August 21, 2026

नियमों का पालन किये बिना नियमित नियुक्ति को रद्द नहीं किया जा सकता : हाईकोर्ट

Ranchi News : नियमों का पालन किये बिना नियमित नियुक्ति को रद्द नहीं किया जा सकता है. नियुक्ति रद्द करने से संबंधित सरकार के आदेश में कोई ऐसा तथ्य नहीं है जिससे इस कठोर कार्रवाई को सही करार दिया जा सके. हाईकोर्ट के न्यायाधीश दीपक रोशन ने सरकार द्वारा CGL परीक्षा को रद्द करने की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की है.

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रमेश उरांव ने सरकार द्वारा CGL परीक्षा रद्द करने के आदेश को चुनौती दी थी. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकादाता की ओर से यह दलील पेश की गयी कि सरकार ने आदेश (06/लो.से.आ.-01-07-2026 का. 5408) जारी कर विज्ञापन संख्या 10/23 के माध्यम से की गयी नियुक्तियों को रद्द कर दिया. इसके लिए कोई आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं की गयी. सरकार की यह कार्रवाई Natural Justice के नियमों के खिलाफ है.


सुनवाई के दौरान सरकार के महाधिवक्ता आर रॉय ने कहा कि नियुक्तियों में विभिन्न स्तर से अनियमितता के आरोप लगे है. CID ने इसकी जांच शुरू कर दी है. अब तक इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है. यह अत्याधिक महत्वपूर्ण मामला है. इसलिए इस मामले को निपटाने के लिए एक समय सीमा तय की जानी चाहिए. साथ ही इसे जल्द निपटाया जाना चाहिए ताकि किसी तरह की भ्रम पैदा नहीं हो.

अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने कहा कि समय की कमी की वजह से हस्तक्षेप याचिका दायर नहीं किया जा सका है. उन्होंने राज्य सरकार को CID जांच में मिले तथ्यों से संबंधित शपथ पत्र दायर करने का निर्देश देने का अनुरोध किया. महाधिवक्ता ने कहा कि कोई Intervener सरकार को शपथ पत्र दायर करने का निर्देश नहीं दे सकता है.


सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि नियमों का पालन किया बिना नियमित नियुक्ति को रद्द नहीं किया जा सकता है. सरकार द्वारा की गयी कार्रवाई से संबंधित आदेश में कोई ऐसे तथ्य नहीं है जिससे इसे सही ठहराया जा सके. इसलिए सरकार के आदेश को अमल में लाने पर न्यायालय के अगले आदेश तक रोक लगायी जाती है.

न्यायालय ने सरकार को सात सितंबर तक मामले में शपथ पत्र दायर करने का निर्देश दिया. साथ ही इस मामले के अगली सुनवाई की तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की. न्यायालय ने महाधिवक्ता को यह निर्देश दिया कि वह इस नोटिफिकेशन से प्रभावित सभी को काम करने की अनुमति देने के लिए कहें.


न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी याचिकाकर्ताओं को इस बात Affidavit/Undertaking देने का निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला उनपर लागू होगा. साथ ही सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी.

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