मुस्लिम लड़कियों की पढ़ाई से वक्फ फंड तक: क्या विजय सरकार भी ‘फ्रीबी मॉडल’ में फंस रही? तमिलनाडु पर कितना बोझ?
Published: Tuesday, September 1, 2026, 18:38 [IST]
तमिलनाडु में इस साल हुए विधानसभा चुनाव में एक बड़ा उलटफेर हुआ। अभिनेता से नेता बने विजय यानी थलपति विजय की पार्टी TVK ने सत्ताधारी DMK को हरा दिया। चुनाव से पहले विजय ने वादा किया था कि उनकी सरकार बाकी पार्टियों से अलग होगी। लेकिन सत्ता में आए सिर्फ चार महीने हुए हैं, और सरकार का रुख कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है।
हाल में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने मुस्लिम छात्राओं की स्नातक पढ़ाई की पूरी फीस उठाने, वक्फ छात्रवृत्ति बढ़ाने, चेन्नई में अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए नया कॉलेज खोलने और वक्फ व ईसाई धार्मिक संपत्तियों पर कमाई वाली परियोजनाओं के लिए ब्याज मुक्त कर्ज देने का ऐलान किया। इसके साथ ही मुफ्त गैस सिलेंडर और महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा जैसी योजनाएं भी सामने आई हैं। सवाल यही है कि क्या यह सामाजिक कल्याण है या ऐसी मुफ्त योजनाओं का रास्ता, जिसका बोझ आगे चलकर राज्य के खजाने और आने वाली पीढ़ियों को उठाना पड़ेगा?
मुस्लिम लड़कियों की फ्री पढ़ाई से लेकर वक्फ फंड तक, समझिए पूरा मामला
27 अगस्त को तमिलनाडु के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ए एम शाहजहां ने ऐलान किया कि सरकारी कोटे से एडमिशन लेने वाली हर मुस्लिम लड़की की अंडर-ग्रेजुएट पढ़ाई की पूरी फीस अब राज्य सरकार भरेगी। यह स्कीम सरकारी, सरकारी-सहायता प्राप्त और सेल्फ-फाइनेंस कॉलेजों में लागू होगी। इसके लिए शुरुआत में 20 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
इतना ही नहीं, तमिलनाडु वक्फ बोर्ड की स्कॉलरशिप स्कीम को भी बढ़ाया गया है। पहले यह क्लास 1 से 8 तक की मुस्लिम लड़कियों को मिलती थी, अब क्लास 9 और 10 की लड़कियों को भी हर साल 2000 रुपये मिलेंगे। सरकार का कहना है कि इससे 41,384 मुस्लिम स्कूली लड़कियों को फायदा होगा, और इस पर कुल 8.28 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
मंत्री शाहजहां ने यह भी बताया कि चेन्नई में एक नया 'माइनॉरिटीज़ वुमेन्स आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज' बनेगा, जिसके लिए 2.45 करोड़ रुपये की शुरुआती ग्रांट दी जाएगी। उन्होंने कहा,
"राजधानी में उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए वक्फ बोर्ड नया कॉलेज खोलेगा। साथ ही राज्य सरकार 100 करोड़ रुपये का एक रिवॉल्विंग फंड बनाएगी, जिससे मुस्लिम वक्फ और ईसाई धार्मिक संपत्तियों पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और मैरिज हॉल जैसी कमाई वाली संपत्तियां बनाने के लिए बिना ब्याज के लोन दिया जाएगा।"
यहां से राजनीतिक सवाल शुरू होता है। सरकार का तर्क शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने का है। लेकिन आलोचक पूछ रहे हैं कि ऐसी मदद को सिर्फ धर्म के आधार पर देने के बजाय परिवार की आर्थिक स्थिति को आधार क्यों न बनाया जाए।
वक्फ बोर्ड को 100 करोड़ का फंड और नया हेडक्वार्टर भी
