September 7, 2026

डॉक्टरों की भी पात्रता परीक्षा करवा ली जाए?, बैक टू बैक कांड सामने आ रहे हैं

भोपाल, 7 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश में आजकल पात्रता परीक्षा का मुद्दा चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी शिक्षकों की पात्रता परीक्षा का आदेश दिया है। इसमें कोई बुराई भी नहीं है, जो परीक्षा लेते हैं वह परीक्षा दे भी सकते हैं। हम तो यहां पर बस इतना जोड़ना चाहते हैं कि जब पात्रता परीक्षा की बात चल ही रही है, तो फिर डॉक्टरों की भी पात्रता परीक्षा करवा ली जाए। आजकल बड़ा उधम मचा रखा है। एक के बाद एक गंभीर मामले सामने आ रहा है। 

कल्पना मिश्रा का मामला तो याद ही होगा आपको। वीडियो भी वायरल हुआ था। कल्पना गर्भवती थी और संतान को जन्म देने वाली थी। उसकी ऑपरेशन के लिए ले जाया जा रहा था तब उसने चीख-चीख कर कहा था, यह लोग मुझे मार डालेंगे। थोड़ी देर बाद खबर आई, कल्पना और उसकी संतान की मौत हो गई है। मतलब कल्पना को पता था कि डॉक्टर सही इलाज नहीं कर रहे हैं, लेकिन हमारी संस्कृति में तो डॉक्टर भगवान होता है। इसलिए परिवार वालों ने कल्पना की बात पर नहीं डॉक्टरों की बात पर विश्वास किया। अब धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है। एक और मामला सामने आया है: 

बता रहा है कि कुत्ते ने काटा है, लेकिन डॉक्टर मानने को तैयार ही नहीं

एक युवक को कुत्ते ने काट लिया। वह रेबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचा। उसने डॉक्टर को बताया कि कुत्ते ने काटा है लेकिन डॉक्टर ने पर्ची पर लिखा कि किसी अज्ञात सांप ने काट लिया है, और फिर युवक को सांप के जहर से जान बचाने वाला इंजेक्शन लगा दिया गया। हालात देखिए बेचारा युवक सीएम हेल्पलाइन में शिकायत कर रहा है। बता रहा है कि कुत्ते ने काटा है, लेकिन डॉक्टर मानने को तैयार ही नहीं है। वह कह रहे हैं कि सांप ने काटा था, और इलाज कर दिया गया है। 

हम आपको केवल इतना याद दिलाना चाहते हैं कि

इससे पहले एक जिंदा आदमी के पोस्टमार्टम की खबर भी आपके पास तक पहुंची गई होगी, एक मेडिकल ऑफिसर को ब्लड प्रेशर चेक करना नहीं आता, यह वीडियो भी आपने देख लिया होगा और अब तक आपको ऐसे दर्जनों मामले याद आ गए होंगे। यहां हम आपको केवल इतना याद दिलाना चाहते हैं कि यह सब कुछ, व्यापम घोटाला के बाद से शुरू हुआ है। घोटाला किसने किया और CBI की जांच पर हम कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन एक निवेदन करना चाहते हैं। जब लगातार ऐसे गंभीर मामले सामने आ रहे हैं, तो क्यों ना व्यापम के बाद वाले डॉक्टरों की भी पात्रता परीक्षा करवा ली जाए। सरकार चाह कर भी नहीं कर पाएगी, क्योंकि डॉक्टर हड़ताल कर देते हैं। 

यह मत कहना कि हमको सरकारी अस्पताल की जरूरत ही नहीं

इसलिए पब्लिक को खुद आगे आना होगा। मध्य प्रदेश के हर शहर में प्रदर्शन करना पड़ेगा। कल्पना मिश्रा के लिए नहीं, अपने परिवार के सदस्यों के लिए, अपनी मां, बहन, बेटी के लिए कैंडल मार्च निकालना पड़ेगा। भाजपा की तो सरकार है और कांग्रेस की उम्मीद करना मत। हां, यदि भीड़ जमा हो गई तो जरूर आ जाएंगे। और हां यह मत कहना कि हमको सरकारी अस्पताल की जरूरत ही नहीं, हम तो प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाने जाते हैं। कौन जाने आप कब किसी हादसे का शिकार हो जाए और एंबुलेंस आपको सरकारी अस्पताल ले जाए। मतलब समाज के सक्रिय लोगों को स्वयं आगे आना पड़ेगा नहीं तो जब आपकी बारी आएगी तो कोई आपके साथ खड़ा नहीं होगा।