August 25, 2026

बांग्लादेश: खारे पानी से बढ़ रहा दिल की बीमारी का खतरा, अध्ययन में खुलासा

बांग्लादेश: खारे पानी से बढ़ रहा दिल की बीमारी का खतरा, अध्ययन में खुलासा

बांग्लादेश: खारे पानी से बढ़ रहा दिल की बीमारी का खतरा, अध्ययन में खुलासा

बांग्लादेश: खारे पानी से बढ़ रहा दिल की बीमारी का खतरा, अध्ययन में खुलासा

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IANS

25 Aug 2026

17:25 IST

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Bangladesh: Flood Crisis in Feni

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

ढाका, 25 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश स्वास्थ्य संबंधी नई चुनौती का सामना कर रहा है। मूसलाधार बारिश और बाढ़ से समुद्री जल रिहायशी इलाकों में घुस जाता है। फिर मजबूरी में देश के तटीय इलाकों में लोगों को खारा पानी पीना पड़ता है। ये पानी लोगों की सेहत बिगाड़ रहा है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि पानी में सोडियम की अधिक मात्रा महिलाओं में रक्तचाप बढ़ा रही है, जिससे आगे चलकर हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

2023 से 2025 के बीच बांग्लादेश के तटीय इलाकों में की गई एक स्टडी में ये तथ्य सामने आए। ये नतीजे ढाका के मोहाखाली में आईसीडीडीआर,बी (अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी, बांग्लादेश) के सासाकावा ऑडिटोरियम में आयोजित एक हाई-लेवल पॉलिसी सेमिनार में पेश किए गए।

इम्पीरियल कॉलेज लंदन से जुड़े शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में तटीय बांग्लादेश की 740 महिलाओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि घरेलू पीने के पानी में सोडियम की औसत मात्रा ट्यूबवेल और भूजल इस्तेमाल करने वाले परिवारों में 933 मिलीग्राम प्रति लीटर थी। करीब 22 प्रतिशत महिलाएं ऐसा पानी पी रही थीं, जिससे प्रतिदिन दो लीटर पानी पीने की स्थिति में विश्व स्वास्थ्य संगठन की अनुशंसित अधिकतम दैनिक सोडियम मात्रा का 94 प्रतिशत तक हिस्सा केवल पानी से मिल सकता था।

अध्ययन में सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि जिन महिलाओं के पीने के पानी में सोडियम की मात्रा 1,000 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक थी, उनमें 200 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम सोडियम वाला पानी पीने वाली महिलाओं की तुलना में डायस्टोलिक यानी निचले रक्तचाप के बढ़ने की संभावना 2.3 गुना अधिक थी। हालांकि, सिस्टोलिक यानी ऊपरी रक्तचाप के साथ सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण संबंध नहीं मिला।

बांग्लादेश की समाचार एजेंसी यूएनबी ने सेमिनार में कही बातों का हवाला देते हुए कहा कि, यह समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है। 2023 से 2025 के बीच किए गए एक अन्य आकलन में 27,697 जल स्रोतों का सर्वेक्षण किया गया। इनमें 6,703 स्रोत पीने के लिए इस्तेमाल हो रहे थे। खोंइरा उपजिला में पीने के पानी के 55.3 प्रतिशत स्रोत और असासुनी में 23.3 प्रतिशत स्रोत खारे पाए गए।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक समुद्र के बढ़ते जलस्तर, चक्रवात, तूफानी लहरों और बाढ़ के कारण खारा पानी भूजल और सतही जल स्रोतों में प्रवेश कर रहा है। इससे सुरक्षित और कम-सोडियम वाले पेयजल की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी लंबे समय से बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों में लवणता को सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में रेखांकित करता रहा है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण समस्या और गंभीर हो सकती है। यही वजह है कि तटीय क्षेत्रों में पानी की लवणता की नियमित निगरानी, कम-सोडियम वाले पेयजल स्रोतों का विस्तार, वर्षाजल संचयन और जल शोधन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।

अध्ययन में यह भी कहा गया है कि सुरक्षित पानी की नीति को केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और अन्य गैर-संचारी रोगों की रोकथाम से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

–आईएएनएस

केआर/

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