अगर आप आज मसूरी, नैनीताल या शिमला जाने का प्लान बना रहे हैं, तो जरा संभलकर निकलें। शनिवार, 22 अगस्त 2026 को पहाड़ों पर बारिश के पूरे आसार हैं। मौसम विभाग (IMD) ने आज हिमाचल प्रदेश के कई जिलों के लिए नया 'यलो अलर्ट' जारी किया है, और बारिश का यह दौर अगले हफ्ते तक बना रह सकता है। पहाड़ी राजमार्गों पर हाल ही में हुए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) को देखते हुए बेहतर होगा कि आप अपना ट्रैवल प्लान फ्लेक्सिबल रखें और सिर्फ सुरक्षित समय पर ही सफर करें।
पहाड़ों में सुरक्षित ड्राइविंग का सीधा नियम है—सुबह जल्दी चढ़ाई शुरू करें और दोपहर ढलने से पहले नीचे उतर आएं। दोपहर बाद अचानक मौसम बिगड़ने और शाम को कोहरा छाने से घाटियों वाले रास्तों (घाट सेक्शन) पर खतरा बढ़ जाता है, जबकि सुबह के समय बारिश अक्सर हल्की और कम देर के लिए होती है। आपकी कोशिश होनी चाहिए कि सुबह 5 से 10 बजे के बीच पहाड़ों की तरफ चढ़ें और दोपहर 12 से 3 बजे के बीच वापसी कर लें। अगर रास्ते में बारिश फिर तेज हो जाए, तो गाड़ी रोककर मौसम साफ होने का इंतजार करें। हिमालयी क्षेत्रों में बारिश के पैटर्न पर हुए वैज्ञानिक शोध भी इसी टाइमिंग को सबसे सुरक्षित बताते हैं।
IMD रेन अलर्ट: सुरक्षित रूट, सही टाइमिंग और किन खतरनाक रास्तों से बचें
मसूरी: देहरादून-मसूरी मार्ग को प्राथमिकता दें और शहर का ट्रैफिक बढ़ने से पहले निकल जाएं। आज कैम्पटी की तरफ जाने से बचें, क्योंकि इस हफ्ते डिमटा बैंड के पास सड़क बहने से यातायात बाधित हुआ है। नैनीताल: हल्द्वानी-जियोलीकोट रूट का इस्तेमाल करें। अगर स्थानीय एडवाइजरी में रास्ता बंद होने की खबर हो, तो बेतालघाट-रातीघाट वाले रास्ते से बचें। शिमला: अंबाला-कालका-सोलन-शिमला मार्ग से यात्रा करें। कंडाघाट के आगे संभलकर गाड़ी चलाएं और नेशनल हाईवे-5 पर थियोग वाले पैच पर नजर रखें, क्योंकि बारिश के बाद यहां रुक-रुक कर पाबंदियां लगाई जा रही हैं। सफर शुरू करने से पहले संबंधित जिला पुलिस के सोशल मीडिया अपडेट जरूर चेक कर लें।
दिल्ली के पास 'प्लान-B' वाले ठिकाने, जहां बारिश का खतरा कम है
अगर आप कम ऊंचाई वाली जगहों पर जाना चाहते हैं जहां से वापस निकलना आसान हो, तो कोटद्वार होते हुए लैंसडाउन जाने का विचार कर सकते हैं। हल्के ट्रैफिक में दिल्ली से यहां पहुंचने में 6 से 7 घंटे लगते हैं। पंचकूला के पास मोरनी हिल्स भी एक अच्छा विकल्प है, जहां हल्की बारिश में भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा, सिरमौर जिले का नाहन दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा करीब 260-270 किमी दूर है। सुबह जल्दी निकलें, गाड़ी का फ्यूल टैंक फुल रखें और होटल बुकिंग हमेशा 'रिफंडेबल' ही करें ताकि जरूरत पड़ने पर प्लान बदला जा सके।
बस-ट्रेन का बैकअप, होटल बुकिंग टिप्स और मॉनसून ट्रैवल चेकलिस्ट
ऐसी स्थिति में ट्रेन सबसे भरोसेमंद विकल्प है। दिल्ली-देहरादून वंदे भारत हफ्ते में ज्यादातर दिन चलती है, जबकि नैनीताल जाने वालों के लिए दिल्ली-काठगोदाम शताब्दी सुबह का एक बेहतरीन विकल्प है। इसके अलावा दिल्ली ISBT से HRTC और उत्तराखंड परिवहन की एसी बसें भी चलती हैं, लेकिन निकलने से पहले बस का स्टेटस जरूर कन्फर्म कर लें। ठहरने के लिए ऐप पर 'फ्री-कैंसिलेशन' और 'पे-एट-हॉटेल' वाले फिल्टर का इस्तेमाल करें; कसौली और मोरनी में सेम-डे फ्लेक्सिबिलिटी आसानी से मिल जाती है। अपने साथ पोंचो (रेनकोट), अच्छी ग्रिप वाले जूते, टॉर्च, ORS, टो-रोप (गाड़ी खींचने की रस्सी), कार इन्फ्लेटर और ऑफलाइन मैप रखना न भूलें।