August 22, 2026

ट्रंप के खास 'एड मार्टिन' की जस्टिस डिपार्टमेंट से विदाई: राष्ट्रपति ने दी नई जिम्मेदारी; क्या होगी नई भूमिका?

एड मार्टिन ट्रंप प्रशासन में कई विवादित भूमिकाएं निभाने के बाद जस्टिस डिपार्टमेंट से विदा हो रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, अब मार्टिन 2026 के मिड-टर्म और 2028 के राष्ट्रपति चुनावों से जुड़ी कानूनी लड़ाइयों पर ध्यान देंगे। उनकी विदाई ऐसे समय हुई है जब ट्रंप प्रशासन चुनावी प्रक्रिया, गैर-नागरिकों के मतदान और संघीय सरकार की चुनावों में भूमिका को लेकर सक्रिय है। मार्टिन का ट्रंप के चुनावी आंदोलन और 6 जनवरी की घटनाओं से जुड़ा पुराना संबंध भी उन्हें इस राजनीतिक लड़ाई का महत्वपूर्ण चेहरा बनाता है।



मिड-टर्म और 2028 चुनावों पर नजर


ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि मार्टिन जस्टिस डिपार्टमेंट में ‘पार्डन अटॉर्नी’ यानी राष्ट्रपति की माफी से जुड़े मामलों के वकील का पद छोड़ रहे हैं। अब वह इस साल होने वाले मिड-टर्म चुनाव और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी ‘कानूनी लड़ाइयों’ पर ध्यान केंद्रित करेंगे। ट्रंप ने लिखा, 'मुझे पता है कि वह बहुत अच्छा काम करेंगे। वह यह सुनिश्चित करेंगे कि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और ईमानदार हों तथा हमारे संवैधानिक अधिकारों को मजबूती से आगे बढ़ाएंगे।'

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डीसी के अमेरिकी अटॉर्नी के तौर पर विवादों में रहे


पिछले साल डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के लिए अंतरिम अमेरिकी अटॉर्नी नियुक्त किए जाने के बाद से ही मार्टिन ट्रंप प्रशासन में विवादों के केंद्र में रहे। इस पद पर रहते हुए उन्होंने ट्रंप की ओर से 6 जनवरी की घटनाओं से जुड़े आरोपियों को बड़े पैमाने पर माफी दिए जाने के बाद उन मामलों को समाप्त करने की प्रक्रिया की निगरानी की थी। बाद में ट्रंप ने इस पद के लिए मार्टिन का नामांकन वापस ले लिया। दोनों दलों के नेताओं ने उनकी नियुक्ति को लेकर चिंता जताई थी। इनमें यह सवाल भी शामिल था कि मार्टिन के पास अभियोजक के रूप में पर्याप्त अनुभव नहीं था और उन्होंने कैपिटल पर हिंसक हमला करने वाले दंगाइयों का समर्थन किया था।

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जस्टिस डिपार्टमेंट में नई भूमिकाएं मिलीं


इसके बाद मार्टिन जस्टिस डिपार्टमेंट के मुख्यालय में ‘पार्डन अटॉर्नी’ बने और एक ऐसे समूह के निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के उन कदमों की जांच करना था, जिन्हें रिपब्लिकन नेता रूढ़िवादी लोगों को गलत तरीके से निशाना बनाने वाला बताते थे। तत्कालीन अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने उन्हें डेमोक्रेटिक सीनेटर एडम शिफ और न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स के खिलाफ मॉर्गेज फ्रॉड यानी गृह ऋण से जुड़ी कथित धोखाधड़ी की जांच में मदद के लिए विशेष वकील भी नियुक्त किया था।



लेटिशिया जेम्स को इस्तीफे की सलाह देने से बढ़ा विवाद


अपने कार्यकाल के दौरान मार्टिन कई बार सुर्खियों में रहे। लेटिशिया जेम्स के खिलाफ मॉर्गेज फ्रॉड की जांच के दौरान उन्होंने जेम्स को एक पत्र भेजकर उनसे 'अच्छी नीयत दिखाते हुए' अपने पद से इस्तीफा देने को कहा था। उन्होंने ब्रुकलिन स्थित जेम्स के घर के बाहर तस्वीरें भी खिंचवाई थीं, जिसके बाद उनके तौर-तरीकों को लेकर सवाल उठे थे। बाद में जेम्स के खिलाफ जस्टिस डिपार्टमेंट का मामला खत्म कर दिया गया। एक जज ने पाया कि मामले में आरोप लगाने वाले दूसरे अभियोजक की नियुक्ति कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं हुई थी।



