'जो भगवान को नहीं छोड़ सकता,वो किसी को क्या छोड़ेगा', नीशु आजाद के पड़ोसी ने खोल दी पत्थरबाजी वाले कांड की पोल
Published: Monday, September 7, 2026, 10:32 [IST]
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के शालीमार गार्डन इलाके में यूट्यूबर और कॉकरोच जनता पार्टी की कार्यकर्ता नीशु आजाद के घर कथित पथराव का मामला अब नया मोड़ ले रहा है। नीशु का आरोप है कि शनिवार (5 सितंबर) रात करीब 11 बजे कुछ लोगों ने उनके घर की तरफ पत्थर फेंके। उनका दावा है कि पत्थर बालकनी से होते हुए किचन तक पहुंचे। घटना के बाद परिवार घबरा गया।
नीशु ने इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और उनके समर्थकों पर शक जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किए और दिल्ली-गाजियाबाद पुलिस से अपने माता-पिता समेत परिवार की सुरक्षा की मांग की। हालांकि घटना को लेकर पुलिस जांच कर रही है और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही साफ होगी। इस बीच अब उसी सोसायटी में रहने वाले कुछ पड़ोसियों के बयान सामने आए हैं। इन बयानों ने मामले को लेकर अलग सवाल खड़े कर दिए हैं।
पड़ोसी ने कहा- हमारे घर तक आवाज जरूर आती
नीशु आजाद के पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने पथराव के दावे पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि नीशु का घर उनके फ्लैट से बिल्कुल सटा हुआ है। दोनों घरों के बीच की दूरी बेहद कम है। उन्होंने कहा, "नीशु हमारे बिल्कुल बगल वाले मकान में रहती हैं। उनकी किचन की दीवार हमारे घर से लगी हुई है।
अगर रात में वहां इतने पत्थर फेंके जाते तो आवाज हमारे घर में भी जरूर आती। इसलिए मुझे यह दावा सही नहीं लगता और यह पूरा मामला फर्जी खबर जैसा लग रहा है।" यह पड़ोसी का दावा है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच से होनी बाकी है।
सोसायटी के लोगों में नाराजगी क्यों?
पथराव के आरोप के बाद सोसायटी के कुछ दूसरे लोगों ने नीशु आजाद को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इस पूरे विवाद की वजह से वहां रहने वाले परिवार खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। एक महिला ने बेहद तीखे शब्दों में कहा, "हम चाहते हैं कि ऐसे लोगों को यहां से हटा दिया जाए और सोसायटी का माहौल फिर सामान्य हो। जो भगवान को भी नहीं छोड़ सकता, वह हम जैसे लोगों को कैसे छोड़ेगा?"
वहीं एक अन्य पड़ोसी ने दावा किया कि सोसायटी के ज्यादातर लोग नीशु के वहां रहने के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा,
"आप यहां किसी से भी पूछ लीजिए, ज्यादातर लोग यही चाहते हैं कि वह दूसरी जगह चली जाएं। हमारे बच्चे यहां पढ़ने के लिए आए हैं। हमें डर है कि इस तरह के विवादों का असर उनके भविष्य पर न पड़े। इसलिए हम चाहते हैं कि वह जल्द से जल्द यहां से चली जाएं और माहौल सुरक्षित रहे।"
इन बयानों से साफ है कि विवाद अब सिर्फ नीशु और उनके विरोधियों के बीच नहीं रह गया है। सोसायटी के भीतर भी इसे लेकर नाराजगी दिखाई दे रही है।
नीशु ने रात की घटना को लेकर क्या दावा किया?
नीशु आजाद के मुताबिक, शनिवार रात घर के बाहर कुछ लोगों की मौजूदगी और हलचल से परिवार को शक हुआ। उनका आरोप है कि नीचे कुछ लोग मौजूद थे और इसी दौरान घर की तरफ पत्थर फेंके गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में घर के अंदर और बालकनी में पड़े पत्थरों का जिक्र किया।
नीशु ने कहा कि वह अपने माता-पिता और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका सवाल था कि अगर पहले से मिल रही धमकियों के बीच परिवार के साथ कोई गंभीर घटना हो जाती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। मामले पर शालीमार गार्डन के एसीपी अतुल कुमार सिंह ने कहा है कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों और लगाए गए आरोपों की पड़ताल कर रही है।
नीशु और स्वतंत्र भारद्वाज का पुराना विवाद क्या है?
नीशु आजाद का नाम इससे पहले भी स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े विवाद में सामने आ चुका है। बताया जाता है कि विवाद की शुरुआत जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान हुई थी। बाद में मामला नीशु के पिता संजय आजाद और स्वतंत्र भारद्वाज के बीच विवाद तक पहुंच गया। नीशु ने आरोप लगाया था कि स्वतंत्र ने उनके पिता के साथ मारपीट की। उन्होंने कार्रवाई की मांग की थी और एससी-एसटी कानून के तहत मामला दर्ज करने की मांग भी उठाई थी।
इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने नीशु के समर्थन में बात की थी। इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से भी कार्रवाई की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया गया था। बाद में स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की बात सामने आई। हालांकि, इस पूरे विवाद में स्वतंत्र भारद्वाज की ओर से भी अलग दावे किए गए हैं।
अब असली सवाल पथराव का सच
नीशु आजाद के घर पथराव हुआ या नहीं, यह फिलहाल पुलिस जांच का विषय है। पड़ोसियों के बयान इस मामले में एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं, जबकि नीशु अपने घर में पत्थर मिलने और परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर आरोप लगा रही हैं।
ऐसे में सोशल मीडिया के दावों से आगे बढ़कर पुलिस जांच ही यह तय करेगी कि शनिवार रात वास्तव में क्या हुआ था। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि घर पर पत्थर फेंके गए थे तो किसने फेंके और अगर नहीं फेंके गए तो घर तक पत्थर पहुंचे कैसे?