August 14, 2026

देश में बनीं, दुनिया में छाईं, इन गाड़ियों ने बढ़ाया भारत का मान

Made in India Cars: 15 अगस्त को भारत में 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा. जिसके चलते आज हम आपको इस खबर में बताएंगे कि, भारत में बनी कारें अब वर्ल्ड लेवल पर धमाल मचा रही हैं. आज का भारत सिर्फ गाड़ियों का एक विशाल खरीदार बाजार ही नहीं रह गया है बल्कि दुनिया भर के लिए ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का एक बड़ा और मजबूत हब बनकर तेजी से उभर रहा है. केंद्र सरकार की मेक इन इंडिया और मेड फॉर द वर्ल्ड मुहिम का रंग अब सड़कों पर साफ-साफ उतरता हुआ नजर आ रहा है.

एक समय था जब हमारे देश की सड़कों के लिए पूरी तरह विदेशी तकनीक और आयात की गई गाड़ियों पर निर्भर हुआ करता था आज उसी भारत के चेन्नई, गुजरात और गुरुग्राम के कारखानों में बनी कारें सात समुंदर पार लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और यूरोप जैसे विकसित बाजारों की सड़कों पर अपना जलवा बिखेर रही हैं. चलिए जानतें हैं कौन सी भारत की बनी गाड़ियां विदेशों में धमाल मचा रही हैं.

इन गाड़ियों की ग्लोबल मार्केट में भारी मांग

बता दें कि, भारत से विदेशों में सबसे ज्यादा गाड़ियां भेजने का रिकॉर्ड मारुति सुजुकी के नाम ही दर्ज है. मारुति की कूपे-एसयूवी फ्रोंक्स भारत से सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट होने वाली यात्री कार बन चुकी है. लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के देशों में फ्रोंक्स के एग्रेसिव डिजाइन और टर्बो इंजन की जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है.

इसके अलावा अपनी ऑफ-रोडिंग क्षमता के लिए मशहूर मारुति जिम्नी का 5-डोर वर्जन पूरी दुनिया में सिर्फ भारत में ही तैयार किया जाता है. ऑस्ट्रेलिया, जापान और अफ्रीका के एडवेंचर प्रेमी चालक भारत में बनी इस जिम्नी के मुरीद बने हुए हैं और इसके एक्सपोर्ट में लगातार भारी उछाल देखा जा रहा है.


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मैग्नाइट और क्विड का भी दबदबा

आपको यह भी बता दें कि, जापानी कंपनी निसान के लिए भारत का चेन्नई प्लांट उसका सबसे बड़ा ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बना हुआ है. भारत में तैयार की गई निसान मैग्नाइट एसयूवी को दुनिया के 15 से भी ज्यादा राइट-हैंड और लेफ्ट-हैंड ड्राइव वाले देशों में बेचा जाता है. अफ्रीका, नेपाल, इंडोनेशिया और ब्रुनेई जैसे देशों में मैग्नाइट के स्पोर्टी लुक और बजट-फ्रेंडली दाम को काफी ज्यादा पसंद किया जाता है.

ठीक इसी तरह रेनॉ कंपनी की कॉम्पैक्ट कार क्विड और ट्राइबर भी भारत में बनकर दक्षिण अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों में धड़ल्ले से बिक रही हैं. ये गाड़ियां यह साबित करती हैं कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग की क्वालिटी ग्लोबल स्टैंडर्ड्स पर पूरी तरह खरी उतरती है.


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हुंडई और किआ की सेडान व एसयूवी का भी जलवा

बता दें कि, दक्षिण कोरियाई कार कंपनी हुंडई के लिए भारत उसकी रीढ़ की हड्डी जैसा है. हुंडई अपनी मशहूर सेडान कार वरना और कॉम्पैक्ट एसयूवी क्रेटा को भारत में बनाकर पूरे मिडिल ईस्ट देशों में भारी मात्रा में एक्सपोर्ट करती है. सऊदी अरब, यूएई और ओमान जैसे देशों में भारत में बनी वरना के प्रीमियम फीचर्स और दमदार इंजन की काफी मांग रहती है.

वहीं, इसके अलावा हुंडई की ही किआ मोटर्स अपनी सोनट और सेल्टोस एसयूवी को अनंतपुर प्लांट से तैयार करके दर्जनों देशों में भेजती है. जहां इनकी बिल्ड क्वालिटी और डिजाइन की खूब तारीफ की जाती है.

इलेक्ट्रिक कारों में भी भारत बन रहा ग्लोबल लीडर

आने वाला दौर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का है और इस रेस में भी भारत पीछे नहीं रहने वाला. मारुति सुजुकी अपनी पहली वैश्विक इलेक्ट्रिक कार ई-विटारा को भारत में ही मैन्युफैक्चर कर रही है. जिसे सीधे यूरोप के विकसित देशों में एक्सपोर्ट किया जा रहा है. इसके अलावा टाटा मोटर्स भी अपने ईवी मॉडल्स को पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतारने की पूरी रणनीति बना चुकी है.

बता दें कि, केवल कारें ही नहीं, बल्कि भारत में बनने वाले कमर्शियल ट्रक और बसें भी अब मोजांबिक, नेपाल और बांग्लादेश की सड़कों की शान बढ़ा रहे हैं. यह इस बात का सीधा सबूत है कि आने वाले समय में भारत दुनिया की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का सबसे बड़ा और भरोसेमंद पावरहाउस बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ चुका है.

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