विधवा प्रसूता को नहीं मिली एम्बुलेंस : आटो किराया कर जाना पड़ा घर, महिला आयोग की सदस्य दीपिका ने जताई नाराजगी
सुकमा जिले के नीलावरम गांव की एक आदिवासी विधवा प्रसूता को अस्पताल से घर लौटने के लिए महतारी एक्सप्रेस की सुविधा नहीं मिलने पर सवाल उठे हैं।
सुकमा जिला अस्पताल
- Published: 11 Sep 2026, 07:42 PM IST
- Last Updated: 11 Sep 2026, 07:42 PM IST
लीलाधर राठी- सुकमा। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर शासन के तमाम दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली और गरीबों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुकमा के नीलावरम गांव की एक गरीब आदिवासी विधवा प्रसूता को प्रसव के बाद अस्पताल से घर लौटने के लिए महतारी एक्सप्रेस/102-108 की सुविधा कथित तौर पर उपलब्ध नहीं कराई गई। मजबूर होकर नवजात शिशु को गोद में लेकर महिला को वृद्ध परिजनों के साथ खराब मौसम में निजी ऑटो से गांव लौटना पड़ा।
निरंकुश हुआ अस्पताल प्रबंधन
बताया जा रहा है कि, महिला के पति का कुछ दिन पूर्व ही निधन हो गया था। शुक्रवार को महिला का प्रसव जिला अस्पताल सुकमा में हुआ। प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा अस्पताल में उपचाराधीन रहे। सोमवार को चिकित्सकों द्वारा डिस्चार्ज किए जाने के बाद परिजनों ने महिला और नवजात को सुरक्षित रूप से गांव पहुंचाने के लिए महतारी एक्सप्रेस/102-108 की मांग की। लेकिन आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। परिजनों को वाहन के लिए इंतजार करना पड़ा और डिस्चार्ज की प्रक्रिया में भी घंटों की देरी हुई। शाम होने के बाद खराब मौसम के बीच नवजात बच्चे को लेकर महिला को निजी ऑटो से नीलावरम जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

ऐसे अधिकारियों की वजह से होती है बदनामी
एक ओर सरकार संस्थागत प्रसव, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल से प्रसव के बाद एक गरीब महिला को सुरक्षित परिवहन सुविधा नहीं मिलना व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इस पूरे मामले पर हमने छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य एवं अधिवक्ता दीपिका शोरी से चर्चा की।
उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जिला अस्पताल प्रबंधन, विशेषकर सिविल सर्जन डॉ. कश्यप की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक ऐसी महिला जिसके पति का कुछ दिन पहले ही निधन हुआ हो, जिसने जिला अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया हो और जो प्रसव के बाद नवजात को लेकर अपने घर लौट रही हो, उसे यदि शासन की स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत उपलब्ध परिवहन सुविधा के लिए भटकना पड़े और अंततः निजी ऑटो का सहारा लेना पड़े, तो इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति क्या हो सकती है।

अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए : सोरी
उन्होंने कहा कि, जिला अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सिविल सर्जन डॉ. एमआर कश्यप को यह बताना होगा कि, अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाली प्रसूता और नवजात के लिए उपलब्ध परिवहन व्यवस्था आखिर क्यों नहीं कराई गई। दीपिका सोरी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आदिवासी समाज के बेटे हैं और वे आदिवासी समाज के साथ-साथ प्रदेश के प्रत्येक वर्ग, गरीब, महिला, किसान, युवा और जरूरतमंद व्यक्ति की चिंता कर रहे हैं। सरकार की मंशा स्पष्ट है कि अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पहुंचे।
क्या गरीब और आदिवासी महिला होने की यही सजा है?
दीपिका शोरी ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी सक्षम और प्रभावशाली परिवार की महिला के साथ ऐसी स्थिति बनती तो क्या उसे भी नवजात को गोद में लेकर खराब मौसम में निजी ऑटो से घर जाना पड़ता? उन्होंने कहा, “यह सवाल केवल नीलावरम की उस विधवा महिला का नहीं है। यह सवाल हर उस गरीब मां का है जो सरकारी अस्पताल में इस भरोसे के साथ आती है कि सरकार उसके साथ खड़ी है। प्रसव के बाद मां और नवजात को सुरक्षित घर पहुंचाना संवेदनशील व्यवस्था का हिस्सा होना चाहिए, न कि किसी अधिकारी की कृपा। उन्होंने कहा कि महिला के पति का कुछ दिन पूर्व ही निधन हुआ था।
CMHO और कलेक्टर से कार्रवाई की मांग
आयोग सदस्य ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि मामले में जिम्मेदारी तय की जाए और यदि जिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। लोगों ने कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से मामले का संज्ञान लेकर जिला अस्पताल प्रबंधन से जवाब तलब करने और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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