आरक्षण पर प्रशांत किशोर की खरी-खरी! चलती आ रही व्यवस्था को बताया सही, दी कौन सी दलील?
Published: Saturday, August 22, 2026, 13:16 [IST]
Prashant Kishor on Reservation: आरक्षण को लेकर देश में चल रही बहस के बीच जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर का एक बयान चर्चा में है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वह आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने की बात करते हुए शिक्षा, जमीन, पूंजी और राजनीतिक भागीदारी को भी सामाजिक न्याय से जोड़ते नजर आ रहे हैं। हलांकि ये वीडियो पुराना है पर एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रशांत किशोर ने बिहार की जातीय जनगणना में सामने आए शिक्षा से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अगर किसी समाज के बच्चों तक बुनियादी और उच्च शिक्षा की पहुंच ही नहीं है, तो केवल आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने से उसका फायदा बड़े स्तर तक नहीं पहुंच पाएगा। उन्होंने कहा कि वास्तविक बदलाव के लिए शिक्षा के साथ आर्थिक संसाधनों और राजनीतिक भागीदारी में भी हिस्सेदारी जरूरी है।
जंतर-मंतर पर आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन
21 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों की पुलिस से भी स्थिति बनी और पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया। इसी बीच प्रशांत किशोर का आरक्षण को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में वह आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था, सामाजिक न्याय और समाज के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी पर अपनी बात रखते दिखाई दे रहे हैं।
ये भी पढ़ें: बांकीपुर जीतने के बाद एक्शन में PK, मांगा बेरोजगार युवाओं का CV, क्या है 10 हजार नौकरी देने का प्लान?
'मौजूदा आरक्षण व्यवस्था चलती रहनी चाहिए'
प्रशांत किशोर ने वीडियो में कहा कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने के बजाय इसे जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा, "अभी की जो आरक्षण की व्यवस्था है, यह चलती रहे। लेकिन इसके साथ-साथ, अगर आप सही में समतामूलक समाज की बात करते हैं, सामाजिक न्याय की बात करते हैं, तो राजनीतिक भागीदारी, जनसंख्या के हिसाब से राजनीतिक भागीदारी और साथ में शिक्षा, भूमि और पूंजी में हिस्सेदारी जब तक नहीं करेंगे, तब तक समतामूलक समाज की बात करना बेकार है।"
उन्होंने आरक्षण की बहस को केवल सरकारी नौकरी या सीटों के प्रतिशत तक सीमित रखने के बजाय समाज के दूसरे क्षेत्रों में हिस्सेदारी से जोड़ने की बात कही।
दलित समाज की शिक्षा का दिया उदाहरण
प्रशांत किशोर ने अपने बयान में बिहार की जातीय जनगणना का जिक्र करते हुए दलित समाज की शिक्षा की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "अभी आरक्षण की व्यवस्था दलितों के लिए बनी हुई है, आजादी के बाद से दलित समाज के लोगों के लिए। लेकिन बिहार में जो जातीय जनगणना हुआ, उसमें यह निकल कर आया कि सिर्फ 3 प्रतिशत दलित समाज के बच्चे ही आज भी बिहार में 12वीं पास करते हैं।"
इसके बाद उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी समाज के बच्चे 12वीं तक की पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं तो आरक्षण की सीमा बढ़ने के बावजूद उसका फायदा उन्हें किस तरह बड़े स्तर पर मिलेगा। उन्होंने कहा, "अगर उस समाज के बच्चे 12वीं पास नहीं कर रहे हैं, तो आरक्षण की सीमा कुछ भी हो, उसका लाभ तो उनको नहीं मिलने वाला है।"
Prashant Kishor:
🗣️ “Current Reservation system should continue.But without population-based representation in
- Education
- Land
- CapitalTrue equality cannot be achieved.” pic.twitter.com/kVIGTu1H3n
— The Analyzer (News Updates🗞️) (@Indian_Analyzer) August 22, 2026
अति-पिछड़ा और मुस्लिम समाज का भी जिक्र
प्रशांत किशोर ने अति-पिछड़े और मुस्लिम समाज की शिक्षा को लेकर भी आंकड़ों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार में इन समुदायों के 7 प्रतिशत से कम लोग ही 12वीं पास कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, "आरक्षण की सीमा चाहे 50 हो या 65 हो, उसका लाभ सिर्फ चंद परिवारों को ही मिल रहा है।" उन्होंने कहा कि आरक्षण की सीमा बढ़ाने के साथ उन वर्गों के बच्चों के लिए शिक्षा के बेहतर अवसर तैयार करना भी जरूरी है।
'शिक्षा, जमीन और पूंजी होगी तभी फायदा'
प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि आरक्षण का फायदा व्यापक स्तर पर तभी पहुंचेगा, जब संबंधित समुदायों के पास शिक्षा के साथ जमीन और आर्थिक संसाधन भी हों।
उन्होंने कहा, "व्यापक स्तर पर समाज को लाभ तब मिलेगा जब उनके लिए शिक्षा की व्यवस्था हो, उनके पास जमीन हो, पूंजी हो... तभी अगर आरक्षण की सीमा आप बढ़ा भी देंगे, तभी उनको लाभ मिलेगा, अन्यथा उनको लाभ नहीं मिलने वाला है।"
राजनीतिक हिस्सेदारी की भी उठाई बात
अपने बयान में प्रशांत किशोर ने राजनीतिक भागीदारी को भी सामाजिक न्याय का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने आबादी के हिसाब से राजनीतिक हिस्सेदारी की बात कही। यानी उनके मुताबिक सामाजिक बराबरी की चर्चा केवल आरक्षण की सीमा तक नहीं होनी चाहिए। शिक्षा, जमीन, पूंजी और राजनीति में हिस्सेदारी भी इस बहस का हिस्सा होनी चाहिए।
ये भी पढ़ें: 'डेड बॉडी' का मजाक उड़ाने वाली सेजल को NEET-12वीं में आए थे कितने नंबर, क्यों मचा जाति को लेकर बवाल?