वरिष्ठ अधिकारियों से मतभेद के बाद जिम्मेदारियां घटीं


बाद में जस्टिस डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेदों के चलते मार्टिन को किनारे कर दिया गया। उन्हें ‘वेपनाइजेशन वर्किंग ग्रुप’ के प्रमुख पद से हटा दिया गया, हालांकि ‘पार्डन अटॉर्नी’ की भूमिका उनके पास बनी रही। शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने मार्टिन को 'देशभक्त, जो इस देश से प्यार करता है' बताया। मार्टिन ने शुक्रवार को भेजे गए संदेश का तुरंत जवाब नहीं दिया। हालांकि, उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर ट्रंप की घोषणा को रीपोस्ट करते हुए लिखा, “सेवा करने पर गर्व है। लड़ो, लड़ो, लड़ो।”



‘स्टॉप द स्टील’ आंदोलन से रहा है पुराना नाता


डीसी के अमेरिकी अटॉर्नी पद के लिए नामित किए जाने से पहले मार्टिन ट्रंप के 'स्टॉप द स्टील' आंदोलन के नेताओं में शामिल थे। उन्होंने 6 जनवरी, 2021 को कैपिटल पर हुए हमले से ठीक पहले वॉशिंगटन में आयोजित एक रैली को संबोधित किया था। बाद में वह ऐसी गैर-लाभकारी संस्था के बोर्ड में भी शामिल हुए, जिसने कैपिटल दंगे के आरोपियों और उनके परिवारों की मदद के लिए धन जुटाया था।



ट्रंप का चुनावी मुद्दों पर बढ़ता फोकस


मार्टिन के प्रशासन छोड़ने को लेकर ट्रंप की घोषणा आगामी मिड-टर्म चुनावों में मतदान से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रपति के बढ़ते फोकस का एक और संकेत है। इन चुनावों से यह तय होगा कि ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर किस दल का नियंत्रण रहेगा। ट्रंप प्रशासन गैर-नागरिकों के मतदान के मुद्दे पर भी खासा जोर दे रहा है। विशेषज्ञों और उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक गैर-नागरिकों का मतदान बेहद दुर्लभ है, लेकिन ट्रंप लगातार इसे चुनावी धोखाधड़ी का एक बड़ा स्रोत बताते रहे हैं। उनका जस्टिस डिपार्टमेंट गैर-नागरिक मतदाताओं का पता लगाने के लिए राज्यों से मतदाता सूची से जुड़ा विस्तृत डेटा हासिल करने की कोशिश कर रहा है। साथ ही, ट्रंप कांग्रेस पर ऐसे विधेयक को पारित करने का दबाव बना रहे हैं, जिसके तहत नवंबर के चुनाव में मतदान करने के लिए नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करना जरूरी होगा।



FBI की कार्रवाई से भी बढ़ी चिंता


FBI ने एरिजोना, जॉर्जिया और मिशिगन जैसे महत्वपूर्ण बैटलग्राउंड राज्यों के सबसे अधिक आबादी वाले काउंटियों से मतदान रिकॉर्ड या चुनाव से जुड़े उपकरण हासिल किए हैं। हालांकि, एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह इन रिकॉर्ड और उपकरणों में क्या तलाश कर रही है। ट्रंप ने चुनाव से जुड़े कुछ कार्यों पर संघीय सरकार का नियंत्रण बढ़ाने के उद्देश्य से दो कार्यकारी आदेश भी जारी किए हैं। आलोचकों का कहना है कि अमेरिकी संविधान चुनाव के नियम तय करने का अधिकार मुख्य रूप से राज्यों और कांग्रेस को देता है।



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डेमोक्रेटिक राज्यों को संघीय दखल का डर


डेमोक्रेटिक राज्यों के अधिकारियों ने आशंका जताई है कि ट्रंप प्रशासन मतदान केंद्रों पर संघीय आव्रजन एजेंटों की तैनाती कर सकता है या मतदान स्थलों और चुनाव कार्यालयों में सेना भेजने का आदेश दे सकता है। हालांकि, प्रशासन के अधिकारियों ने कहा है कि ऐसी कोई योजना नहीं है।