September 7, 2026

'जीजा के साथ आपत्तिजनक हालत में देखा पत्नी को...', पति की तलाक की याचिका फिर भी खारिज, जानें कोर्ट ने क्या कहा?

Patna News: पत्नी को किसी दूसरे पुरुष के साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक स्थिति में देख लेना भर व्यभिचार साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है. पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि आपत्तिजनक स्थिति और यौन संबंध बनाना दो अलग-अलग बातें हैं. व्यभिचार के आरोप को साबित करने के लिए विश्वसनीय और ठोस साक्ष्यों की आवश्यकता होगी. ये फैसला Miscellaneous Appeal No. 445 of 2024 में आया है.

न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी और न्यायमूर्ति राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने पति की तलाक की अपील खारिज करते हुए मधुबनी परिवार न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पत्नी के खिलाफ व्यभिचार और क्रूरता के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलने पर तलाक देने से इनकार किया गया था. फैसला 3 सितंबर 2026 को सुनाया गया.

क्या था पूरा मामला?

मामले के अनुसार, दंपति की शादी 2 जुलाई 2006 को हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी. करीब चार साल बाद उनके एक पुत्र का जन्म हुआ. बाद में दोनों के बीच वैवाहिक विवाद शुरू हो गया. पति का आरोप था कि साल 2013 में उसने अपनी पत्नी को अपनी बड़ी बहन के पति यानी अपने जीजा के साथ कथित आपत्तिजनक स्थिति में देखा था. पति ने पत्नी पर दूसरे पुरुष के साथ अवैध संबंध रखने का आरोप लगाया और इसी आधार पर हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(i) के तहत व्यभिचार तथा धारा 13(1)(ia) के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की. पति के मुताबिक, घटना के बाद पत्नी अपने मायके चली गई और 30 मार्च 2013 को उसने वैवाहिक घर छोड़ दिया. बाद में पति ने तलाक की कार्रवाई शुरू की.

हाईकोर्ट ने क्यों नहीं माना व्यभिचार साबित?

हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को किसी व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखना और उसके साथ यौन संबंध होना एक ही बात नहीं है. कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोनों के बीच बड़ा अंतर है. अदालत ने ये भी गौर किया कि कथित घटना के बाद पति ने पत्नी या उस दूसरे व्यक्ति के खिलाफ पुलिस में कोई शिकायत या सनहा दर्ज नहीं कराया. यहां तक कि उसने अपने वैवाहिक रिश्तेदारों के समक्ष भी तत्काल शिकायत नहीं की. अदालत ने यह भी नोट किया कि पति के माता-पिता या अन्य रिश्तेदारों ने उसके आरोप की पुष्टि करने के लिए कोई ठोस समर्थन नहीं दिया.

‘सिर्फ शक से नहीं साबित होगा व्यभिचार’

हाईकोर्ट ने 1985 के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के Hargovind Soni v. Ramdulari फैसले का भी हवाला दिया. अदालत ने माना कि व्यभिचार की घटना का प्रत्यक्ष प्रमाण सामान्यतः आसानी से उपलब्ध नहीं होता, इसलिए परिस्थितिजन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं. लेकिन परिस्थितियों की ऐसी पूरी और विश्वसनीय कड़ी होनी चाहिए, जिससे आरोप स्थापित हो सके. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि महज संभावना या पति का अकेला बयान पर्याप्त नहीं है. उपलब्ध साक्ष्यों से पत्नी के किसी अन्य व्यक्ति के साथ यौन संबंध को साबित करना जरूरी था, जो इस मामले में पति नहीं कर सका.

पत्नी ने भी लगाया था गंभीर आरोप

मामले में पत्नी की ओर से भी पति पर गंभीर आरोप लगाए गए थे. उसने पति पर उसे जहर देकर नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था. अदालत ने ऐसे आरोपों को भी केवल आरोप के आधार पर स्वीकार नहीं किया और साक्ष्य के महत्व पर जोर दिया. यानी पति हो या पत्नी, सिर्फ आरोप लगा देने से कोई तथ्य कानूनी रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता.

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परिवार न्यायालय का फैसला बरकरार

मधुबनी परिवार न्यायालय ने 4 अप्रैल 2024 को पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी. परिवार न्यायालय ने गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद माना था कि पत्नी के खिलाफ व्यभिचार या क्रूरता पर्याप्त रूप से साबित नहीं हुई। हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और पति की अपील खारिज कर दी.

फैसले का असली मतलब क्या है?

इस फैसले का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि व्यभिचार तलाक का आधार नहीं हो सकता. हिंदू विवाह अधिनियम के तहत व्यभिचार तलाक का वैध आधार है. लेकिन अदालत ने साफ किया है कि सिर्फ शक, आरोप या किसी कथित आपत्तिजनक स्थिति को देखकर ही व्यभिचार साबित नहीं माना जा सकता. यानी, पत्नी को दूसरे पुरुष के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा कहना और पत्नी के उस व्यक्ति के साथ यौन संबंध थे यह साबित करना, कानून की नजर में एक ही बात नहीं है. इस अंतर को साबित करने के लिए विश्वसनीय साक्ष्यों की जरूरत होगी.

मोहित पंडित

मोहित पंडित

मोहित पंडित ने साल 2004 से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत की. नई बात, सन्मार्ग, सोनभद्र जैसे अखबारों में वे अपनी सेवा दे चुके हैं. वे सीमांचल के समाचारों को सकारात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं और स्थानीय घटनाओं को उच्च स्तर पर रिपोर्ट करने में निपुण हैं. उनकी लेखनी में संवेदनशीलता और नैतिकता झलकती है.

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