August 15, 2026

लाल किला की प्राचीर से भाषण देते वक्त पीएम मोदी से हुआ ब्लंडर? विपक्ष बोली-'सुपरह्यूमन बिना टेलीप्रॉम्प्टर के'

लाल किला की प्राचीर से भाषण देते वक्त पीएम मोदी से हुआ ब्लंडर? विपक्ष बोली-'सुपरह्यूमन बिना टेलीप्रॉम्प्टर के'

Time Updated: Saturday, August 15, 2026, 19:02 [IST]

PM Modi Independence Day Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण को लेकर शनिवार को विपक्ष ने कई सवाल उठाए। लाल किले से देश को संबोधित करते समय प्रधानमंत्री जब 2014 के बाद भारत की जैव अर्थव्यवस्था में हुई प्रगति का जिक्र कर रहे थे, उस दौरान एक जगह उनकी आवाज कुछ देर के लिए अटकती नजर आई। उन्हें अपने सामने रखे कागजों की मदद लेते हुए भी देखा गया।

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसी हिस्से का वीडियो शेयर कर प्रधानमंत्री की बोलने की शैली पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इसे टेलीप्रॉम्प्टर से जोड़ते हुए तंज कसा, जबकि अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को लेकर तीखी टिप्पणी की। विपक्ष ने भाषण में इस्तेमाल किए गए 'मानसिक नक्सल' शब्द और महिला आरक्षण व परिसीमन से जुड़े बयानों पर भी सवाल उठाए।

PM Modi Independence Day Speech

भाषण के दौरान क्या हुआ?

प्रधानमंत्री मोदी लाल किले से देश की जैव अर्थव्यवस्था में हुई प्रगति के बारे में बात कर रहे थे। इसी दौरान वह कुछ शब्दों पर अटकते हुए दिखाई दिए और फिर सामने रखे कागजों को देखकर आगे बोले। इस घटना का छोटा वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री के भाषण से जोड़कर अपनी प्रतिक्रिया दी।

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पवन खेड़ा ने कसा तंज

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने वीडियो शेयर करते हुए प्रधानमंत्री पर तंज कसा। उन्होंने लिखा, "सुपरह्यूमन बिना टेलीप्रॉम्प्टर के।"

आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी यही वीडियो साझा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री को "आत्मविश्वास से कम भरा, घबराया हुआ और अस्थिर प्रधानमंत्री" बताया।

इस बार छोटा रहा भाषण

प्रधानमंत्री मोदी का इस साल का स्वतंत्रता दिवस भाषण पिछले चार वर्षों में सबसे छोटा रहा। उन्होंने करीब 75 मिनट तक देश को संबोधित किया। वहीं 2023 में उनका लाल किले से भाषण करीब 90 मिनट का था। हालांकि समय कम रहा, लेकिन भाषण में कई बड़े मुद्दे शामिल रहे। प्रधानमंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, नक्सलवाद, छोटे और मध्यम कारोबार, उच्च शिक्षा और कोचिंग संस्थानों समेत कई विषयों पर बात की।

'मानसिक नक्सल' वाले बयान पर भी घेरा

विपक्ष ने प्रधानमंत्री के भाषण में इस्तेमाल किए गए 'मानसिक नक्सल' शब्द पर भी आपत्ति जताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि सशस्त्र माओवादी हिंसा अब खत्म होने की ओर है, लेकिन कुछ संस्थानों में नक्सली सोच अब भी मौजूद है। उन्होंने ऐसी सोच रखने वालों की पहचान कर उन्हें अलग करने की बात कही। उनका कहना था कि ऐसी ताकतें युवाओं को अराजकता की ओर ले जा सकती हैं।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस बयान को राजनीतिक भाषा बताया। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले प्रधानमंत्री ने अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए 'शहरी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया था।

रमेश ने कहा कि उस समय संसद में 'शहरी नक्सल' की परिभाषा को लेकर सवाल पूछा गया था और गृह मंत्री ने कहा था कि ऐसा कोई शब्द या उसकी कोई तय परिभाषा नहीं है। अब प्रधानमंत्री लाल किले से अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए 'मानसिक नक्सल' शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं।

जातीय जनगणना पर भी निशाना

जयराम रमेश ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि जिन मुद्दों को पहले विरोधियों से जोड़कर खारिज किया गया, बाद में उन्हीं मांगों को सरकार ने अपनाया। उन्होंने जातीय जनगणना का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले जातीय जनगणना की मांग को 'शहरी नक्सल' सोच से जोड़ा गया था, लेकिन करीब एक साल पहले सरकार ने जातीय जनगणना कराने का ऐलान कर दिया। रमेश ने यह भी कहा कि 12 साल बाद भी प्रधानमंत्री के राजनीतिक भाषण में कुछ नया नहीं था।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर भी विवाद

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के महिला आरक्षण से जुड़े बयान पर भी सवाल उठाया। जयराम रमेश ने महिला आरक्षण कानून और आने वाले परिसीमन को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद ने सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे 2024 के चुनाव में लागू नहीं होने दिया। रमेश ने आरोप लगाया कि कानून को बाद में 16 अप्रैल 2026 की शाम को जल्दबाजी में अधिसूचित किया गया।

राजीव गांधी का भी किया जिक्र

जयराम रमेश ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए स्थानीय स्तर पर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की नींव रखी गई थी।

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