August 25, 2026

गजब! सऊदी अरब में थीं शिक्षिका, बिहार के स्कूल में लगती रही हाजिरी... ऐसे खुली पोल

गजब! सऊदी अरब में थीं शिक्षिका, बिहार के स्कूल में लगती रही हाजिरी... ऐसे खुली पोल

स्कूल में पढ़ाती शिक्षिका

Gopalganj teacher attendance fraud: बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर उठने वाले सवालों के बीच गोपालगंज से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि थावे प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय मुकेरी टोला की एक शिक्षिका सना रेयाज करीब 67 दिनों तक सऊदी अरब में थीं, लेकिन इस दौरान स्कूल और डीएलएड प्रशिक्षण से जुड़े रिकॉर्ड में उनकी हाजिरी लगती रही. मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने अब दोबारा जांच के आदेश दिए हैं और संबंधित अधिकारियों से सबूत के साथ रिपोर्ट मांगी है.

सना रेयाज वर्तमान में सदर प्रखंड के एक उर्दू प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत हैं. उनके खिलाफ लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं. मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद दस्तावेजों की जांच की गई. इसमें पासपोर्ट और ई-टिकट से जुड़ी जानकारी को महत्वपूर्ण माना गया है. गर रिकॉर्ड में अनियमितता साबित होती है तो कार्रवाई का दायरा शिक्षिका से आगे बढ़कर हाजिरी दर्ज करने और प्रमाणित करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों तक भी पहुंच सकता है.

67 दिन सऊदी अरब में रहने का रिकॉर्ड

जांच में सामने आए दस्तावेजों के मुताबिक शिक्षिका 21 जनवरी 2017 को नई दिल्ली से सऊदी अरब गई थीं और 30 मार्च 2017 को भारत लौटीं. इस तरह वह करीब 67 दिनों तक विदेश में रहीं. शिक्षिका का कहना है कि वह गंभीर स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए सऊदी अरब गई थीं.

हालांकि, इसी अवधि में स्कूल के उपस्थिति रिकॉर्ड में उनकी हाजिरी दर्ज होने को लेकर सवाल उठे हैं. यही नहीं, सना रेयाज उस समय डीएलएड सत्र 2016-18 की प्रशिक्षणार्थी भी थीं. प्रशिक्षण में न्यूनतम 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य थी. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब शिक्षिका विदेश में थीं, तब प्रशिक्षण केंद्र के रिकॉर्ड में उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज हुई.

प्रशिक्षण केंद्र की पंजिका पर सवाल

जांच के दौरान डायट थावे प्रशिक्षण केंद्र की उपस्थिति पंजिका के गायब होने की बात भी सामने आई है. इससे मामले की जांच और पेचीदा हो गई है. अब विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि प्रशिक्षण से जुड़े रिकॉर्ड कैसे तैयार किए गए और उन्हें किसने प्रमाणित किया.

मामले में एक और विषय जांच अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण है. उपलब्ध जन्म प्रमाण पत्र के मुताबिक शिक्षिका के पुत्र का जन्म 2 नवंबर 2017 को हुआ था. पूर्व जांच में नवंबर महीने की विद्यालय उपस्थिति पंजिका में भी शिक्षिका की उपस्थिति दर्ज होने की बात सामने आई थी. अब इस रिकॉर्ड की भी दोबारा जांच की जाएगी.

हाजिरी किसने लगाई?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में विदेश में रहने के दौरान स्कूल में शिक्षिका की उपस्थिति दर्ज होना सही पाया जाता है, तो हाजिरी किसने लगाई और उसे प्रमाणित किसने किया? विभाग अब यह भी पता लगाएगा कि इस पूरे मामले में केवल शिक्षिका की भूमिका थी या विद्यालय और प्रशिक्षण केंद्र के अन्य जिम्मेदार लोगों की भी कोई भूमिका रही. जांच में पासपोर्ट, वीजा, ई-टिकट, विद्यालय की उपस्थिति पंजिका, डीएलएड प्रशिक्षण रिकॉर्ड, अवकाश से जुड़े दस्तावेज और शिक्षिका के लिखित जवाब समेत कई साक्ष्यों को शामिल किया जाएगा.

विभाग ने दोबारा जांच के दिए आदेश

स्थापना डीपीओ विनय कुमार सुमन ने सदर प्रखंड के बीईओ नीरज कुमार को मामले के सभी बिंदुओं की जांच कर साक्ष्य के साथ रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. बीईओ के मुताबिक संबंधित शिक्षिका को बीआरसी बुलाकर मामले की जानकारी ली गई है. उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी.

फिलहाल विभागीय जांच पूरी होने का इंतजार है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विदेश में रहने के दौरान शिक्षिका की हाजिरी वास्तव में कैसे दर्ज हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है. अगर रिकॉर्ड में अनियमितता साबित होती है तो कार्रवाई का दायरा शिक्षिका से आगे बढ़कर हाजिरी दर्ज करने और प्रमाणित करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों तक भी पहुंच सकता है.

फिलहाल इस मामले ने सरकारी स्कूलों में उपस्थिति व्यवस्था और रिकॉर्ड के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल यही है कि जब शिक्षिका सऊदी अरब में थीं, तब बिहार के सरकारी रिकॉर्ड में उनकी मौजूदगी आखिर किसने दर्ज की?

मोहित पंडित

मोहित पंडित

मोहित पंडित ने साल 2004 से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत की. नई बात, सन्मार्ग, सोनभद्र जैसे अखबारों में वे अपनी सेवा दे चुके हैं. वे सीमांचल के समाचारों को सकारात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं और स्थानीय घटनाओं को उच्च स्तर पर रिपोर्ट करने में निपुण हैं. उनकी लेखनी में संवेदनशीलता और नैतिकता झलकती है.

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