July 13, 2026

दक्षिण कोरिया में क्यों हैं एक रंग के दो अर्थ, लाल स्याही से नाम नहीं लिखते लेकिन इसी कलर की मुहर है शुभ

Image

लाल रंग की स्याही ने नाम नहीं लिखने की क्यों है कोरिया में मान्यता (AI Image)

Korean Culture: कुछ दिन पहले मेरी बात एक ऐसे दोस्त से हो रही थी, जो काम के सिलसिले में दक्षिण कोरिया में है। बातचीत के दौरान उसने मुझे कुछ ऐसा बताया जिस पर पहले तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ। उसने कहा कि अगर यहां किसी जिंदा इंसान का नाम लाल पेन से लिख दो, तो लोग उसे बहुत गलत मानते हैं।

मुझे लगा शायद मजाक कर रहा होगा। आखिर एक पेन के रंग से क्या फर्क पड़ सकता है। लेकिन जब उसने इसके पीछे की कहानी बताई, तब समझ आया कि यह सिर्फ अंधविश्वास नहीं बल्कि सदियों पुरानी सांस्कृतिक सोच से जुड़ी परंपरा है।

दक्षिण कोरिया में लाल स्याही से नाम लिखना अशुभ क्यों माना जाता है

इसकी वजह पुरानी परंपरा से जुड़ी है। दरअसल, पुराने समय में कोरिया में जब पारिवारिक रिकॉर्ड (जिन्हें स्थानीय भाषा में Hoju या फैमिली रजिस्टर कहा जाता था) तैयार किए जाते थे, तब मृत सदस्यों के नाम लाल रंग से दर्ज किए जाते थे। इससे जीवित और मृत लोगों में फर्क करना आसान होता था।

युद्ध के दौर में भी सैनिकों के नाम (शहीद होने पर) सेना की सूची से हटाते समय लाल रंग का इस्तेमाल किया जाता था। धीरे-धीरे लोगों के मन में यह धारणा बन गई कि अगर किसी जीवित व्यक्ति का नाम लाल स्याही से लिखा जाए, तो यह उसकी मृत्यु या किसी बड़े दुर्भाग्य का संकेत है। यही वजह है कि आज भी बहुत से लोग इसे अशुभ मानते हैं।

यानी साउथ कोरिया में अगर आप किसी का नाम लाल पेन से लिख दें, तो सामने वाला इसे इस तरह भी ले सकता है कि आप उसके लिए कुछ बुरा सोच रहे हैं।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती...

जब उसने यह सब बताया तो मुझे लगा कि शायद कोरिया में लाल रंग से पूरी तरह परहेज किया जाता होगा। लेकिन उसकी अगली बात ने मुझे फिर हैरान कर दिया और यह भी लाल रंग से ही जुड़ी थी। उसने बताया कि जहां रेड इंक ने नाम लहीं लिखा जाता, वहीं साउथ कोरिया में आधिकारिक दस्तावेजों पर लाल रंग की मुहर लगाई जाती है।

लाल पेन नहीं लेकिन 'डोजांग' मुहर जरूरी

बता दें कि दक्षिण कोरिया में एक पारंपरिक व्यक्तिगत मुहर होती है, जिसे डोजांग (Dojang) कहा जाता है। यह वहां हस्ताक्षर (Signature) जितनी ही महत्वपूर्ण और कानूनी रूप से मान्य होती है। बैंक का काम हो, प्रॉपर्टी के कागजात हों या कोई सरकारी दस्तावेज - इस स्टाम्प को हमेशा एक खास लाल पेस्ट में डुबोकर ही लगाया जाता है। इस पेस्ट को लोकल भाषा में इन्झू (Inju) कहते हैं। यह पेस्ट सिंदूर और विशेष तेलों से बनता है जो कई दशकों तक आसानी से मिटता नहीं है।

क्या आज की 'के-पॉप' पीढ़ी भी इस वहम को मानती है

कोरिया से बीटीएस (BTS) और नेटफ्लिक्स पर कोरियन शोज बहुत पॉपुली हैं। मगर क्या इस दौर के युवा भी इन सब बातों को मानते हैं। जब मैंने अपने दोस्त से पूछा तो जवाब मिला कि डर शायद पहले जितना नहीं है, लेकिन आदत अब भी है।

ऐसे तो स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षक कॉपियां जांचने और ग्रेडिंग के लिए लाल पेन का इस्तेमाल खूब होता है। लेकिन किसी दोस्त, सहकर्मी या परिवार के सदस्य का नाम निजी तौर पर लिखना हो, तो ज्यादातर लोग आज भी लाल पेन से बचते हैं। अब यह अंधविश्वास से ज्यादा 'सोशल एटिकेट' (सामाजिक शिष्टाचार) और सामने वाले के प्रति सम्मान का हिस्सा बन चुका है।

के-ड्रामा और कोरियन थ्रिलर्स में इसका इस्तेमाल

अगर आपने कोरियन थ्रिलर या मिस्ट्री ड्रामा (जैसे Squid Game या कोई डार्क मिस्ट्री सीरीज) ध्यान से देखे हैं, तो हो सकता है आपने कहीं किसी किरदार या शिकार का नाम लाल रंग में लिखा हुआ देखा हो। कोरियाई निर्देशक जानबूझकर ऐसे दृश्यों का इस्तेमाल करते हैं। इससे स्थानीय दर्शकों को बिना कोई डायलॉग बोले ही यह एहसास हो जाता है कि कहानी में किसी बड़े खतरे, विश्वासघात या मौत का संकेत छिपा है।

एक रंग के दो अर्थ

मुझे अपने दोस्त की पूरी बात इसलिए दिलचस्प लगी क्योंकि एक ही रंग के दो अलग अलग अर्थ यहां निकल रहे हैं। जहां एक तरफ लाल पेन से नाम लिखना अशुभ माना जाता है, तो दूसरी तरफ लाल मुहर को भरोसे का प्रतीक कहा जाता है।

इसलिए अगर कभी आपको किसी कोरियाई दोस्त के लिए कोई ग्रीटिंग कार्ड या नोट लिखने का मौका मिले, तो बेहतर होगा कि लाल पेन की जगह ब्लू या ब्लैक इंक चुन लें। आपकी यह छोटी-सी सावधानी आपके संबंध अच्छे रखेगी।

Medha Chawla

मेधा चावला author

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वा... और देखें

  • Hindi News
  • Lifestyle

End of Article