सिर्फ स्कॉलरशिप ही नहीं, वक्फ बोर्ड के लिए नया हेडक्वार्टर भी बनेगा, जिसकी लागत करीब 40 करोड़ रुपये आंकी गई है। साथ ही वक्फ बोर्ड को मिलने वाला सालाना प्रशासनिक अनुदान भी बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किया जा रहा है।
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने ₹100 करोड़ का रिवॉल्विंग फंड बनाने की भी घोषणा की है। इससे मुस्लिम वक्फ और ईसाई धार्मिक संपत्तियों पर आय पैदा करने वाली परियोजनाओं के लिए ब्याज मुक्त कर्ज देने की योजना है।
इन पैसों का इस्तेमाल व्यावसायिक परिसरों, विवाह भवन जैसी कमाई वाली संपत्तियां विकसित करने में किया जा सकता है। इसके अलावा चेन्नई में वक्फ बोर्ड के जरिए अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए कला और विज्ञान कॉलेज खोलने की योजना है। इसके लिए शुरुआती ₹2.45 करोड़ की राशि बताई गई है। यानी सरकार की अल्पसंख्यक नीति सिर्फ छात्रवृत्ति तक सीमित नहीं है। इसमें शिक्षा, संस्थान और संपत्ति विकास तक का पूरा पैकेज दिखाई देता है।
हर नवजात बच्चे को सोने की अंगूठी, सरकारी खजाने पर नया बोझ
TVK के चुनावी घोषणापत्र में सबसे महंगा वादा था सरकारी अस्पतालों में जन्मे बच्चों को 8 ग्राम यानी एक सोवरेन सोना देना। सरकार बनते ही विजय ने 'थाईमन थंगा मोथिरम' स्कीम शुरू की, जिसमें राज्य में सरकारी अस्पताल में पैदा होने वाले बच्चों को 1 ग्राम की 22 कैरेट सोने की अंगूठी दी जाएगी। इस पर हर साल 756 करोड़ रुपये खर्च होंगे, यानी करीब 4.42 लाख अंगूठियां बांटी जाएंगी। यह स्कीम 22 जून 2026 से लागू मानी जाएगी, यानी खुद CM विजय के जन्मदिन से, और इसे औपचारिक रूप से 15 सितंबर को लॉन्च किया जाएगा।
सवाल यह है कि सिर्फ मुस्लिम लड़कियों को ही यह फायदा क्यों?
अब लोग पूछ रहे हैं कि क्या पढ़ाई के लिए पैसों की जरूरत सिर्फ मुस्लिम लड़कियों को ही होती है? क्या राज्य की हिंदू बेटियों के परिवार इतने संपन्न हैं कि उन्हें सरकारी मदद की जरूरत ही नहीं?
सरकार ने सभी गरीब लड़कियों के लिए फीस माफी की स्कीम बनाने की बजाय सिर्फ एक धर्म को क्यों चुना, यह सवाल भी उठ रहा है। कई लोगों का मानना है कि इस तरह की धर्म आधारित स्कीमें एक तरह से यह संदेश देती हैं कि किसी खास मजहब को मानने पर ही राज्य से ज्यादा फायदा मिलेगा। जबकि राज्य के खजाने में हिंदू टैक्सपेयर्स और मंदिरों का भी बड़ा योगदान होता है।
यहां एक बात साफ समझना जरूरी है। किसी कमजोर वर्ग को सरकारी मदद देना अपने आप में गलत नहीं है। सवाल यह है कि लाभार्थी तय करने का आधार क्या हो और सरकार के पास लंबे समय तक इन योजनाओं को चलाने की वित्तीय क्षमता कितनी है।
तमिलनाडु की अपनी वित्तीय रिपोर्ट इस बहस को और गंभीर बना देती है। जून 2026 में जारी राज्य के वित्तीय श्वेतपत्र के मुताबिक, राज्य की कुल देनदारियां करीब ₹13.18 लाख करोड़ तक पहुंच गई हैं। इसमें राज्य का प्रत्यक्ष कर्ज और सार्वजनिक उपक्रमों की देनदारियां शामिल हैं। प्रत्यक्ष सरकारी कर्ज करीब ₹10 लाख करोड़ बताया गया है।
राजस्व घाटा भी ₹78,324 करोड़ तक पहुंच चुका है। वहीं 2025-26 में ब्याज भुगतान करीब ₹67,050 करोड़ रहा। इसका मतलब है कि सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा पहले से ही पुराने कर्ज और ब्याज की तरफ जा रहा है।
