'जीजा ने मां को पीटकर मारा', प्रज्ञा मिश्रा का चौंकाने वाला खुलासा, मामा ने बताई लखनऊ ट्रिपल मर्डर की सच्चाई!
Published: Saturday, August 22, 2026, 13:18 [IST]
लखनऊ के गोमतीनगर में SBI अधिकारी मानस बाजपेयी, उनकी पत्नी दिव्या मिश्रा और बहन शीबा उर्फ तूलिका की मौत के मामले में परिवार के अलग-अलग दावों ने कहानी को और उलझा दिया है। दिव्या की बहन और यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा ने अपने एक्स पोस्ट में मानस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि दिव्या ने उन्हें बताया था कि मानस और उसकी बहन ने अपनी बीमार मां के साथ मारपीट की थी और बाद में उनकी मौत हो गई थी। हालांकि यह परिवार की ओर से किया गया दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
वहीं मानस के मामा अखिलेश शुक्ला ने उसे साइको कहे जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "अगर मानस मानसिक रूप से असामान्य होता, मानस साइको होता तो एसबीआई जैसे बैंक में अधिकारी कैसे बनता। वह पढ़ा-लिखा था। असल दिक्कत दोनों के बीच लगातार टकराते अहंकार की थी। दोनों का झगड़ा बहुत ज्यादा बढ़ गया था।"
'साइको होता तो बैंक अफसर कैसे बनता?', बचाव में उतरे मामा
मानस को साइको बताए जाने और प्रज्ञा मिश्रा के आरोपों पर उसके परिजनों ने कड़ा एतराज जताया है। पोस्टमॉर्टम हाउस पर मौजूद मानस के मामा अखिलेश शुक्ला ने भांजे का बचाव करते हुए इन बातों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा,
"अगर मेरा भांजा साइको होता तो क्या एसबीआई जैसे प्रतिष्ठित बैंक में अधिकारी के पद पर तैनात होता? वह बेहद पढ़ा-लिखा और समझदार था। मानस और दिव्या दोनों के बीच इगो की लड़ाई थी। दोनों का इगो आपस में टकराता था और इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया।"
प्रज्ञा मिश्रा ने क्या दावा किया?
प्रज्ञा मिश्रा ने कहा कि उनकी बहन दिव्या ने उन्हें अपनी शादीशुदा जिंदगी के बारे में कई बातें बताई थीं। उनके मुताबिक, दिव्या अपने पति से अलग होना चाहती थी और घरेलू तनाव से परेशान थी। प्रज्ञा का दावा है कि दिव्या ने उन्हें बताया था कि मानस और उसकी बहन ने बीमार मां को इतना पीटा था कि उनकी मौत हो गई।
प्रज्ञा मिश्रा ने यह भी कहा कि दिव्या ने मानस को मानसिक रूप से परेशान करने वाला व्यक्ति बताया था। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि घर में मंगाए गए खराब टमाटर को लेकर भी मानस दिव्या से नाराज होकर मारपीट करता था। प्रज्ञा के मुताबिक, दिव्या ने यह भी बताया था कि फैमिली कोर्ट में काउंसलर के साथ मानस की बहस हुई थी।
प्रज्ञा ने जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए आगे लिखा,
"बैंक के सामने का सीसीटीवी मिला है, जिसमें कर्मचारी भागते दिख रहे हैं और हत्यारा गोली चला रहा है। कार से आने-जाने की थ्योरी फर्जी है, वह ऑटो से आया और ऑटो से ही भागा। पुलिस को पता लगाना चाहिए कि वह ऑटो वाला कौन था और मानस के पास तीन-तीन रिवॉल्वर कहां से आए? किसके फायदे के लिए यह सब कराया गया? ब्लिंकिट से मंगाए खराब टमाटर पर भी वह दिव्या को पीटता था। सुहागरात पर ही उसने घर के खर्चों की आधी लिस्ट थमा दी थी, जिसे बहन ने माना भी, फिर भी वह उसे प्रताड़ित करता रहा।"
हालांकि, दिव्या के पिता सतीश चंद्र मिश्रा ने भी कहा कि मानस की हरकतों से उनकी बेटी बहुत परेशान थी और परिवार की हर सुलह की कोशिश नाकाम रही।
शादी से तलाक तक, रिश्ते में क्या बिगड़ा?
