इन दिनों इंडिया में एथेनॉल को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है. लेकिन सरकार ने सभी पेट्रोल पंपों पर E20 अनिवार्य कर दिया है. जिसके चलते जो लोग एथेनॉल अपनी गाड़ी में नहीं भराना चाहते हैं उन्हें भी मजबूरन भरवाना पड़ रहा है. ग्राहकों की परेशानी को देखते हुए और साथ ही गाड़ियों के फ्यूल इंजेक्टर और इंजन में आ रही खराबी की बढ़ती शिकायतों के बाद सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है. क्योंकि, ई20 पेट्रोल में पानी और क्लोराइड की मिलावट की खबरों के बाद एक बड़ा राष्ट्रव्यापी चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है.
आपको बता दें कि, इस स्पेशल क्वालिटी-कंट्रोल ड्राइव के तहत मानकों पर खरे न उतरने वाले और लापरवाही बरतने वाले देश भर के 2,500 से अधिक पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की बिक्री तुरंत प्रभाव से रोक दी गई है. जांच एजेंसियों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने साफ कर दिया है कि जब तक ईंधन की शुद्धता पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाती तब तक इन पंपों से तेल नहीं बेचा जाएगा. चलिए विस्तार से पुरे खबर के बारें में जानतें हैं.
हजारों पंपों पर गिरी गाज
बता दें कि, पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियों द्वारा चलाई जा रही इस चेकिंग ड्राइव में सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों बड़ी कंपनियों के पंप लपेटे में आए हैं. आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा गाज इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के करीब 1,257 पेट्रोल पंपों पर गिरी है जहां बिक्री बंद कर दी गईं हैं.
वहीं, इसके अलावा हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 915 और भारत पेट्रोलियम के 401 रिटेल आउटलेट्स पर भी सख्त कार्रवाई करते हुए बिक्री रोक दी गई है. सरकार की इस कार्रवाई से साफ है कि पेट्रोल की क्वालिटी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

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क्यों करनी पड़ी कार्रवाई?
आपको बता दें कि, यह पूरा विवाद तब सामने आया जब देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों और उनकी एसोसिएशन ने गाड़ियों के फ्यूल सिस्टम में आ रही खराबी पर चिंता जताई. जांच में पता चला कि कुछ जगहों पर पेट्रोल में क्लोराइड और नमी की मात्रा तय सीमा से काफी ज्यादा थी.
वहीं, मानसून के मौसम में जमीन के नीचे बने पेट्रोल स्टोरेज टैंकों में पानी रिसने की समस्या भी सामने आ रही थी. पानी और केमिकल की यह अशुद्धि गाड़ियों के महंगे फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पंप और इंजन पार्ट्स को तेजी से खराब कर रही थी जिससे गाड़ी मालिकों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा था. इस लिए सरकार को इतने बड़े लेवल पर यह कार्रवाई करनी पड़ी है.
कई बार होगी जांच
अब मिलावट और पानी घुसने की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए पेट्रोल पंपों पर नियम बेहद कड़े कर दिए गए हैं. देश के लगभग 89,000 पेट्रोल पंपों पर जमीन के नीचे बने स्टोरेज टैंकों की वाटर-इन्ग्रेश टेस्ट दिन में 8 से 12 बार करना अनिवार्य कर दिया गया है.
जबकि करीब 85,000 से ज्यादा पंपों पर ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं जो तुरंत नमी का पता लगा लेते हैं. अगर किसी पंप के टैंक में जरा सी भी अशुद्धि या खराबी पाई जाती है तो सिस्टम खुद ही सप्लाई को होल्ड पर डाल देता है ताकि खराब तेल गाड़ियों तक न पहुंचे. इससे आपकी गाड़ी भी सुरक्षित रहेगी.

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ऑटो कंपनियों को मिली राहत
बता दें कि, पेट्रोल में खराबी के चलते देश की बड़ी कार निर्माता कंपनियां जैसे मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा लगातार परेशान थीं. ग्राहकों की तरफ से वारंटी क्लेम और इंजन खराब होने की शिकायतें तेजी से बढ़ रही थीं जिसके बाद कंपनियों ने सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी.
अब सरकार के इस बड़े एक्शन और डिपो से लेकर पंप तक चल रही कड़ी निगरानी से वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है. अगर आपकी गाड़ी भी अचानक झटका ले रही है या माइलेज अचानक गिर गया है तो सतर्क रहें और हमेशा भरोसेमंद व चालू पेट्रोल पंप से ही तेल भरवाएं.
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