September 7, 2026

बिहार: विधान परिषद के सभापति पद पर जदयू की होगी ताजपोशी, एनडीए के बीच बनी आम सहमति - Haribhoomi

बिहार: विधान परिषद के सभापति पद पर जदयू की होगी ताजपोशी, एनडीए के बीच बनी आम सहमति

बिहार विधान परिषद के सभापति का पद अब जदयू की झोली में जाएगा। एनडीए में आपसी सहमति बन चुकी है और जल्द ही किसी वरिष्ठ नेता को यह जिम्मेदारी मिलेगी।

Legislative Council Chairman JDU BJP NDA Bihar politics

बिहार विधान परिषद के सभापति का पद अब जदयू की झोली में जाएगा।

  • Published: 07 Sep 2026, 01:18 PM IST
  • Last Updated: 07 Sep 2026, 01:18 PM IST

Bihar Legislative Council Chairman: बिहार के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। एनडीए खेमे के भीतर बनी नई रणनीतिक सहमति के तहत, अब बिहार विधान परिषद के सभापति का महत्वपूर्ण पद जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खाते में जाने वाला है। सत्तारूढ़ गठबंधन में सीटों और पदों के समीकरण को लेकर हुई चर्चा के बाद यह तय माना जा रहा है कि जल्द ही जदयू के किसी वरिष्ठ विधान पार्षद (MLC) को इस उच्च संवैधानिक पद की कमान सौंपी जाएगी।

एनडीए में बनी आपसी सहमति
विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जदयू के बीच इस बात को लेकर पूरी तरह सहमति बन चुकी है। राज्य में मुख्यमंत्री पद पर नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के साथ ही यह चर्चा जोर पकड़ने लगी थी कि विधान परिषद के सभापति की कुर्सी जदयू के पास आ सकती है।

वर्तमान में भाजपा के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। चूंकि अभी मुख्यमंत्री के अलावा विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति दोनों ही पद भाजपा कोटे के पास हैं, इसलिए स्वाभाविक दावेदारी के तहत अब परिषद के सभापति का पद जदयू को मिलने जा रहा है।

पुराना राजनीतिक इतिहास और पिछले कार्यकाल
यदि पिछले राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर डालें, तो एनडीए और महागठबंधन दोनों ही सरकारों के दौरान इस पद पर फेरबदल होते रहे हैं। पूर्व में जब प्रदेश में महागठबंधन की सरकार थी, तब जदयू के उपसभापति हारुण रसीद ने करीब तीन साल तक विधान परिषद के कार्यकारी सभापति के रूप में कार्यभार संभाला था।

इसके अलावा, भाजपा के अवधेश नारायण सिंह से पहले जदयू के वरिष्ठ एमएलसी देवेश चंद्र ठाकुर लगभग दो साल तक विधान परिषद के सभापति रहे। हालांकि, पिछले आम चुनावों में लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता के साथ-साथ सभापति पद से भी इस्तीफा दे दिया था। गौर करने वाली बात यह भी है कि एनडीए की पिछली सरकारों में जब विधान परिषद के सभापति का पद भाजपा के पास होता था, तब विधानसभा अध्यक्ष का पद जदयू कोटे के पास रहता था।

दोनों सदनों के मौजूदा सियासी आंकड़े
वर्तमान राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो बिहार विधानसभा में अभी भाजपा के पास 88 विधायक हैं, जबकि जदयू के पास 85 विधायक हैं। वहीं दूसरी ओर, यदि उच्च सदन यानी विधान परिषद की बात करें तो वहाँ संख्या बल इस प्रकार है:

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): 25 सदस्य
  • जनता दल यूनाइटेड (JDU): 20 सदस्य
  • राष्ट्रीय जनता दल (RJD): 15 सदस्य
  • कांग्रेस: 2 सदस्य
  • निर्दलीय: 7 सदस्य
  • अन्य दल (CPI, CPM, HAM, RLM, LJP (R), RLJP): प्रत्येक के 1-1 सदस्य

चूंकि वर्तमान में डॉ. प्रेम कुमार बिहार विधानसभा के अध्यक्ष हैं, ऐसे में अब संतुलन बनाते हुए जदयू के किसी सीनियर एमएलसी को विधान परिषद के सभापति का दायित्व सौंपने की प्रक्रिया तय मानी जा रही है।