प्रज्ञा के मुताबिक, शादी के शुरुआती दिनों में ही मानस ने घर के खर्च को लेकर एक व्यवस्था तय की थी। दोनों को खर्च में हिस्सा देना था। दिव्या ने कुछ समय तक यह जिम्मेदारी निभाई, लेकिन पिछले करीब एक साल से उन्होंने अपना हिस्सा देना बंद कर दिया था।
प्रज्ञा का कहना है कि मानस इसे धोखा समझने लगा था। दूसरी तरफ दिव्या रिश्ते से निकलना चाहती थीं। 18 अगस्त को फैमिली कोर्ट में सुनवाई भी हुई थी। परिवार से जुड़े लोगों के मुताबिक, दिव्या ने तलाक की प्रक्रिया शुरू कर दी थी और एलिमनी की मांग भी की थी। वह मानस की बहन तूलिका के साथ रहने को लेकर भी तैयार नहीं थीं। लेकिन प्रज्ञा का कहना है कि दिव्या पूरी तरह रिश्ता खत्म करना नहीं चाहती थीं। वह चाहती थीं कि हालात सुधरें। इसी उम्मीद में उन्होंने तीज का व्रत भी रखा था और हाथ पर मानस का टैटू भी नहीं हटवाया था।
बैंक के बाहर क्या हुआ था दिव्या मिश्रा के साथ ?
पुलिस के मुताबिक सामने आई शुरुआती जानकारी के अनुसार, गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे मानस ऑटो से दिव्या के आईसीआईसीआई बैंक पहुंचा। उसने फोन करके दिव्या को बाहर बुलाया। दोनों के बीच बातचीत और फिर विवाद हुआ। इसके बाद मानस ने दिव्या पर गोली चला दी।
प्रज्ञा ने इस घटना के सीसीटीवी का जिक्र करते हुए कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वीडियो में बैंक कर्मचारियों को भागते देखा जा सकता है। उन्होंने यह भी पूछा कि मानस के पास हथियार कैसे पहुंचे और ऑटो से आने-जाने वाले व्यक्ति की भूमिका की जांच हुई या नहीं। हालांकि, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही साफ होंगे।
घर पहुंचकर बहन और खुद को मारी गोली
दिव्या को गोली मारने के बाद मानस ऑटो से करीब दो किलोमीटर दूर अपने घर पहुंचा। उसने कमरे का दरवाजा बंद किया और तेज आवाज में हनुमान चालीसा चलाने की बात सामने आई है। इसके बाद उसने अपनी बहन शीबा को गोली मारी और फिर खुद की कनपटी में गोली मारकर जान दे दी। मानस की बहन शीबा मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं और वह मानस के साथ रहती थीं। इस घटना के बाद तीनों की मौत ने परिवार और पुलिस के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पोस्टमॉर्टम में देरी पर परिवार का हंगामा
21 अगस्त को तीनों शवों का पोस्टमॉर्टम होना था, लेकिन इसमें देरी को लेकर परिवार के लोगों ने नाराजगी जताई। दिव्या की बहन प्रज्ञा और अन्य परिजन फॉरेंसिक विभाग पहुंचे। परिवार के मुताबिक, दोपहर तक डॉक्टर पोस्टमॉर्टम के लिए नहीं पहुंचे थे।
बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया। करीब 2 बजे दिव्या का शव परिवार को सौंपा गया। मानस और शीबा के पोस्टमॉर्टम में और समय लगा। शाम करीब 5 बजे के बाद दोनों शव परिजनों को सौंपे गए।
रिपोर्ट से जुड़ी शुरुआती जानकारी में सामने आया कि दिव्या और शीबा के शरीर में गोलियां फंसी मिलीं, जबकि मानस के सिर से गोली आर-पार हो गई थी।
अंतिम संस्कार में भी दिखा परिवारों में नाराजगी
21 अगस्त देर शाम तीनों का अंतिम संस्कार किया गया। दिव्या का शव उनके जीजा भरत यादव और ममेरे भाई मयंक दीक्षित घर लेकर गए। इसके बाद बैकुंठ धाम में उनका अंतिम संस्कार हुआ। मानस और शीबा के शव उनके मामा और दूसरे रिश्तेदार सीधे बैकुंठ धाम ले गए। पहले दिव्या का अंतिम संस्कार हुआ। करीब डेढ़ घंटे बाद मानस और शीबा का अंतिम संस्कार किया गया।
इस बीच प्रज्ञा मिश्रा ने कहा कि वह अपनी बहन की मौत के बाद कैमरे के सामने बयान देने की हालत में नहीं थीं। उन्होंने उन पत्रकारों और मीडिया के वरिष्ठ साथियों का भी आभार जताया, जिन्होंने इस मुश्किल समय में निजी तौर पर उनका साथ दिया।