August 18, 2026

ग्वालियर के अस्पताल के गार्ड से मारपीट, नहीं हुई कार्रवाई: कहा- कार हटाने का कहा तो डॉक्टरों ने मुझे, मेरे भाई और भतीजे को लाठी-डंडों से पीटा - Gwalior News

ग्वालियर में मंगलवार को हुई जनसुनवाई में 1000 बिस्तर अस्पताल के एक सुरक्षाकर्मी ने आवेदन दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके और उनके परिवार से मारपीट के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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उन्होंने बताया कि 30 जुलाई को स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के चलते सुरक्षाकर्मी की ड्यूटी VIP पोर्च में लगाई गई थी। यहां खड़ी डॉक्टर की गाड़ी को हटाने के लिए कहा था। इससे गुस्साए एप्रिन पहने जूनियर डॉक्टरों ने गाली-गलौज करते हुए जानलेवा हमला कर दिया।

6 से अधिक आरोपियों ने गार्ड, उसके भाई और भतीजे को लोहे की सरियों और डंडों से पीटा था। यही नहीं, मदद के लिए पुलिस बुलाने भागे 16 साल के मासूम बेटे को भी अगवा कर पीटा गया और उसकी सोने की बाली लूट ली गई।

VIP पोर्च पर लगी थी ड्यूटी

आमखो निवासी योगेंद्र सिंह भदौरिया पिछले 5-7 वर्षों से जेएएच (J.A.H.) अस्पताल में बतौर सुरक्षाकर्मी काम कर रहे हैं। 30 जुलाई 2026 को स्वास्थ्य मंत्री के प्रस्तावित दौरे के चलते उनकी ड्यूटी 1000 बिस्तर अस्पताल के स्टाफ गेट (VIP पोर्च) पर लगाई गई थी।

अपने आवेदन में उन्होंने बताया कि अधिकारियों के कड़े निर्देश थे कि डीन, अधीक्षक और मंत्री की गाड़ियों की जगह पर कोई अन्य वाहन पार्क न हो।

इसी दौरान एक बिना डॉक्टर सिंबल वाली सफेद रंग की कार (MP07-CH2513) पोर्च में आकर खड़ी हो गई। गार्ड योगेंद्र ने जब कार चालक को गाड़ी हटाने को कहा तो चालक भड़क गया और गाली-गलौज करने लगा।

योगेंद्र के विरोध करने पर आरोपी जूनियर डॉक्टर आर्यन धनोलिया ने फोन करके अपने अन्य साथियों को बुला लिया।

अस्पताल पार्किंग में लाठी-डंडों से गार्ड से मारपीट करते डॉक्टर।

अस्पताल पार्किंग में लाठी-डंडों से गार्ड से मारपीट करते डॉक्टर।

​इसे जिंदा मत छोड़ो' का शोर और सरियों से ताबड़तोड़ वार प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सरिए और डंडे लेकर पहुंचे जूनियर डॉक्टरों ने "यह जीवित न बचे" की हुंकार भरते हुए योगेंद्र के सिर पर जानलेवा हमले शुरू कर दिए।

योगेंद्र को बचाने जब उनके भाई और भतीजे भोलू भदौरिया बीच-बचाव करने आए, तो आरोपियों ने उन्हें भी बेरहमी से पीटा। भतीजे भोलू के सिर में गहरी चोट आई और उसके गले से सोने की चेन झपट ली गई।

जब योगेन्द्र का 16 वर्षीय नाबालिग बेटा पुलिस को सूचना देने के लिए भागा, तो आरोपियों ने उसे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठा लिया और रास्ते भर मारते हुए ले गए। दरिंदगी की हद पार करते हुए आरोपियों ने मासूम के कान की सोने की बाली तक निकालकर गाड़ी की टॉमी में डाल ली। पूरी वारदात का सीसीटीवी फुटेज पार्किंग में लगे कैमरों में कैद होने का दावा किया जा रहा है।

​इलाज में लापरवाही और राजीनामे का दबाव गंभीर रूप से घायल योगेंद्र को इलाज के नाम पर भी प्रताड़ना झेलनी पड़ी। आरोप है कि रात 1 बजे तक उन्हें तड़पने दिया गया और बाद में सिर पर 19 टांके लगाए गए। भतीजे भोलू को भी 3 टांके आए हैं।

इतना ही नहीं, अस्पताल परिसर में ही पीड़ित परिवार पर राजीनामा करने का भारी दबाव बनाया गया, जिससे खौफजदा होकर परिजन एक दिन बाद ही मरीज को घर ले जाने पर मजबूर हो गए।

नामजद शिकायत के बावजूद 'अज्ञात' पर FIR पीड़ित योगेंद्र भदौरिया का कहना है कि उनके पास घटना के फोटो-वीडियो के अलावा फेसबुक व इंस्टाग्राम पर वायरल वीडियो के सबूत मौजूद हैं।

इसके बावजूद थाने में पीड़ित पक्ष की एक न सुनी गई। पीड़ित परिवार चिल्ला-चिल्लाकर मुख्य आरोपी जूनियर डॉक्टर आर्यन धनोलिया और उसके साथियों के नाम बताता रहा, लेकिन पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामूली धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली।

गार्ड बोला- ईमानदारी से कर रहा हूं काम पीड़ित सुरक्षा गार्ड योगेंद्र सिंह भदौरिया का कहना है कि मैं पिछले 7 सालों से ईमानदारी से अस्पताल में काम कर रहा हूं। अगर वीआईपी पोर्च में अवैध पार्किंग रोकना मेरा अपराध है, तो मुझे इसकी सजा मिली है। मेरे और मेरे मासूम बेटे के साथ हुई बर्बरता के सारे सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं।