August 29, 2026

चोरी के मोबाइल को अब चुटकियों में कैसे खोज रही पुलिस?

चोरी के मोबाइल को अब चुटकियों में कैसे खोज रही पुलिस?

कैसे मिल रहे हैं जल्दी स्मार्टफोन्स

मोबाइल चोरी होने पर सबसे पहला डर यही सताता है कि फोन वापस मिलेगा या नहीं और साथ में यह चिंता भी कि कहीं उसमें मौजूद बैंकिंग ऐप्स, तस्वीरों और निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल न हो जाए, लेकिन अब यह डर पहले जितना गहरा नहीं रहा. दूरसंचार विभाग की पहल ‘संचार साथी’ और CEIR (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर) सिस्टम ने पुलिस के हाथ में एक ऐसा डिजिटल टूल दे दिया है, जिससे चोरी या गुम हुए फोन को ट्रेस करना अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान और तेज हो गया है. सरकार के आंकड़े बताते हैं कि इस पहल ने पहली बार एक ही महीने में देशभर से 75 हजार से ज्यादा गुम या चोरी हुए हैंडसेट बरामद कराने में मदद की है और अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच मासिक रिकवरी रेट में 201 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है.

संचार साथी और CEIR आखिर काम कैसे करते हैं?

जब भी कोई व्यक्ति अपना मोबाइल गुम कर देता है या उसकी चोरी हो जाती है, तो वह संचार साथी पोर्टल के जरिए इसकी शिकायत दर्ज करा सकता है. शिकायत दर्ज होते ही CEIR सिस्टम उस हैंडसेट को देशभर के सभी टेलीकॉम नेटवर्क पर तुरंत ब्लॉक कर देता है. इसका मतलब है कि चोरी करने वाला व्यक्ति चाहे उस फोन में कोई भी नया सिम कार्ड डाल ले वह फोन किसी भी नेटवर्क पर काम नहीं करेगा. यही वह पहला और सबसे बड़ा कदम है, जो चोरी हुए मोबाइल के गलत इस्तेमाल को रोकता है और उसे बेकार बना देता है. इससे मोबाइल चोरी की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद भी है.

Mobile Handset

नया सिम डालते ही चल जाता है पता, पुलिस तक पहुंचती है पूरी जानकारी

असली कमाल यहीं से शुरू होता है. अगर कोई व्यक्ति ब्लॉक हो चुके फोन में नया सिम डालकर उसे चालू करने की कोशिश करता है, तो सिस्टम इस एक्टिविटी को तुरंत ट्रैक कर लेता है. नए सिम की जानकारी और वैकल्पिक मोबाइल नंबर सीधे संबंधित पुलिस थाने तक पहुंचा दी जाती है, जिससे जांच अधिकारियों के लिए फोन की लोकेशन और उसके इस्तेमाल का पता लगाना आसान हो जाता है. इसी जानकारी के आधार पर पुलिस टीमें छापेमारी करती हैं और फोन को उसके असली मालिक तक वापस पहुंचाती हैं. दिलचस्प बात यह है कि यह जानकारी सिर्फ पुलिस तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जिस नागरिक का फोन चोरी हुआ है, उसे भी SMS, ईमेल और संचार साथी पोर्टल या ऐप के जरिए ट्रेसिबिलिटी अपडेट भेजे जाते हैं. यानी शिकायतकर्ता को भी पता चलता रहता है कि उसके फोन को लेकर क्या प्रोग्रेस हो रही है. इससे पूरी प्रोसेस ज्यादा पारदर्शी बनती है और लोगों का सिस्टम पर भरोसा भी बढ़ता है.

हाल में इस प्रोसेस को और बेहतर बनाने के लिए कुछ नए बदलाव भी जोड़े गए हैं. अब ट्रेसिबिलिटी रिपोर्ट में सीधे संबंधित पुलिस स्टेशन का नाम भी शामिल किया जाता है, ताकि पीड़ित को पता रहे कि उसका मामला किस थाने में देखा जा रहा है. इसके अलावा गुम या चोरी हुए हैंडसेट में डाले गए सिम कार्ड और वैकल्पिक मोबाइल नंबर की पूरी जानकारी अब सीधे पुलिस अधिकारियों को दी जाती है, जिससे फोन बरामद होने की संभावना और बढ़ जाती है. साथ ही जब कोई फोन बरामद हो जाता है, तो उसमें मौजूद संभावित मैलवेयर से बचाव के लिए मालिक को SMS के जरिए फोन को फैक्टरी रीसेट करने की सलाह भी दी जाती है, ताकि कोई संदिग्ध सॉफ्टवेयर या डेटा लीक का खतरा न रहे.

Sanchar Saathi has flipped the plot on lost phoneswhat a game changer!📱

75,000+ handsets recovered in just ONE MONTH pan-India for the first time since its inception

@DoT_India, pic.twitter.com/lgodHyg56A

— Jyotiraditya M. Scindia (@JM_Scindia) August 28, 2026

आंकड़ों में दिखी जबरदस्त छलांग

इन तकनीकी सुधारों का असर सीधे आंकड़ों में नजर आ रहा है. दूरसंचार विभाग के मुताबिक, अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच मासिक मोबाइल हैंडसेट बरामदगी में 201 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई है. पहली बार एक ही महीने में देशभर से 75 हजार से ज्यादा हैंडसेट बरामद किए गए, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.

यह सफलता सिर्फ तकनीक की वजह से नहीं, बल्कि दूरसंचार विभाग, टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस के बीच बेहतर तालमेल का नतीजा भी है. विभाग की डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) और उसकी रीजनल यूनिट्स यानी लाइसेंस सर्विस एरिया (LSA) राज्य पुलिस के साथ मिलकर लगातार इस सिस्टम को बेहतर बनाने में जुटी हैं.

नागरिक कैसे करें रिपोर्ट, जानें आसान तरीका

अच्छी बात यह है कि इस पूरी प्रोसेस में नागरिकों के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं रखा गया है. कोई भी व्यक्ति संचार साथी की ऑफिशियल वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए कुछ आसान स्टेप्स में अपने गुम या चोरी हुए हैंडसेट की शिकायत दर्ज कर सकता है. शिकायत दर्ज होते ही फोन नेटवर्क पर ब्लॉक हो जाता है और उसके गलत इस्तेमाल की हर कोशिश तुरंत रिकॉर्ड हो जाती है, जिसकी जानकारी संबंधित पुलिस थाने को भेज दी जाती है.

दूरसंचार विभाग का कहना है कि यह पहल सरकार के डिजिटल इंडिया विजन के तहत नागरिकों को सशक्त बनाने और उनकी डिजिटल संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. ऐसे में विभाग सभी नागरिकों से अपील करता है कि अगर उनका मोबाइल कभी गुम हो या चोरी हो, तो बिना देर किए संचार साथी पोर्टल या ऐप पर इसकी रिपोर्ट जरूर दर्ज कराएं, ताकि फोन जल्द से जल्द वापस मिलने की संभावना बढ़ सके.

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है.  साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.

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