August 27, 2026

बिलॉन्गिंग: पेंगुइन सोनिया गांधी की किताब का प्रकाशक नहीं, जानें कांग्रेस दिग्गज के संस्मरण पर कहां अटकी बात

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने शुक्रवार को साफ किया कि वह कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' की भारत में प्रकाशक नहीं है। कंपनी ने यह सफाई उन खबरों के बाद दी है, जिनमें कहा गया था कि सोनिया गांधी के संपादकीय बदलावों को स्वीकार नहीं करने के बाद प्रकाशक ने किताब से हाथ खींच लिया। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अपने बयान में कहा कि यह कहना सही नहीं है कि उसने सोनिया गांधी के संपादकीय बदलावों से इनकार करने के कारण किताब प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया। कंपनी के मुताबिक, वह किताब प्रकाशित करने के लिए 'इच्छुक और उत्सुक' थी।



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कंपनी ने कहा कि लेखक की किताब में दिए गए तथ्यों की जांच करना और उन्हें जरूरी सुझाव देना प्रकाशक का अधिकार और जिम्मेदारी है। यह प्रकाशन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सोनिया गांधी के साथ हुई बातचीत का विवरण देने से इनकार किया और कहा कि ये चर्चाएं गोपनीय थीं।

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10 नवंबर को आएगी किताब


अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ, जो पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का ही एक प्रकाशन समूह है, ने पहले घोषणा की थी कि सोनिया गांधी की किताब 10 नवंबर को प्रकाशित होगी। भारत में किताब का वितरक कौन होगा, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हालांकि, अमेजन पर किताब का ई-बुक संस्करण 2,615 रुपये की कीमत पर प्री-ऑर्डर के लिए दिखाई दे रहा है। वेबसाइट के मुताबिक, ई-बुक का प्रकाशक विलियम कॉलिन्स, हार्परकॉलिन्स यूके का एक प्रकाशन समूह है।



सोनिया गांधी की किताब में क्या है?


अल्फ्रेड ए. नॉफ के मुताबिक, 79 वर्षीय सोनिया गांधी इस आत्मकथा में पहली बार अपने निजी जीवन और राजनीतिक सफर के कई पहलुओं को विस्तार से सामने रखेंगी। किताब में इटली में उनके बचपन से लेकर भारत आने, राजीव गांधी से विवाह और एक बड़े राजनीतिक परिवार का हिस्सा बनने तक की कहानी शामिल है। किताब में राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी के राजनीति में आने, कांग्रेस की राजनीति में उनकी भूमिका और 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले का भी जिक्र है। सोनिया गांधी ने सार्वजनिक मंचों पर अपनी निजी जिंदगी के बारे में बहुत कम बात की है। ऐसे में उनकी आत्मकथा को लेकर राजनीतिक और प्रकाशन जगत में काफी चर्चा है।



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पेंगुइन पहले भी विवादों में रहा


पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया हाल के महीनों में कुछ अन्य किताबों को लेकर भी चर्चा में रहा है। जून में कंपनी ने पत्रकार और लेखक जो सैको की 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित ग्राफिक नॉवेल को भारत में वितरित नहीं करने का फैसला किया था। कंपनी ने इसके पीछे स्थानीय कानूनी, नियामकीय और व्यावसायिक परिस्थितियों को कारण बताया था। फरवरी में भी पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा फोर स्टार ऑफ डेस्टिनी को लेकर कहा था कि उसने इसकी छपाई नहीं की है। यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में इस किताब की हार्ड कॉपी दिखाई थी। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया, वैश्विक प्रकाशन समूह पेंगुइन रैंडम हाउस की भारतीय कंपनी है।