रिहा कर उन्हें तालिबान को सौंप दिया.
कई देशों पर हमले की साजिश रच रहा था लादेन
क्लिंटन के समक्ष 28 अगस्त, 1998 को प्रस्तुत एक अन्य पीडीबी में संकेत दिया गया था कि लादेन मिस्र, अरब प्रायद्वीप विशेषकर कुवैत, सऊदी अरब और यमन, भारत, पाकिस्तान, युगांडा और संभवतः नाइजीरिया में हमले करने की साजिश रच रहा था. इसमें कहा गया था कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में लादेन के मजबूत नेटवर्क से संकेत मिलता है कि वह इन क्षेत्रों में भी अमेरिका से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकता है.
पेंटागन पर हमले की जानकारी अफगानिस्तान के पास थी
सबसे शुरुआती दस्तावेज 13 फरवरी, 1998 का था, जिसमें कहा गया था कि बिन लादेन और अन्य इस्लामी चरमपंथियों ने खुले बाजार से अज्ञात रासायनिक, जैविक और परमाणु पदार्थ हासिल करने पर सहमति जताई. रिपोर्ट में कहा गया था कि लादेन के पास वैध कंपनियां, कारोबारी संबंध और एक वित्तीय साम्राज्य है, जो उसे ऐसे हथियार हासिल करने के प्रयास में मदद कर सकते हैं. सीआईए द्वारा जारी किए गए कुछ पीडीबी तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के लिए 12 अक्टूबर, 2000 को यमन के अदन बंदरगाह में युद्धपोत यूएसएस कोल पर हुए बम हमले की अमेरिका-यमन जांच के शुरुआती नतीजों के आधार पर तैयार किए गए थे.
सीआईए की ओर से जारी दस्तावेजों में आखिरी दस्तावेज 12 सितंबर, 2001 का है. यह तारीख वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन से विमानों के टकराने के अगले दिन की है. स्थिति रिपोर्ट में हमले से पहले लादेन से जुड़ी नवीनतम खुफिया जानकारी का विवरण दिया गया था, जिसमें उसकी संभावित संलिप्तता से जुड़े ब्योरे भी शामिल थे. रिपोर्ट में कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि अफगानिस्तान और फारस की खाड़ी क्षेत्र के सुन्नी चरमपंथियों को लादेन के निर्देश पर होने वाले हमलों की जानकारी थी.
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