बेरला में सम्मान समारोह : डॉ. हिमांशु द्विवेदी बोले- शिक्षक ही गढ़ते हैं भविष्य, गैर शिक्षकीय कार्यों में लगाए जाने से प्रभावित हो रही भूमिका
बेमेतरा के बेरला में जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित हुआ। डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने शिक्षा और गुरु के महत्व पर विचार रखे, 81 शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
हरिभूमि- INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी
- Published: 05 Sep 2026, 04:48 PM IST
- Last Updated: 05 Sep 2026, 04:56 PM IST
सूरज सिन्हा- बेमेतरा। शिक्षक दिवस के अवसर पर बेमेतरा जिले के बेरला में जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के दौरान जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले 81 शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम में जिलेभर से शिक्षक, शिक्षाविद और प्रतिभावान छात्र-छात्राएं शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हरिभूमि- INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी मौजूद रहे, जबकि शिक्षाविद डॉ. जवाहर शूरी शेट्ठी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन संयोजक अवधेश चंदेल द्वारा किया गया।
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शिक्षक को केवल नौकरी नहीं, जिम्मेदारी के रूप में देखें : डॉ. हिमांशु द्विवेदी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु को भगवान से भी अधिक सम्मान देने की परंपरा रही है। शिक्षक हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन समय के साथ शिक्षक की सामाजिक भूमिका और सम्मान में कमी आई है। उन्होंने कहा कि शिक्षक को केवल जीविका का साधन मानना बड़ी भूल है।
उन्होंने जनगणना, पोलियो अभियान और राजनीतिक कार्यक्रमों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में कई ऐसे कार्य हैं, जिनके लिए शिक्षकों को लगाया जाता है। इससे शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक की मूल भूमिका प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि समाज को इस तरह की विसंगतियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
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चाणक्य और आचार्यों के योगदान को बताया महत्वपूर्ण
डॉ. श्री द्विवेदी ने कहा कि इतिहास में चंद्रगुप्त और छत्रपति शिवाजी जैसे महान व्यक्तित्वों के निर्माण के पीछे उनके गुरुओं और आचार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी तरह यदि हम अपने बच्चों को स्वामी विवेकानंद जैसे व्यक्तित्व के रूप में विकसित होते देखना चाहते हैं, तो शिक्षा और शिक्षक के महत्व को समझना होगा। उन्होंने गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था में गुरु और शिष्य के संबंध को विशेष स्थान प्राप्त था। रामायण और महाभारत जैसे उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने शिक्षा के महत्व और व्यक्ति के निर्माण में गुरु की भूमिका पर प्रकाश डाला।
शिक्षकों और विद्यार्थियों के सम्मान से बढ़ेगा मनोबल
समारोह में शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने के साथ ही प्रतिभावान विद्यार्थियों का भी उत्साहवर्धन किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के साथ समाज में शिक्षा के महत्व को भी मजबूत करते हैं।
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