September 3, 2026

अमेठी क्यों है उत्तर प्रदेश की अहम राजनीतिक जमीन? जानें इसका इतिहास

UP Elections 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अमेठी का नाम सिर्फ एक जिले के तौर पर नहीं, बल्कि दशकों से राष्ट्रीय राजनीति के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में लिया जाता है. कांग्रेस के लंबे राजनीतिक प्रभाव, गांधी परिवार से जुड़े चुनावी इतिहास और बाद के वर्षों में भाजपा के बढ़ते प्रभाव ने अमेठी को खास बना दिया है.

वर्तमान में अमेठी जिले में चार विधानसभा क्षेत्र हैं 178 तिलोई, 184 जगदीशपुर (एससी), 185 गौरीगंज और 186 अमेठी. जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट भी इन्हीं चार सीटों को अमेठी जिले की विधानसभा सीटों के रूप में सूचीबद्ध करती है.

अमेठी जिले का प्रशासनिक इतिहास

अमेठी उत्तर प्रदेश का 72वां जिला है, जिसका गठन 1 जुलाई 2010 को हुआ. इसमें तत्कालीन सुल्तानपुर जिले की अमेठी, गौरीगंज और मुसाफिरखाना तहसीलों तथा रायबरेली जिले की तिलोई तहसील को शामिल किया गया था.

यही वजह है कि जनगणना के आंकड़ों को समझते समय सावधानी जरूरी है. 2011 Census के समय अमेठी अलग जिला नहीं था. बाद में वर्तमान अमेठी जिले में शामिल चार तहसीलों के आंकड़ों को जोड़कर 2011 की जनसांख्यिकीय तस्वीर तैयार की जाती है.

अमेठी की आबादी: पुरुष और महिला कितने?

2011 Census के तहत वर्तमान अमेठी जिले में शामिल चार तहसीलों की कुल आबादी 20,50,133 बैठती है. इनमें अमेठी तहसील की आबादी 4,47,330, गौरीगंज की 3,90,935, मुसाफिरखाना की 7,09,816 और तिलोई की 5,02,052 थी.

इन आंकड़ों को जोड़ने पर पुरुष आबादी करीब 10,37,293 और महिला आबादी 10,12,840 आती है. इस आधार पर लिंगानुपात लगभग 976 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष बैठता है.

हालांकि, अमेठी जिला प्रशासन के मौजूदा पोर्टल पर Census-2011 के तहत आबादी 18,67,678, पुरुष 9,45,235 और महिला 9,22,443 दिखाई गई है. इसलिए प्रकाशित सामग्री में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अलग स्रोतों में प्रशासनिक सीमा/डेटा-प्रस्तुति के कारण आंकड़ों में अंतर है.

अमेठी की साक्षरता दर और महिला-पुरुष अंतर

वर्तमान जिला-सीमा को लेकर उपलब्ध संकलित Census आंकड़ों में अमेठी की कुल साक्षरता दर लगभग 59.14 प्रतिशत बताई जाती है. जिले का लिंगानुपात 976 है.

अलग-अलग तहसीलों के Census आंकड़े बताते हैं कि शिक्षा के मामले में पुरुषों और महिलाओं के बीच बड़ा अंतर रहा है. उदाहरण के लिए अमेठी तहसील की साक्षरता दर 62.27 प्रतिशत, पुरुष साक्षरता 71.83 प्रतिशत और महिला साक्षरता 52.70 प्रतिशत थी. गौरीगंज में ये आंकड़े क्रमशः 54.81, 64.05 और 45.44 प्रतिशत रहे. मुसाफिरखाना में कुल साक्षरता 52.77, पुरुष 61.59 और महिला 43.71 प्रतिशत थी. तिलोई में कुल साक्षरता 59.96, पुरुष 71.28 और महिला 48.07 प्रतिशत दर्ज की गई.

अमेठी की धार्मिक आबादी

वर्तमान अमेठी जिले में शामिल चार तहसीलों के Census 2011 धार्मिक आंकड़ों को जोड़ने पर हिंदू आबादी लगभग 79.26 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 20.06 प्रतिशत बनती है. अन्य धार्मिक समुदायों और धर्म नहीं बताने वाली आबादी का हिस्सा लगभग 0.68 प्रतिशत है.

1. तिलोई विधानसभा सीट का इतिहास

178-तिलोई अमेठी जिले की सामान्य विधानसभा सीट है. 2022 में भाजपा के मयंकेश्वर शरण सिंह ने 99,472 वोट हासिल कर सपा के मोहम्मद नईम को 27,829 मतों से हराया. उन्हें 48.54 प्रतिशत वोट मिले.

तिलोई का चुनावी इतिहास काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है. 2017 में भी मयंकेश्वर शरण सिंह भाजपा के टिकट पर जीते. 2012 में कांग्रेस के डॉ. मोहम्मद मुस्लिम विजयी रहे, जबकि 2007 में मयंकेश्वर शरण सिंह ने सपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी. 2002 में वह भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर विजयी रहे थे. 1996 में सपा के मुस्लिम और 1993 में भाजपा के मयंकेश्वर शरण सिंह विजेता रहे.

