यूपी में दूध में मिलावट के खिलाफ योगी सरकार का कड़ा एक्शन, केमिकल मिलने पर सीज होंगी डेयरी यूनिट्स
उत्तर प्रदेश सरकार ने दूध में मिलावट रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। हानिकारक केमिकल मिलने पर डेयरी यूनिट तुरंत बंद होगी और एफआईआर दर्ज होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने दूध में मिलावट रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। (Ai Image)
- Published: 16 Aug 2026, 04:18 PM IST
- Last Updated: 16 Aug 2026, 04:18 PM IST
milk adulteration action: उत्तर प्रदेश की जनता को शुद्ध और सुरक्षित दूध तथा डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार ने एक बहुत बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने दूध और उससे बने उत्पादों में खतरनाक रसायनों, बाहरी वसा (foreign fats) और अन्य मिलावटों के इस्तेमाल पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं। ऐसा कड़ा एक्शन लेने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।
केमिकल मिलने पर तुरंत नष्ट होंगे डेयरी उत्पाद
खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. रोशन जैकब द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यदि किसी डेयरी या प्रोसेसिंग यूनिट में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायन या बाहरी वसा पाई जाती है, तो केवल सैंपल लेने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। बल्कि, उस परिसर में मौजूद दूध और डेयरी उत्पादों के पूरे स्टॉक को तुरंत जब्त कर लिया जाएगा और नियमों के तहत उन सभी उत्पादों को नष्ट कर दिया जाएगा।
डेयरी यूनिट तुरंत होंगी बंद और दर्ज होगी एफआईआर
जनस्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 34 के तहत ऐसी इकाइयों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से रोक आदेश जारी किया जाएगा और उत्पादन का कार्य बंद करा दिया जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई प्रतिष्ठान संगठित तरीके से जनस्वास्थ्य के लिए खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल करते हुए पाया गया, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत आरोपियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाएगी।
ब्रांड की बिक्री पर प्रतिबंध और लाइसेंस होगी रद्द
नियमों का उल्लंघन करने वाले ब्रांड्स पर शिकंजा कसते हुए राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अगर किसी खास ब्रांड के उत्पादों में खतरनाक रसायन की पुष्टि होती है, तो पूरे उत्तर प्रदेश में उस ब्रांड की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। यदि वह उत्पाद उत्तर प्रदेश के बाहर भी बना हो और उसमें हानिकारक तत्व मिले, तब भी यूपी में उसकी बिक्री प्रतिबंधित रहेगी।
प्रशासनिक कार्रवाई के तहत खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य व्यवसायों का लाइसेंस और पंजीकरण) विनियम, 2011 के तहत संबंधित प्रतिष्ठान का लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन भी तुरंत निलंबित कर दिया जाएगा।
जांच में सामने आए खतरनाक रसायन और सामग्रियां
विभाग द्वारा की गई विभिन्न छापों और जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि कुछ डेयरी यूनिट्स में रिफाइंड तेल और वसा, सोयाबीन उत्पाद, टैलकम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, लिक्विड ग्लूकोज, सेपोलाइट, रैनिपाल, टिनोपल और हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसे घातक पदार्थों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
इसके अलावा, मानकों से खिलवाड़ करने के लिए न्यूट्रलाइजर्स, ब्लीचिंग और व्हाइटनिंग एजेंट्स का भी उपयोग किया जा रहा था। विभाग का कहना है कि इस तरह के घटिया और केमिकल युक्त पदार्थों से बने डेयरी उत्पादों के सेवन से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है, जिसे देखते हुए इस अभियान को और अधिक तेज किया जाएगा।