यवतमाल: मारेगांव में पगडंडी सड़कों पर अतिक्रमण से बढ़ी हिंसक झड़पें, खेतों तक ट्रैक्टर ले जाना हुआ मुश्किल
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Written By:
केतकी मोडक
Updated On: Jul 13, 2026 | 03:40 PM IST
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सार
Yavatmal Farmers News: मारेगांव तहसील में पांदण (पगडंडी) सड़कों पर अतिक्रमण के कारण किसानों के बीच हिंसक विवाद बढ़ रहे हैं। किसानों ने प्रशासन से इन रास्तों को तत्काल खाली कराने की मांग की है।

पांदण सड़क प्रतिकात्मक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
विस्तार
Yavatmal Farmers Pandan Road Dispute: यवतमाल जिले के मारेगांव तहसील के अनेक किसान आज भी अपने खेतों तक पहुंचने के लिए पगडंडी सड़कों की गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं। तालुका में कई सड़कें अतिक्रमण के कारण बंद या संकरी हो गई हैं। इसके चलते किसानों के बीच विवाद, झगड़े और पुलिस शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खरीफ सीजन शुरू होने के बावजूद शासन और प्रशासन ने इस गंभीर समस्या की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया है। किसानों ने मांग की है कि लंबित पांदण मार्गों को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कर आवागमन के लिए खुला किया जाए। खेती के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक सड़कें आजादी के बाद भी बड़े पैमाने पर उपेक्षित रही हैं।
2018 का निर्णय, लेकिन अब तक नहीं मिला लाभ
दिसंबर 2018 में पालकमंत्री पांदण सड़क योजना के तहत अतिक्रमण हटाकर कच्ची सड़कें तैयार करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन मारेगांव तालुका में इस योजना का क्रियान्वयन बेहद सीमित स्तर पर हुआ। कृषि क्षेत्र में बढ़ते यंत्रीकरण और घटती मानव श्रम उपलब्धता को देखते हुए खेतों तक वाहनों की पहुंच अत्यंत आवश्यक हो गई है। लेकिन सड़क नहीं होने के कारण ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, बीज, खाद तथा कृषि उपज का परिवहन किसानों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है।
राजस्व नक्शों में कई ग्रामीण मार्गों की चौड़ाई साढ़े 16 से 21 फीट तथा कुछ मार्गों की सवा 8 फीट दर्ज है। लेकिन अतिक्रमण के कारण वास्तविक स्थिति में कई सड़कें आधी से भी कम चौड़ी रह गई हैं। कई स्थानों पर खेत तक जाने के लिए अलग पैदल रास्ता भी उपलब्ध नहीं है। बरसात के दिनों में किसानों को जान जोखिम में डालकर आना-जाना पड़ता है। इस स्थिति के कारण रास्ते के उपयोग को लेकर किसानों के बीच अक्सर विवाद उत्पन्न होते हैं और अनेक मामले पुलिस तक पहुंच जाते हैं। इससे खेती के कार्य प्रभावित होते हैं तथा किसानों को आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।
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विविध संस्थाएं समन्वय से सुलझाएं समस्या
सड़कों की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए शासन, राजस्व विभाग, ग्राम पंचायतें, तंटामुक्त समितियां, पुलिस प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों को समन्वय के साथ अतिक्रमण हटाकर मार्ग विकसित करने की आवश्यकता है। किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए यदि तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं, तो कृषि उपज के परिवहन में तेजी आएगी और वर्षों से चली आ रही पांदण सड़कों की समस्या से किसानों को राहत मिल सकेगी।