चेन्नई का दूसरा एयरपोर्ट अटका, विकास पर सीधा असर
एक तरफ फ्री स्कीमों की बरसात हो रही है, दूसरी तरफ विजय सरकार ने पारांदुर में बनने वाला ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट रद्द कर दिया, जबकि उसके लिए जमीन अधिग्रहण का काम भी शुरू हो चुका था। यह फैसला विरोध कर रहे किसानों से किए गए वादे को पूरा करने के लिए लिया गया। लेकिन चेन्नई एयरपोर्ट पर हर साल करीब 3 करोड़ यात्री आते हैं, और आने वाले सालों में यह क्षमता पूरी तरह भर जाएगी। रियल एस्टेट डेवलपर्स की संस्था CREDAI ने भी कहा है कि इस फैसले से चेन्नई को बड़े निवेश और उद्योगों के हाथ से निकलने का खतरा है, क्योंकि नई जगह ढूंढना, जांच-पड़ताल और मंजूरी लेने में सालों लग जाएंगे।
बिजली बोर्ड पर 2.47 लाख करोड़ का कर्ज़, फिर भी टैरिफ नहीं बढ़ेगा
जून 2025 में जारी हुए एक व्हाइट पेपर में बिजली मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने खुद माना कि तमिलनाडु के पावर सेक्टर पर 2.47 लाख करोड़ रुपये का कर्ज़ है, जो राज्य के कुल पब्लिक सेक्टर कर्ज़ का 77.6% हिस्सा है। तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन को हर महीने भारी नकदी की कमी झेलनी पड़ रही है, जिससे सालाना करीब 30,000 करोड़ रुपये का गैप बन रहा है। इसके बावजूद सरकार ने कहा है कि बिजली के दाम नहीं बढ़ेंगे और किसानों को मुफ्त बिजली जारी रहेगी।
फ्री सिलेंडर, फ्री बस यात्रा: फ्रीबीज की लिस्ट लंबी होती जा रही है
अगस्त 2026 के आखिर में CM विजय ने 'अन्नपूर्णी सुपर सिक्स' स्कीम के तहत 2.5 लाख रुपये सालाना आय से कम वाले परिवारों को साल में तीन मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने का ऐलान किया। इससे करीब सवा करोड़ परिवारों को फायदा होगा, लेकिन इस पर हर साल 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे। साथ ही ट्रांसजेंडर लोगों के लिए मुफ्त बस यात्रा और महिलाओं के लिए 'वेत्री पयाना थिट्टम' स्कीम का दायरा भी बढ़ा दिया गया है, अब महिलाएं एक्सप्रेस, LSS और डीलक्स बसों में भी मुफ्त सफर कर सकेंगी।
राज्य पर 13.18 लाख करोड़ का कर्ज़, फिर भी मुफ्त योजनाओं की बहार
इसी साल जून में सरकार ने खुद एक व्हाइट पेपर जारी करके बताया कि तमिलनाडु पर कुल 13.18 लाख करोड़ रुपये का कर्ज़ है। इसमें से 10 लाख करोड़ सीधे राज्य का कर्ज़ है और बाकी 3.18 लाख करोड़ पब्लिक सेक्टर कंपनियों की देनदारी है। हर नागरिक के सिर पर औसतन 1.29 लाख रुपये का कर्ज़ है। राजस्व घाटा भी रिकॉर्ड 78,324 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो GSDP का करीब 2.2% है। सालाना ब्याज ही 67,050 करोड़ रुपये से ज्यादा है, जो राज्य के कुल पूंजीगत खर्च से भी ज्यादा है।
तमिलनाडु का राजस्व घाटा पहले से ही सैलरी, पेंशन और ब्याज चुकाने में उलझा हुआ है। ऐसे में सोने की अंगूठी हो या धार्मिक अल्पसंख्यक स्कीमें, हर नई घोषणा राज्य पर बोझ बढ़ा रही है। भले ही सरकार इसे चुनावी वादे पूरे करने की मजबूरी बताए, लेकिन आज की मुफ्त सौगातें कल राज्य की आने वाली पीढ़ियों के लिए भारी कर्ज़ बनकर सामने आ सकती हैं।