ईडी कार्रवाई:फर्जी शादी घोटाला - पूर्व मंत्री भार्गव का रिश्तेदार गिरफ्तार
भोपाल/विदिशा19 मिनट पहले
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विदिशा के सिरोंज में 5,923 संदिग्ध विवाह दिखाकर 30.18 करोड़ रुपए की सहायता बांटने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ शोभित त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है। भोपाल की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें 9 सितंबर तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया है।
ईडी अब घोटाले की रकम के लेन-देन और उससे जुड़ी संपत्तियों की जांच कर रही है। बता दें कि शोभित भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के रिश्तेदार हैं।
विवाह सहायता योजना में फर्जीवाड़े के लिए बाकायदा नेटवर्क खड़ा किया गया था। आरोप है कि त्रिपाठी ने सरकारी पोर्टल की अपनी लॉगइन आईडी और पासवर्ड दलालों व कंप्यूटर ऑपरेटरों को दे रखे थे। नेटवर्क में फेरी लगाकर कपड़े बेचने वाले, टेलर, एनजीओ से जुड़े लोग और निजी बैंकों के कियोस्क ऑपरेटर तक शामिल थे। सरपंच-सचिव की नकली सील के जरिए दस्तावेज तैयार कर आवेदन पोर्टल पर चढ़ाए जाते थे।
ईडी के मुताबिक, 2019 से 2021 के बीच सिरोंज जनपद में 5,923 संदिग्ध विवाह दर्ज कर नियमों के खिलाफ प्रति हितग्राही ₹51 हजार के हिसाब से ₹30.18 करोड़ का भुगतान किया गया। घोटाला सामने आने के बाद कई दस्तावेज गायब कर दिए गए। ईडी ने भोपाल ईओडब्ल्यू की एफआईआर पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
ईओडब्ल्यू ने त्रिपाठी, ऑपरेटर हेमंत साहू और योगेंद्र शर्मा के खिलाफ केस दर्ज किया था। अक्टूबर 2025 में ईडी ने दोनों ऑपरेटरों के यहां जांच की थी। मामला सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा ने विधानसभा में उठाया था।
तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने जांच के आदेश दिए और तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर त्रिपाठी निलंबित हुए। ईओडब्ल्यू त्रिपाठी को गिरफ्तार कर चुकी है और वे करीब डेढ़ साल जेल में रहे। दोनों ऑपरेटर भी जेल गए थे। जेल से बाहर आने के बाद त्रिपाठी को जिला पंचायत हरदा में अटैच किया गया।
ऐसी अनोखी शादियां... न बैंड, न बारात न दूल्हा-दुल्हन
- 5,923 फर्जी शादियां दिखाकर 30.18 करोड़ रु. बांटे
- टेलर, कियोस्क ऑपरेटर व फेरीवाले तक नेटवर्क में
फर्जीवाड़े के ये 5 तरीके
1. अपात्र के दस्तावेज लगाकर आवेदन अपात्र व्यक्ति के दस्तावेज लगाकर आवेदन किया जाता था। 51 हजार रु. उसके खाते में आने के बाद पहले से तय रकम हितग्राही रखता और बाकी दलाल को देता था। आरोप है कि इसमें से हिस्सा सीईओ तक पहुंचता था।
2. एक परिवार में कई लोगों के नाम से फाइल हितग्राही के परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम पर भी फाइल तैयार कर पोर्टल पर दर्ज की जाती थी। आवेदन में अपने किसी व्यक्ति का बैंक खाता देकर राशि निकाल ली जाती थी।
3. खाता हितग्राही का, एटीएम-पासबुक दलाल की हितग्राहियों के दस्तावेज लेकर फिनो बैंक में खाते खुलवाए जाते थे। एटीएम और पासबुक दलाल अपने पास रखते। पैसा आने पर हितग्राही को 10 से 15 हजार रु. देकर बाकी रख लेते थे।
4. शादी वर्षों पहले हो चुकी, फिर भी नया आवेदन गांवों से ऐसी महिलाओं के दस्तावेज जुटाए जाते थे, जिनकी शादी वर्षों पहले हो चुकी थी। नकली सील और हस्ताक्षर से उनके नाम पर आवेदन तैयार कर सहायता राशि निकाली जाती थी।
5. आवेदन तक नहीं किया, फिर भी 51 हजार जारी जांच में ऐसे लोग भी सामने आए, जिन्होंने विवाह सहायता के लिए कभी आवेदन नहीं किया था। इसके बावजूद रिकॉर्ड में उनके नाम से सहायता राशि जारी कर दी गई।
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