उत्तर प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक मयंकेश्वर शरण सिंह तिलोई से चार बार विधायक रह चुके हैं.

2. जगदीशपुर विधानसभा सीट: अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित

184-जगदीशपुर (एससी) अमेठी जिले की आरक्षित विधानसभा सीट है. 2022 में भाजपा के सुरेश कुमार ने 89,315 वोट पाकर कांग्रेस के विजय कुमार को 22,824 वोटों से हराया.

इस सीट का इतिहास कांग्रेस के मजबूत प्रभाव के लिए जाना जाता है. 1974, 1980, 1985, 1989, 1991, 2002 और 2007 में कांग्रेस के राम सेवक धोबी यहां विधायक रहे. 1977 में जनता पार्टी, 1993 में सपा और 1996 में भाजपा ने जीत हासिल की. 2012 में कांग्रेस के राधेश्याम ने सीट जीती, जबकि 2017 और 2022 में भाजपा के सुरेश कुमार विजयी रहे.

3. गौरीगंज विधानसभा सीट

185-गौरीगंज अमेठी जिले की सबसे दिलचस्प मुकाबले वाली सीटों में शामिल है. 2022 में सपा के राकेश प्रताप सिंह ने 79,040 वोट हासिल कर भाजपा के चंद्रप्रकाश मिश्रा मटियारी को 6,963 वोटों से हराया.

राकेश प्रताप सिंह ने 2012 में भी सपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी और 2017 में भी उन्होंने सीट बरकरार रखी. इससे पहले 2007 में बसपा के चंद्रप्रकाश, 2002 में कांग्रेस के नूर मोहम्मद और 1996 में भाजपा के तेज भान सिंह विजयी रहे थे. 1993 और 1991 में भी भाजपा ने यहां जीत हासिल की थी.

4. अमेठी विधानसभा सीट

186-अमेठी नाम के कारण यह सीट अक्सर पूरे जिले की राजनीतिक पहचान बन जाती है. 2022 में सपा की महाराजी प्रजापति ने भाजपा के संजय सिंह को 18,096 वोटों से हराया. उन्हें 88,217 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 70,121 वोट प्राप्त हुए.

2017 में भाजपा की गरिमा सिंह ने यहां जीत हासिल की थी. 2012 में सपा के गायत्री प्रसाद, 2007 में कांग्रेस की अमिता सिंह और 2002 में भाजपा की अमिता सिंह विजयी रही थीं. 1996 में कांग्रेस के राम हर्ष सिंह तथा 1993 में भाजपा के जमुना मिश्रा ने जीत दर्ज की थी.

अमेठी की चार सीटों में कैसी रही 2022 की तस्वीर?

2022 के विधानसभा चुनाव में अमेठी जिले की चार सीटों में भाजपा ने दो सीटें तिलोई और जगदीशपुर जीतीं, जबकि सपा ने गौरीगंज और अमेठी पर कब्जा किया. यानी जिले की चारों सीटों का मुकाबला दो-दो पर बंटा रहा.

यह परिणाम अमेठी की राजनीति में बदलते चुनावी समीकरण की ओर संकेत करता है. जहां तिलोई और जगदीशपुर में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया, वहीं गौरीगंज और अमेठी में सपा ने अपनी पकड़ साबित की.

2026 के चुनावी नजरिए से क्यों महत्वपूर्ण है अमेठी?

उत्तर प्रदेश की अगली विधानसभा राजनीति में अमेठी की चार सीटों पर नजर इसलिए रहेगी क्योंकि यहां लंबे समय से कांग्रेस, भाजपा, सपा और बसपा के बीच अलग-अलग दौर में मुकाबला देखने को मिला है. तिलोई में भाजपा का मजबूत प्रदर्शन, जगदीशपुर में लगातार दो जीत और गौरीगंज-अमेठी में सपा की पकड़ जिले के मौजूदा राजनीतिक संतुलन को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.

हालांकि, 2026 विधानसभा चुनाव का परिणाम या नया चुनावी जनादेश अभी उपलब्ध नहीं है, इसलिए मौजूदा राजनीतिक विश्लेषण का आधार 2022 विधानसभा चुनाव और उसके बाद उपलब्ध आधिकारिक चुनावी आंकड़े ही होने चाहिए.

डिस्क्लेमर: स्रोत और आंकड़ों को लेकर जरूरी नोट: इस लेख में विधानसभा सीटों की संख्या और नंबर के लिए अमेठी जिला प्रशासन के आधिकारिक पोर्टल को प्राथमिक स्रोत माना गया है. जनसंख्या और धर्म संबंधी आंकड़ों में Census 2011 की मूल प्रशासनिक सीमाओं को ध्यान में रखा गया है. चूंकि अमेठी जिला 2010 में बना और 2011 Census में पुराने जिलों के अंतर्गत संबंधित तहसीलें दर्ज थीं, इसलिए अलग-अलग सरकारी/संकलित स्रोतों में कुल आबादी को लेकर अंतर दिखाई देता है. इसे बिना स्पष्टीकरण के एक ही आंकड़ा बताना भ्रामक हो सकता है.