क्या है कर्नाटक का वाल्मीकि स्कैम? एक सुसाइड लेटर से खुली पोल, अब मंत्री का इस्तीफा
Aug 28, 2026 08:26 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

Karnataka Valmiki scam: कर्नाटक सरकार में मंत्री नागेंद्र ने वाल्मीकि स्कैम को लेकर इस्तीफा दिया है। ED का आरोप है कि नागेंद्र ने ही अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके इस घोटाले की साजिश रची और इसको अंजाम तक पहुंचाया।

क्या है कर्नाटक का वाल्मीकि घोटाला? मंत्री नागेंद्र ने दिया इस्तीफा
Karnataka Valmiki scam: कर्नाटक की राजनीति में भूचाल आया हुआ है। डीके शिवकुमार की सरकार में मंत्री बी. नागेंद्र को लगातार भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ रहा था। शुक्रवार को विपक्ष के दबाव में नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बता दें, नागेंद्र के ऊपर 'कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम' में करीब 89 करोड़ रुपए की गड़बड़ी करने का आरोप है। नम आंखों से इस्तीफा देने का ऐलान करते हुए शिवकुमार के मंत्री ने कहा कि वह इस मामले में पूरी तरह से निर्दोष हैं। उनके ऊपर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वह पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।
कर्नाटक की डीके शिवकुमार सरकार के लिए यह मामला गले की फांस बनता जा रहा है। मंत्री के इस्तीफे के बाद विपक्ष के हौसले बुलंद हैं। आइए जानते हैं आखिर क्या है यह घोटाला।
क्या है वाल्मीकि घोटाला?
कर्नाटक का वाल्मीकि घोटाला पिछले कुछ समय से तेजी के साथ सुर्खियां बटोर रहा है। आरोप है कि कर्नाटक सरकार की तरफ से ST समुदाय के कल्याणकारी कामों के लिए स्थापित 'कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम' के कुल फंड (187 करोड़) में से 89.63 करोड़ रुपए का हेर फेर हुआ है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस इन पैसों को गैर-कानूनी तरीकों से या तो दूसरी जगह भेज दिया गया है। आरोप है कि इस काम के लिए सैंकड़ों सैल कंपनियों और फर्जी अकाउंट्स का उपयोग किया गया है। इस मामले में विधायक और मंत्री बी. नागेंद्रन का नाम ही मुख्यतः से लिया जा रहा है।
एक सुसाइड लेटर से खुला पूरा मामला।
कर्नाटक सरकार की गले की फांस बनने वाला यह मामला 2024 में उस वक्त सामने आया था जब इस निगम में अकाउंट्स का काम देखने वाले 52 वर्षीय चंद्रशेखरन पी. ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने इस पूरे घोटाले को विस्तार से अपने सुसाइड नोट में लिखा। इस लेटर में उन्होंने बताया कि कैसे टॉप मैनेजमेंट और अधिकारियों ने उनसे बिना किसी मंजूरी और गैर-कानूनी तरीके से पैसा ट्रांसफर करने का दबाव बनाया था।
इसके बाद शुरू हुई जांच में सामने आया कि निगम के आधिकारिक खाते से करीब 88.62 करोड़ रुपए दूसरे खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। इन पैसों को फर्जी चेक RTGS और ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से करीब 600 खातों में भेजा गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां से इस पैसे को नकद के जरिए इकट्ठा किया गया था।
ईडी और एसआईटी ने मिलकर की जांच
लगातार बढ़ते इस विवाद के बीच राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया। इसके साथ में केंद्रीय एजेंसी ईडी ने भी इस मामले की जांच करना शुरू की। दोनों जांच एजेंसियों ने इस मामले में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता बी. नागेंद्रन को मास्टरमाइंड माना। इसके बाद विपक्ष के दबाव और राज्य के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की छवि को लेकर उठते सवालों के बीच उन पर इस्तीफे का दबाव बनने लगा।
नागेंद्र ने ही बनाया था पूरा प्लान- ईडी
इस मामले की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी ईडी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि विधायक बी. नागेंद्र ही इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड हैं। उन्होंने ही अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके कॉर्पोरेशन के बैंक अकाउंट को बेंगलुरु के MG रोड स्थित एक खास ब्रांच में गैर-कानूनी तरीके से ट्रांसफर करवाया था। इसके बाद उन्होंने अपने निजी स्टॉफ, करीबी सहयोगियों और प्राइवेट कंपनियों के जरिए करीब 89.63 करोड़ रुपए की हेराफेरी की।
रिपोर्ट के मुताबिक इस फर्जीवाड़े की रकम में से करीब 20 करोड़ का इस्तेमाल 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक कैंपेन चलाने के लिए किया गया था।
भाजपा और जेडीएस ने खोला मोर्चा
भारतीय जनता पार्टी और जेडीएस ने इस मामले में बी नागेंद्रन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भाजपा की राज्य सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए पदयात्रा करने का ऐलान कर दिया गया। इसी बीच नागेंद्र ने अपना इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देते हुए उन्होंने भावुक होकर आरोप लगाया कि उन्हें मनुवादियों द्वारा निशाना बनाया गया है।
बता दें, इस मामले में सीधा दबाव मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के ऊपर ही आ रहा था। ऐसे में उन्होंने शुक्रवार को ही संकेत दे दिए थे कि नागेंद्र जल्दी ही खुद को लेकर बड़ा फैसला लेंगे। हालांकि, कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री जी, परमेश्वर अंतिम समय तक नागेंद्र का बचाव करते रहे। उन्होंने दावा किया कि उनके इस्तीफे की मांग का कोई आधार नहीं है। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि जिस रकम को डायवर्ट किया गया था। उसमें से एक बड़ा हिस्सा वापस मिल चुका है।