तहसील क्षेत्र में चल रहे भूमि सर्वे एवं री-सर्वे में कथित अनियमितताओं को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में शनिवार को तहसील मुख्यालय स्थित खेल मैदान में सुबह 11 बजे किसान महापड़ाव आयोजित किया जाएगा।
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महापड़ाव में सर्वे-री-सर्वे को रद्द करने, पुराने राजस्व रिकॉर्ड को यथावत रखने व कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी। बताया कि कल्याणपुर तहसील क्षेत्र में सर्वे-री-सर्वे से संबंधित 600 से अधिक शिकायतें उपखंड अधिकारी कार्यालय में दर्ज हो चुकी हैं। किसानों का आरोप है कि कई खसरों में रकबा कम-ज्यादा दर्शाया गया है। वहीं एक ही खसरे के अनावश्यक टुकड़े किए गए हैं। किसानों ने कल्याणपुर तहसील में चल रहे सर्वे-री-सर्वे को तत्काल रद्द करना, पुराने राजस्व रिकॉर्ड को यथावत रखना, पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र कमेटी गठित करने व जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की। महापड़ाव को लेकर भारतीय किसान संघ की ओर से गांव-गांव जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है।
संगठन पदाधिकारियों ने किसानों से अधिक संख्या में पहुंचकर महापड़ाव को सफल बनाने का आह्वान किया। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दलाराम बटेर, प्रदेश मंत्री हरिराम मांजू, जिलाध्यक्ष जुहाराराम पटेल, बाड़मेर जिलाध्यक्ष जगराम, पूर्व जिलाध्यक्ष दुर्गाराम, जिला युवा प्रमुख दिलीप शर्मा बलाऊ, तहसील अध्यक्ष भरतसिंह डोली, पाटोदी अध्यक्ष चिमाराम मूंढ, गुड़ामालानी अध्यक्ष खेताराम, आसुराम समदड़ी, देवीलाल नेवरी, प्रधान श्रवणसिंह मौजूद रहे। कई किसानों को फॉर्म संख्या 7 की पूरी जानकारी नहीं दी गई। कई फॉर्म पर पटवारी के हस्ताक्षर नहीं होने तथा मौके पर तैयार किए गए रिकॉर्ड का उचित सत्यापन नहीं करवाए गए। नए खसरा व नक्शों की जानकारी किसानों को उपलब्ध नहीं कराने तथा पुराने नक्शों में बदलाव किए जाने को लेकर भी किसान आपत्ति जता रहे हैं। स्वतंत्र जांच कमेटी बनाने के लिए किसान लामबंद ज्ञापन में किसानों ने ओरण, गोचर, चारागाह, आगोर, आबादी व गैर-मुमकिन सरकारी भूमि के रिकॉर्ड में किए गए कथित बदलावों की भी जांच कराने की मांग की है। किसानों ने राजपुरा थोब क्षेत्र के एक खसरे का उदाहरण देते हुए करीब 96 बीघा चारागाह भूमि के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी का उल्लेख किया है। किसानों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में किसी भी तरह के बदलाव से भविष्य में भूमि विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।